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खेतों में सड़ रहा कद्दू, लागत पर भी आफत

Updated at : 16 May 2025 11:10 PM (IST)
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खेतों में सड़ रहा कद्दू, लागत पर भी आफत

मंडी पहुंचाने का नहीं निकल रहा किराया, मेहनत की फसल मिट्टी में मिली

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सरडीहा के बेहरन टोला में दो से तीन बीधे में लगी फसल बर्बाद आदित्यनाथ पत्रलेख, बासुकिनाथ जरमुंडी प्रखंड के किसानों की मेहनत इस बार बेकार चली गयी. कद्दू के दाम इतने गिर गये हैं कि उन्हें खेत से तोड़ने का भी मन नहीं हुआ. सरडीहा बेरहन टोला के खेतों में हजारों कद्दू यूं ही सड़ते पड़े हैं. किसान न तो उन्हें बाजार ले जा पा रहे हैं और न ही कोई खरीदार आ रहा है. किसान रसिक सोरेन बताते हैं पिछले साल कद्दू की खेती से अच्छा मुनाफा हुआ था. इस बार तो हजारों का घाटा हो गया. बाजार में इतना कम दाम है कि लागत भी नहीं निकल पा रहा है. खेत की मालकिन किसान सुकुरमुनी सोरेन ने दुख जताते हुए कहा करीब दो-तीन बीघा खेत में कद्दू की खेती की थी. अगहन-पौष में बीज बोया था, फाल्गुन से फल आना शुरू हुआ. शुरू में महीने थोड़ा बहुत कद्दू बिका, लेकिन फिर दाम इतना गिर गया कि कोई खरीदार भी नहीं आया. उन्होंने बताया कि कुल 7-8 हजार रुपये की ही बिक्री हो सकी. बाकी सब्जी खेत में ही सड़ रही है. ऊपर से कद्दू की चोरी भी हुई, जिससे नुकसान और बढ़ गया. बाजार में भाव नहीं, खेत में मेहनत बर्बाद किसानों का कहना है कि इस समय कद्दू 10-20 रुपये प्रति पीस बिक रहा है. पर सही दाम नहीं मिल रहा. मंडी तक ले जाने का किराया भी नहीं निकल रहा, ऐसे में किसान फसल को खेत से तोड़ने में भी हिचक रहे हैं. किसान बाबूलाल सोरेन ने बताया कि मूली, टमाटर, भिंडी, झींगा जैसी सब्जियां भी खेतों में ही बर्बाद हो रही हैं. बाजार और खरीदार दोनों का अभाव है. ऊपर से बेमौसम बारिश और आंधी-तूफान ने खेती को और नुकसान पहुंचाया है. कुछ किसान गांव-गांव घूमकर सब्जियां बेचने की कोशिश कर रहे हैं. पर उन्हें भी वाजिब कीमत नहीं मिल रही. अधिक उत्पादन और मौसम की मार के चलते इस समय सब्जियों के दाम काफी गिर गये हैं. किसानों ने सरकार से मांग की है कि वे सब्जी उत्पादकों को उचित समर्थन मूल्य प्रदान करें. स्थानीय स्तर पर खरीद की व्यवस्था करे, ताकि खेत में पसीना बहाने वाले किसान यूं ही मायूस न हो जाये. कोल्ड स्टोरेज रहता तो किसानों को नहीं होता नुकसान जरमुंडी में कोल्ड स्टोरेज की सुविधा अगर किसानों को मिलती तो उसकी सब्जी सुरक्षित रहती और ज्यादा कीमत भी वसूल हो पाते. कोल्ड स्टोरेज नहीं रहने से किसानों की उत्पादित साग, सब्जियां खेतों में सड़ कर बर्बाद हो जाती हैं. गौरतलब है कि प्रखंड क्षेत्र की 80 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर है. यहां के किसान काफी मात्रा में टमाटर, आलू, प्याज सब्जी की व्यापक पैमाने पर खेती करते हैं. पर कोल्ड स्टोरेज नहीं रहने के कारण वाजिब कीमत नहीं मिल पाती है. बिचाैलिये सब्जी को औने-पौने भाव में खरीद कर अधिक मुनाफा कमा रहे हैं. किसान से संपर्क किये थे. दाम अच्छा नहीं मिलने के कारण खेत में कद्दू का फसल खेत में ही छोड़ दिया, जिसके कारण बर्बाद हो गयी. जरमुंडी में कोल्ड स्टोरेज बन कर तैयार है. हैंडओवर नहीं किया गया है. पांच एमटी का कोल्ड स्टोरेज लैंपस में चालू है. पर इसका लाभ नहीं मिल रहा है. वहीं सभी पंचायत में किसानों के लाभ के लिए पांच एमटी का कोल्ड स्टोरेज बनने का प्रस्ताव है. अक्षय कुमार साह, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, जरमुंडी

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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