सीएनटी-एसपीटी कड़ाई से लागू हो : विधायक
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :04 Nov 2015 8:13 AM (IST)
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अधिसूचित क्षेत्रों में विभिन्न विकास कार्यों, परियोजनाओं के लिए अर्जित की गयी भूमि से हुए विस्थापन और परियोजनाओं की स्थापना से विस्थापितों के जन जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव समेत तीन बिंदुओं पर चर्चा हुई बहरागोड़ा : अधिसूचित क्षेत्रों के विधायकों के साथ राज्यपाल दौपद्री मुर्मू ने मंगलवार को राजभवन में बैठक की. बैठक में […]
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अधिसूचित क्षेत्रों में विभिन्न विकास कार्यों, परियोजनाओं के लिए अर्जित की गयी भूमि से हुए विस्थापन और परियोजनाओं की स्थापना से विस्थापितों के जन जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव समेत तीन बिंदुओं पर चर्चा हुई
बहरागोड़ा : अधिसूचित क्षेत्रों के विधायकों के साथ राज्यपाल दौपद्री मुर्मू ने मंगलवार को राजभवन में बैठक की. बैठक में आठ बिंदुओं पर चर्चा हुई. इसमें सीएनटी- एसपीटी को कड़ाई से लागू किया जाये. सुवर्ण परियोजना के तहत केरूकोचा, शीशाखून चौड़ीकरण योजनाओं में गलत ढंग से भूमि अधिग्रहित हुई है और हो रही है. इससे गरीब और असहाय लोगों को न्याय दिलायी जाय.
सरकारी मुआवजा के प्रावधानों को सार्वजनिक कर शिकायतों के निराकरण के लिए प्रखंड स्तर पर नॉडल ऑफिसर नियुक्त किया जाये. विस्थापन और पुनर्वास पर सरकार श्वेत पत्र जारी करे. सबर, बिरहोर, कालिंदी जैसी अति पिछड़ी आदिम जनजाति के लिए चलायी जा रही योजनाओं की सूचना प्रखंड मुख्यालयों द्वारा अभियान चला कर दिया जाये.
पदाधिकारी उनकी स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पीने के पानी जैसी समस्याओं के लिए गांव का दौरा कर महीने बार योजनाएं बनायें और जन प्रतिनिधियों का सुझाव लेकर इसका क्रियान्वयन करें. मनरेगा जैसी योजना में बिचौलियों की भूमिका कम की जाये. थानों में प्राथमिकता के तौर पर संथाली, हो और मुंडारी जैसी भाषाओं की जानकारी वाले पदाधिकारी की नियुक्ति की जाये, ताकि गरीब- आदिवासियों की शिकायतों को बेहतर ढंग से समझा जा सके. संताली- भाषा ओलचिकी के माध्यम से शीघ्र पढ़ाई प्रारंभ करायी जाये. ओलचिकी के शिक्षकों की नियुक्ति की जाये.
जैक में संताली भाषा को अविलंब प्राथमिकता दी जाये. प्रशासन और पुलिस पदाधिकारियों के लिए ग्राम सभा, माझी महाल, मुंडा, मानकी व्यवस्था को समझने के लिए प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन हो. आदिवासी कल्याण के लिए आवंटित राशि योजनाओं को किसी अन्य योजना मद में खर्च करने की प्रवृति पर रोक लगे.
आंध्रप्रदेश सरकार के कानून की मदद झारखंड सरकार ले सकती है. बैठक में मुख्यमंत्री रघुवर दास, स्टीफन मरांडी, दीपक बिरूआ, शशि भूषण सामंत, कुणाल षाड़ंगी, जोबा माझी, मेनका सरदार, लक्ष्मण टुडू आदि शामिल थे.
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