महिलाओं को भू-संपत्ति का अधिकार नहीं

Published at :08 Dec 2013 5:06 AM (IST)
विज्ञापन
महिलाओं को भू-संपत्ति का अधिकार नहीं

घाटशिला : घाटशिला में शनिवार से शुरू अंतरराज्यी आदिवासी महासम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आये देश परगनाओं समेत अन्य वक्ताओं ने आदिवासी विवाह प्रथा पर खुल कर अपनी बातें कही. वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज में दहेज लेने और देने पर रोक लगना जरूरी है. वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज में दहेज पर […]

विज्ञापन

घाटशिला : घाटशिला में शनिवार से शुरू अंतरराज्यी आदिवासी महासम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आये देश परगनाओं समेत अन्य वक्ताओं ने आदिवासी विवाह प्रथा पर खुल कर अपनी बातें कही. वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज में दहेज लेने और देने पर रोक लगना जरूरी है.

वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज में दहेज पर रोक है, परंतु बदलते सामाजिक ताना-बाना के कारण अब दहेज का प्रचलन समाज के अंदर घुसने लगा है. इस पर कैसे रोक के लिए सामाजिक मंथन की जरूरत है.

वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज में महिलाओं को भू-संपत्ति का अधिकार नहीं होता. यह अधिकार पुरुषों के पास होता है. अब बदलते जमाने में दोनों के पास भू-संपत्ति का अधिकार होने लगा है. इस पर रोक जरूरी है. वक्ताओं ने यह भी कहा कि गांव के मांझी हाड़ाम की उपस्थिति में सामाजिक विवाह का प्रचलन है, परंतु आज स्थिति तेजी से बदल रही है.

लोग दूसरे धर्म के महिला पुरुष से विवाह कर रहे हैं. मंदिर और कोर्ट में विवाह के ले लिए जा रहे हैं. इससे सामाजिक ताना-बाना को ठेंस पहुंची है.

देश और राज्य स्तर पर गठित किया जाये परगना

कॉन्फेंस में वक्ताओं ने आदिवासी स्वशासन व्यवस्था पर कहा कि टूटते सामाजिक ताना-बाना को बचाये रखने के लिए अब जरूरत है देश और राज्य स्तर पर परगना गठित हो. वक्ताओं ने कहा कि गांव का मांझी-ग्राम प्रधान मुख्य व्यक्ति होता है. उनके नेतृत्व में सब कुछ होता है. आंचलिक स्तर पर परगना गठित है.

पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर परगना गठित है. इससे सामाजिक व्यवस्था चल रही है, परंतु आदिवासी समाज में राज्य और देश स्तर पर परगना अब तक गठित नहीं हो पायी है. वक्ताओं ने कहा कि राज्य स्तर पर पनत परगना और देश स्तर पर दिशोम परगना का चयन भी हो. इससे देश स्तर पर सामाजिक समरसता बनी रहेगी.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola