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लाखों खर्च के बाद तहसील कचहरी भवन सह राजस्व उपनिरीक्षक का आवास पड़ा है बेकार

Updated at : 30 Sep 2024 11:30 PM (IST)
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लाखों खर्च के बाद तहसील कचहरी भवन सह राजस्व उपनिरीक्षक का आवास पड़ा है बेकार

निर्माण के बाद से ही भवन का उपयोग नहीं होने से परिसर में ऊग गयी झाड़ी, पंचायतों में नहीं हो रहा योजनाओं का काम, प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाते हैं ग्रामीण

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रानीश्वर. प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में लाखों रुपये खर्च कर बनाये गये तहसील कचहरी भवन सह राजस्व उपनिरीक्षक का आवास निर्माण के बाद से ही बेकार पड़ा है. भवन में ताले लटके होने के कारण कचहरी भवन परिसर में झाड़ी जंगल उग आया है. दो मंजिला कचहरी भवन में ग्राउंड फ्लोर पर राजस्व उपनिरीक्षक का कार्यालय व फस्ट फ्लोर पर राजस्व उपनिरीक्षक का आवास बनाया गया है. साथ ही शौचालय तथा पानी की व्यवस्था, चाहरदीवारी निर्माण भी कराया गया है. प्रखंड क्षेत्र के बृंदावनी, सादीपुर, जयताड़ा, महेषबाथान, कदमा आदि जगहों पर दोमंजिला भवन निर्माण कराया गया है. इसके अलावा पुराने माॅडल के प्रखंड मुख्यालय, पलसा, आसनबनी आदि जगहों पर दो दशक पहले कचहरी भवन निर्माण कराया गया है. पर किसी भी भवन का उपयोग नहीं होता है. जानकारी के अनुसार पंचायतों में बनाये कचहरी भवन पर राजस्व उपनिरीक्षक का कार्यालय संचालित होने से क्षेत्र के लोगों को प्रखंड मुख्यालय पहुंच कर राजस्व उपनिरीक्षक से मिलने के लिए चक्कर नहीं काटना पड़ता. जानकारी के अनुसार यहां 17 पंचायतों में नौ हल्का है. दो-दो पंचायतों को मिला कर हल्का बनाया गया है. एक हल्का के लिए एक राजस्व उपनिरीक्षक का पद सृजित किया गया है. राजस्व उपनिरीक्षक यदि अपने क्षेत्र के कचहरी भवन में रह कर कार्य करेंगे तो साधारण लोगों को राजस्व उपनिरीक्षक से मिलने प्रखंड मुख्यालय का चक्कर काटना नहीं पड़ेगा. पर यह सिस्टम लागू करने के लिए पहल शुरू नहीं की गयी है. केस स्टडी-एक : मोहुलबोना में आठ साल पहले बना था भवन मोहुलबोना पंचायत के कदमा मिडिल स्कूल के नजदीक करीब आठ साल पहले दो मंजिला कचहरी भवन निर्माण कराया गया है. भवन की चहारदीवारी निर्माण कर गेट भी लगाया गया है. अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध है. पर यहां कभी राजस्व उपनिरीक्षक नहीं बैठने से परिसर के चारों ओर झाड़ी जंगल ऊग आये हैं. यहां कार्यालय संचालित होने से मोहुलबोना व तालडंगाल पंचायत के लोग आसानी से अपना काम करा सकते थे. यहां से प्रखंड मुख्यालय की दूरी करीब 25 किलोमीटर है. फोटो 1 कदमा कचहरी भवन केस स्टडी-दो : बिलकांदी में दो सला पहले बना था भवन बिलकांदी पंचायत के जयताड़ा गांव में करीब दो साल पहले कचहरी भवन निर्माण कराया गया है. भवन निर्माण के बाद से भवन में ताला लटका रहने से चारों ओर झाड़ी जंगल ऊग आये हैं. इस भवन का किसी भी तरह का उपयोग नहीं हो रहा है. यहां कार्यालय संचालित होने से ग्रामीणों को 15-20 किलोमीटर दूरी तय कर प्रखंड मुख्यालय का चक्कर नहीं काटना पड़ता. कार्यालय संचालित होने से पंचायत के 22 गांवों के लोगों को सुविधा होती. सरकार ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए एक के बाद एक भवन निर्माण कराकर सरकारी राशि बर्बाद कर रही है. पर भवन के उपयोग की दिशा में पहल नहीं कर रही है. फोटो 2 जयताड़ा कचहरी भवन केस स्टडी-तीन : सादीपुर में तीन साल पहले बना था भवन सादीपुर पंचायत के सादीपुर पंचायत भवन परिसर में करीब तीन साल पहले दो मंजिला कचहरी भवन निर्माण कराया गया है. पर इस भवन का कोई उपयोग नहीं हो रहा है. भवन निर्माण के बाद से भवन में ताला लटका हुआ है. ग्रामीणों को काम के लिए प्रखंड मुख्यालय का ही चक्कर काटना पड़ता है. यहां कार्यालय संचालित होने से सादीपुर व कुमिरदहा पंचायत के ग्रामीणों को सुविधा होगी. इसके अलावा बृंदावनी व महेषबाथान में भी कचहरी भवन बेकार पड़ा हुआ है. फोटो 3 सादीपुर कचहरी भवन

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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