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जीवन जीने की असली कला सिखाती है राम कथा

Updated at : 11 Jun 2025 7:40 PM (IST)
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जीवन जीने की असली कला सिखाती है राम कथा

मानव का यह स्वभाव होता है कि यदि व्यक्ति के जीवन में धन बढ़ता है तो मन स्वत: ही बदल जाता है. घर में पूरा संसाधन रहने के बाबजूद कुछ लोग रोते हैं.

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सरैयाहाट. सरैयाहाट बाजार स्थित ठाकुरवाड़ी परिसर में नौ दिवसीय रामकथा नवाहपरायण महायज्ञ में कथावाचक रविशंकर ठाकुर ने कहा कि राजा-प्रजा, भाई-भाई, देवर-भाभी में कैसा संबंध होना चाहिए, यह ज्ञान हमें राम कथा बताती है. उन्होंने कहा कि मानव का यह स्वभाव होता है कि यदि व्यक्ति के जीवन में धन बढ़ता है तो मन स्वत: ही बदल जाता है. घर में पूरा संसाधन रहने के बाबजूद कुछ लोग रोते हैं क्योंकि उसने जीवन में ईश्वर भजन नहीं किया. सिर्फ आंतरिक सुख के लिए संसाधन जुटाने में जीवन व्यतीत कर दिया. माता-पिता की सेवा की ही नहीं. कहा कि हमें माता पिता से नजर उठाकर बात नहीं करनी चाहिए. यह भी राम कथा बताती है. राम कथा जीवन जीने की असली कला सिखाती है. जो इस कला को अपने जीवन में उतार लेता है, उसे मृत्यु का डर समाप्त हो जाता है. महाभारत में धृतराष्ट्र अपने बेटे से बात करने में भयभीत रहते थे, कहेंगे तो दुर्योधन मानेगा कि नहीं यह सोचते थे. लेकिन रामायण में दशरथ क्या कहेंगे राम पहले जान जाते हैं और वह कर देते हैं. राम कथा के श्रवण से समस्त पापों का नाश हो जाता है. राम कथा सुनने आसपास के गांव सहित दूरदराज से लोग ठाकुरबाड़ी परिसर पहुंच रहे हैं. श्रद्धालुओं से पूरा पंडाल सहित मंदिर परिसर खचाखच भरा रह रहा है. भीड़ की व्यवस्था को बनाये रखने के लिए जगह- जगह एलईडी लगायी गयी है. इस कार्यक्रम को सफल बनाने में यज्ञ समिति के तमाम सदस्य सहयोग में जुटे हुए हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANAND JASWAL

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