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दुर्गापूजा : लायेकपाड़ा में 47 वर्ष पहले बंद हुई थी बलि प्रथा

Updated at : 15 Sep 2025 7:25 PM (IST)
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दुर्गापूजा : लायेकपाड़ा में 47 वर्ष पहले बंद हुई थी बलि प्रथा

सादीपुर निवासी निताई पद लायेक, जो रघुनाथपुर हाईस्कूल के शिक्षक थे. वर्ष 2003 में सेवानिवृत्त हुए. 83 वर्षीय श्री लायेक दुर्गापूजा कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं.

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वैष्णव पद्धति से अब हो रही है पूजा प्रतिनिधि, रानीश्वर रानीश्वर प्रखंड के सादीपुर गांव के लायेकपाड़ा में दुर्गापूजा वैष्णव पद्धति से आयोजित होती है. यहां 47 वर्ष पहले बलि प्रथा बंद कर दी गयी थी. पहले यहां दुर्गापूजा में बकरे की बलि चढ़ाने की परंपरा थी. सादीपुर निवासी निताई पद लायेक, जो रघुनाथपुर हाईस्कूल के शिक्षक थे. वर्ष 2003 में सेवानिवृत्त हुए. 83 वर्षीय श्री लायेक दुर्गापूजा कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं. उन्होंने बताया कि 47 वर्ष पहले उन्होंने निर्णय लिया कि दुर्गापूजा में जीव हत्या उचित नहीं है. उन्होंने मंदिर के पुजारी और ग्रामीणों से चर्चा की, लेकिन कोई सहमत नहीं हुआ. अंततः जब बकरे की बलि चढ़ाने की तैयारी पूरी हो गयी, श्री लायेक ने खुद अपनी गर्दन बलि के खूंटे में रख दी. कहा कि पहले मेरी बलि चढ़ाओ. इसके बाद बकरे की बलि देना बंद कर दिया गया. इस घटना के बाद मामला थाने तक पहुंचा और तत्कालीन बीडीओ गोपाल चक्रवर्ती तथा विधायक बाबूलाल किस्कू ने उनका समर्थन किया. सादीपुर लायेकपाड़ा की दुर्गा पूजा 250 वर्ष से भी पुरानी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANAND JASWAL

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