गालूडीह. गालूडीह में सुवर्णरेखा नदी तट पर बुधवार को मकर संक्रांति पर बुधवार की शाम 200 साल प्राचीन ऐतिहासिक विशाल टुसू मेला का आयोजन हुआ. मेला में झारखंडी लोक संस्कृति की झलक दिखी. लोग ढोल, धमसे और मांदर की थाप थिरके. पारंपरिक टुसू गीत और नृत्य से समां बंधा. बहुरुपियों की टोली ने पारंपरिक अंदाज में नृत्य किया. मेले में टुसू गीत के धुन बजते रहे. यहां आदिवासी जुमित गांवता क्लब गालूडीह, धातकीडीह और बोधपुर के तत्वावधान में मेला आयोजित हुआ. मेले में आसपास के गांंवों से हजारों लोग शामिल हुए.
खड़ियाडीह की टुसू को प्रथम पुरस्कार:
मेला कमेटी ने टुसू प्रतियोगिता आयोजित की. मेले में विभिन्न गांवों से करीब एक दर्जन लोग टुसू प्रतिमा लेकर पहुंचे. प्रतियोगिता में खड़ियाडीह की टुसू को प्रथम पुरस्कार 10 हजार रुपये नकद देकर सम्मानित किया. जगन्नाथपुर की टुसू को द्वितीय पुरस्कार सात हजार और पाटमहुलिया की टुसू को तृतीय पुरस्कार पांच हजार नकद दिये गये. मेला कमेटी के अध्यक्ष सुभाष सिंह, सचिव करण मुर्मू, कोषाध्यक्ष सिंगराई मुर्मू ने पुरस्कृत किया. मेला में अन्य टुसू प्रतिमा को भी पुरस्कृत किया गया.लाल-लाल, खोड़िया-खोड़िया की आवाज से मुर्गा लड़ाया गया
मेला में मुर्गा लड़ाई आकर्षक का केंद्र रही. लोगों ने लाल-लाल, खोड़िया-खोड़िया की आवाज लगाकर मुर्गा लड़ाई का आनंद उठाया. देर शाम तक मेला का दौर चलता रहा. मेले में तरह-तरह की दुकानें सजी थीं. मेले में पहुंचे लोगों ने भैरव थान मंदिर में माथा टेककर पूजा की.बाकुलचंदा की टुसू प्रतिमा प्रथम, पुरस्कार मिले
डुमरिया. डुमरिया के बड़ाबोतला स्कूल मैदान में बुधवार को युवा कमेटी बड़ाबोतला ने टुसू पर्व मनाया. यहां कुल छह टुसू प्रतिमाएं प्रतियोगिता में शामिल हुईं. हर टुसू प्रतिमा के साथ नृत्य मंडली शामिल रही. कमेटी की चयन समिति ने पुरस्कार के लिए टुसू का चयन किया.टुसू मेला देखने के लिए भारी भीड़ जुटी. प्रथम पुरस्कार बाकुलचंदा की टुसू के मिला. इन्हें पुरस्कार स्वरूप 5001 रुपये नगद दिये गये. दूसरे स्थान पर मानिकपुर की टुसू रही, जिन्हें 4001 रुपये नगद पुरस्कार दिया गया. तीसरे स्थान पर मुडाकांजिया की टुसू रही, उन्हें 3001 रुपये पुरस्कार स्वरूप दिये गये. चौथे स्थान पर रोहनीगोडा की टुसू रही. उन्हें 2001 रुपये पुरस्कार दिया गया. पांचवें स्थान पर गुढा की प्रतिमा रही, उन्हें 1001 रुपये पुरस्कार दिया गया. सांत्वना पुरस्कार देवली की प्रतिमा को 501 रुपये दिये गये. मौके पर कमेटी के अध्यक्ष जगन्नाथ दांडिया, सचिव अमरेंद्र नायेक, प्रवीर नायेक, विभीषण नायेक, सीमंत दास, अक्षय दास, ओम प्रकाश नायेक, जवाहर लाल नायेक आदि उपस्थित थे.
बुआटांड़ में टुसू मेला पांडूसाई की टुसू को प्रथम पुरस्कार
डुमरिया. डुमरिया के बीकेजेपी पुंडबाद ने बुआटांड़ पोटाश बागान फुटबॉल मैदान में 13वें वर्ष टुसू मेला व खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित की. कमेटी ने प्रथम पुरस्कार पांडुसाई की टुसू को 5001 रुपये प्रदान किये. द्वितीय स्थान के लिए गोजासाई की टुसू प्रतिमा को 4001 रुपये, तृतीय स्थान पर कुदरसाई की टुसू को 3001 रुपये देकर पुरस्कृत किए गये. चौथे स्थान पर रोहिनीगोड़ा की टीम रही. उन्हें पुरस्कार स्वरूप 1001 रुपये प्रदान किये गये. खेलकूद प्रतियोगिता के सभी विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया.
टुसू मेला जीवंत संस्कृति का प्रतीक : देवयानी
घाटशिला. घाटशिला प्रखंड की कालचिती पंचायत स्थित चापड़ी डैम में मकर संक्रांति पर टुसू मेला का आयोजन हुआ. यहां दूर-दराज के गांवों से टुसू प्रतिमाएं लायी गयी थीं. यहां बूढ़ी गाड़ी नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया. मुख्य अतिथि जिप सदस्य देवयानी मुर्मू ने कहा कि टुसू मेला झारखंड की जीवंत संस्कृति और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है. यह सामाजिक भेदभाव को मिटाकर सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करता है. मेला में उत्कृष्ट टुसू प्रतिमाओं को समिति ने पुरस्कृत किया. मौके पर विश्वनाथ गोराई, सुबोध गोराई, युगल गोराई, सुशील मार्डी, जयपाल मुर्मू, त्रिलोचन गोराई, रबिंद्र गोराई, देवाशीष गोराई उपस्थित थे.
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