बिरहोरों को नहीं मिलता काम, बच्चे नहीं जाते केंद्र
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :10 Mar 2015 1:33 AM (IST)
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घाटशिला : घाटशिला प्रखंड की भदुआ पंचायत के बिरहोर परिवारों के समक्ष रोजगार का बेहतर साधन उपलब्ध नहीं है. मनरेगा में उन्हें रोजगार नहीं मिलता है और न ही बिरहोर बच्चे शिक्षा ग्रहण करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्र तथा स्कूल जाते हैं. वे आज भी जंगलों से सूखी लकड़ियां काट कर और चुन कर आजीविका […]
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घाटशिला : घाटशिला प्रखंड की भदुआ पंचायत के बिरहोर परिवारों के समक्ष रोजगार का बेहतर साधन उपलब्ध नहीं है. मनरेगा में उन्हें रोजगार नहीं मिलता है और न ही बिरहोर बच्चे शिक्षा ग्रहण करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्र तथा स्कूल जाते हैं. वे आज भी जंगलों से सूखी लकड़ियां काट कर और चुन कर आजीविका का साधन जुटाते हैं.
यहां के बिरहोर परिवार की महिलाएं सावे से रस्सी बनाती थी. अब महिलाएं प्लास्टिक की बोरी से रस्सी निकाल कर रस्ती बनाने का काम कर रही हैं. बड़ाजुड़ी भारत सेवाश्रम संघ से महिलाओं को बोरी उपलब्ध करायी जाती है.
बुधनी बिरहोर, सोमरा बिरहोर, मंगली बिरहोर, सुमित्र बिरहोर, सोमवारी बिरहोर, हीरा मुनी बिरहोर, मुनी बिरहोर ने कहा कि वे मनरेगा में इसलिए काम नहीं करती हैं कि समय पर उन्हें मजदूरी की राशि का भुगतान नहीं होता है, इसलिए आश्रम द्वारा दिये गये बोरियों से रस्सी बनाती हैं.
आश्रम को ही रस्सी दे देती हैं. इसके एवज में राशि मिलती है. बिरहोर बस्ती के बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र नहीं जाते हैं. बस्ती से दूर आंगनबाड़ी केंद्र है. सोमरा बिरोहर, हाईबन बिरहोर, अवनी बिरहोर, छोटू बिरहोर, विलय बिरहोर, रूही दास बिरहोर, सुखी राम बिरहोर ने कहा कि भदुआ बिरहोर बस्ती में मिनी आंगनबाड़ी केंद्र के लिए पूर्व सांसद से लेकर विधायक तथा प्रशासनिक पदाधिकारियों से गुहार लगायी गयी थी, लेकिन आज तक बस्ती में मिनी आंगनबाड़ी केंद्र नहीं बना.
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