ओलचिकी लिपि व सरना धर्म के प्रति जागरूक हो समाज
Updated at : 14 May 2018 5:57 AM (IST)
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चाकुलिया : चाकुलिया के पुराना बाजार स्थित अग्रसेन भवन में रविवार को आसेका का वार्षिक सम्मेलन संपन्न हुआ. सम्मेलन में झारखंड, पश्चिम बंगाल तथा ओड़िशा के प्रदेश स्तरी प्रतिनिधियों ने भाग लिया. कार्यक्रम की शुरुआत पंडित रघुनाथ मुर्मू की तस्वीर पर माल्यार्पण कर किया गया. मौके पर ओलचिकी लिपि तथा सरना धर्म काे सरकारी मान्यता […]
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चाकुलिया : चाकुलिया के पुराना बाजार स्थित अग्रसेन भवन में रविवार को आसेका का वार्षिक सम्मेलन संपन्न हुआ. सम्मेलन में झारखंड, पश्चिम बंगाल तथा ओड़िशा के प्रदेश स्तरी प्रतिनिधियों ने भाग लिया.
कार्यक्रम की शुरुआत पंडित रघुनाथ मुर्मू की तस्वीर पर माल्यार्पण कर किया गया. मौके पर ओलचिकी लिपि तथा सरना धर्म काे सरकारी मान्यता देने, इसके प्रचार-प्रसार करने पर विचार-विमर्श किया गया. सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल के प्रदेश अध्यक्ष माधव हांसदा ने कहा कि ओलचिकी लिपि तथा सरना धर्म के उत्थान व प्रचार-प्रसार की जरूरत है. उन्होंने कहा कि यह तभी संभव हो पायेगा, जब समाज के लोग अपनी लिपि तथा धर्म के प्रति जागरूक होंगे.
ओलचिकी लिपि तथा सरना धर्म के विकास में सरकार को मदद करनी चाहिए. इस मौके पर आदिवासी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये. सम्मेलन में लेखक शोभा नाथ बेसरा, मंगल माझी, ओड़िशा के जितेंद्र नाथ हांसदा, बहादुर सोरेन, रतन कुमार माझी, प्रिय गोपाल टुडू, चंद्र मोहन मांडी, सुभाष हांसदा, मानिक मांडी, गीतकार शेाभा नाथ हांसदा समेत अनेक लोग उपस्थित थे.
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