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पांडवेश्वरनाथ पहाड़ की तलहटी में आदिवासी संस्कृति व रास मेले की समृद्ध परंपरा

Updated at : 06 Jan 2026 11:47 PM (IST)
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पांडवेश्वरनाथ पहाड़ की तलहटी में आदिवासी संस्कृति व रास मेले की समृद्ध परंपरा

मकर संक्रांति के अवसर पर पांडवेश्वरनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. जनजातीय विरासत का अनूठा संगम दिखता है.

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बासुकिनाथ. झारखंड की स्थानीय जनजातीय विरासत और धार्मिक आस्था का एक अनूठा संगम जरमुंडी प्रखंड की बरमासा पंचायत अंतर्गत पांडवेश्वरनाथ पहाड़ की तलहटी में देखने को मिलता है. यहां आदिवासी संस्कृति और रास मेले के आयोजन की एक पुरानी और समृद्ध परंपरा रही है, जो आज भी पूरी भव्यता के साथ निभायी जाती है. मकर संक्रांति के अवसर पर पांडवेश्वरनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. इसी अवसर पर पहाड़ की तलहटी में रास मेला का आयोजन किया जाता है, जहां पारंपरिक आदिवासी नृत्य, संगीत और रीति-रिवाजों की जीवंत झलक देखने को मिलती है. यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि आदिवासी सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण मंच बन चुका है. पौराणिक मान्यता के अनुसार महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान इस क्षेत्र में कुछ समय बिताया था और पहाड़ की गुफा में भगवान शिव की पूजा की थी. इसी कारण इस स्थान का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है. आज भी पांडवेश्वरनाथ गुफा और मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. रास मेले के दौरान आदिवासी युवाओं के बीच पारंपरिक खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं. वहीं मूर्तिकारों द्वारा राधा-कृष्ण एवं गोपियों की भव्य प्रतिमाएं स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है. क्षेत्र आदिवासी बहुल होने के कारण मेले में संताल, पहाड़िया सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों की संस्कृति स्पष्ट रूप से झलकती है. यह मेला सामाजिक सद्भाव और भाईचारे का भी प्रतीक है. दर्जनों गांवों के लोग इसमें बड़ी संख्या में भाग लेते हैं. पारंपरिक नृत्य, ढोल-मांदर की थाप और सामूहिक पूजा लोगों को एक सूत्र में बांधती है. रास पूजा सरना और सनातन परंपरा को जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाती है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जरमुंडी क्षेत्र में धान कटनी के बाद विभिन्न स्थानों पर रास मेला का आयोजन होता है, लेकिन पांडवेश्वरनाथ पहाड़ की तलहटी में लगने वाला मेला अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आदिवासी रंग के कारण विशेष महत्व रखता है. यह आयोजन क्षेत्र की पहचान का अहम हिस्सा बन चुका है और हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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BINAY KUMAR

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