टीओपी का घंटों घेराव
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :09 Apr 2015 5:39 AM (IST)
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पटमदा : विधवा बुधनी किस्कू ने मिर्जाडीह स्थित ससुराल से मंगलवार को अपने छोटे बेटे को उठा कर अपने मायके कुंदरूकोचा ले जाने के विरोध में ग्रामीणों ने बुधवार को घंटो हलुदवनी टीओपी को घेरे रखा. बुधनी द्वारा पुलिस प्रशासन व समाज के दबाव में अपने पांच वर्षीय बेटे रोनक किस्कू को सुसुराल वालों को […]
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पटमदा : विधवा बुधनी किस्कू ने मिर्जाडीह स्थित ससुराल से मंगलवार को अपने छोटे बेटे को उठा कर अपने मायके कुंदरूकोचा ले जाने के विरोध में ग्रामीणों ने बुधवार को घंटो हलुदवनी टीओपी को घेरे रखा.
बुधनी द्वारा पुलिस प्रशासन व समाज के दबाव में अपने पांच वर्षीय बेटे रोनक किस्कू को सुसुराल वालों को लौटाने के बाद मामला शांत हुआ. मालूम हो कि मंगलवार को बुधनी किस्कू महिला समिति के दो अन्य महिलाओं के साथ मिर्जाडीह गांव जाकर अपने पांच वर्षीय बेटे को उठा कर पटमदा स्थित अपने मायके कुंदरूकोचा गांव लेकर भाग गयी.
इस मामले में मिर्जाडीह के ग्रामीणों ने बुधनी के साथ आये एक महिला को बंधक बना लिया था. इसके बाद बोड़ाम प्रमुख मेनका किस्कू की अध्यक्षता में पंचायत की गयी थी. बाद में हलुदवनी टीओपी प्रभारी श्री पासवान के हवाले उस महिला को सौंप कर बच्चे को वापस लौटाने को कहा था. पुलिस ने व्यवस्था के अभाव में बच्चे को वापस लाये बिना ही उस महिला को छोड़ दिया. जिसके विरोध में ग्रामीणों ने बुधवार को बच्चे को वापस लौटाने की मांग को लेकर घंटों टीओपी को घेरे रखा.
बच्चों की देख भाल दादा दादी करती है : उमेश
रोनक के दादा उमेश किस्कू व दादी पार्वती किस्कू ने बताया कि मेरे बेटे राजेश किस्कू के मरने के बाद से उसके दो बेटा व एक बेटी की खाना- पीना व पढ़ाई- लिखाई का खर्च हम दोनों दादा दादी उठाते है. सिर्फ यही नहीं बेटे के मरने के कुछ दिन बाद ही बहू ने घर छोड़ कर अपने मायके कुंदरूकोचा भाग गयी और अब चोरी छुपे बच्चों को लेकर भागने लगी है. मंगलवार को छोटे नाती रोनक को उठा कर ले भागे. इस बात का हमलोग विरोध करते है.
बच्चों को पाने के लिए न्यायालय में जाऊंगी : बुधनी
रोनक की मां बुधनी किस्कू ने बताया कि प्रशासन के दबाव में अपना बेटा ससुराल वालों को लौटा रही हूं, पर अपने बच्चों को पाने के लिए अब न्यायालय में जाऊंगी. पति के मरने के बाद सुसराल वालों ने मेरे ऊपर अत्याचार कर हमें घर से भगा दिया. समाज के लोगों ने कई बार पंचायती की, पर ससुराल वाले एक नहीं माने और मेरे बच्चों को भी मुझसे छीन लिया. मैं अपने बच्चों के साथ रहना चाहती हूं.
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