जीवन बहुमूल्य है इसे व्यर्थ में न गवाएं. समस्याओं से जूझना सीखें और समाधान के उपाय ढूंढें : डॉ जैनेंद्र

Updated at : 11 Sep 2024 12:11 AM (IST)
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जीवन बहुमूल्य है इसे व्यर्थ में न गवाएं. समस्याओं से जूझना सीखें और समाधान के उपाय ढूंढें : डॉ जैनेंद्र

एसपी काॅलेज में मनाया गया वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे. वक्ताओं ने कहा कि आत्महत्या किसी भी समस्या का वैकल्पिक समाधान नहीं है.

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दुमका. एसपी कॉलेज दुमका में मेंटल हेल्थ काउंसलिंग सेंटर एवं मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे मनाया गया. प्रभारी प्राचार्य डॉ खिरोधर प्रसाद यादव की उपस्थिति में संपन्न इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एसकेएमयू के डीएसडब्ल्यू डॉ जैनेंद्र कुमार यादव ने कहा कि देश में लाखों में आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं चिंतनीय है. जीवन बहुमूल्य है, इसे व्यर्थ में न गवाएं. समस्याओं से जूझना सीखें और समाधान के उपाय ढूंढें. तनाव को दूर करने के लिए योग और मेडिटेशन करें. वहीं डॉ खिरोधर प्रसाद यादव ने कहा कि हमें आत्मसंतोष रखकर जीवन में चलना चाहिए. तनाव को दूर करने के लिए प्रकृति से जुड़ें, किताब पढ़ें, मनोरंजन व खेलकूद की विधाओं से जुड़ें और जीवन में आगे बढ़ने का प्रयत्न जारी रखें. विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित जिला मानसिक स्वास्थ्य केंद्र दुमका के साइकियाट्रिक सोशल वर्कर डॉ जुल्फिकार अली भुट्टो ने कहा कि आज महिला से ज्यादा पुरुष आत्महत्या कर रहे हैं. इनमें छात्र और किसान सबसे ज्यादा की संख्या में हैं. 15-19 वर्ष के उम्र के लोग ज्यादा आत्महत्या की ओर प्रवृत्त होते पाए गए, जिसकी रोकथाम आवश्यक रूप से की जानी चाहिए. आत्महत्या की घटनाओं को रोका जा सकता है, इसके लिए जनता के साथ सरकार और प्रशासन का भी सहयोग अपेक्षित है. अतिथियों का स्वागत करते हुए मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया के नोडल पदाधिकारी डॉ विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि आत्महत्या किसी भी समस्या का वैकल्पिक समाधान नहीं है. भारत में विषम परिस्थितियों के कारण युवा मानसिक तनाव के साथ-साथ चिंता, विषाद आदि का भी शिकार हो रहे हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक विद्यार्थी व छोटे उद्यमी लोग ज्यादा आत्महत्या कर रहे हैं. वर्तमान में देश का 10 प्रतिशत युवा विषाद के शिकार है. आज युवा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अभाव व सामाजिक व आर्थिक विषमता के वातावरण में घिर जहां चारित्रिक विकार के शिकार हो रहे हैं, वहीं असफलता से मिली निराशा के आवेश में आकर मौत को गले लगा लेते हैं. कहा कि आत्महत्या कमजोर अहम वाले करते हैं जो वास्तविकता का सामना न कर गलत निर्णय ले लेते हैं. आत्महत्या के निवारण हेतु स्वास्थ्य व स्वच्छ वातावरण का होना बहुत जरूरी है. सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता द्वारा व्यापक स्तर पर आत्महत्या को रोका जा सकता है. कार्यक्रम का संचालन डॉ सीमा कुमारी ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ किलिस मरांडी ने किया. कार्यक्रम में मनोविज्ञान और समाजशास्त्र के विद्यार्थी उपस्थित थे.

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