धालभूमगढ़.
मकर संक्रांति पर नरसिंहगढ़ में प्राचीन काल से चली आ रही पारंपरिक नारियल लड़ाई का आयोजन किया गया. नारियल के दाम बढ़े होने के बावजूद लोगों ने परंपरा का निर्वहन करते हुए उत्साहपूर्वक इस अनोखे खेल में भाग लिया. मकर संक्रांति के दिन पूजा के बाद लोग स्वयं चौक बाजार पहुंचते हैं और नारियल लड़ाई में हिस्सा लेते हैं. इस खेल में नारियलों को छीलकर मुर्गा लड़ाई की तर्ज पर आमने-सामने खड़े होकर एक-दूसरे की ओर नारियल फेंका जाता है. जिसका नारियल फट जाता है, वह हार जाता है और फटा हुआ नारियल विजेता को देना पड़ता है. इस खेल के कोई लिखित नियम या आयोजक नहीं होते हैं. मकर संक्रांति के पर्व का आनंद लेने के लिए लोग स्वेच्छा से इस खेल में शामिल होते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि राजा के समय से ही यह परंपरा चली आ रही है. इस वर्ष नारियल की कीमत 40 से 50 रुपये तक होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने इस खेल में भाग लेकर उत्साह और परंपरा दोनों का निर्वहन किया. खेल की शुरुआत ग्राम प्रधान विशाल नामता, राज परिवार के नंदन सिंह देव, अंजय अग्रवाल, बंटी अग्रवाल, मनोज कुंडू, त्रिविद दास, रोहित साव आदि की मौजूदगी में हुई.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

