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दुमका का बिरसा मुंडा आउटडोर स्टेडियम बदहाल, चहारदीवारी टूटने के बाद असामाजिक तत्वों की रहती जमघट

Updated at : 09 May 2025 11:47 PM (IST)
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दुमका का बिरसा मुंडा आउटडोर स्टेडियम बदहाल, चहारदीवारी टूटने के बाद असामाजिक तत्वों की रहती जमघट

खंडहर में तब्दील भवन दे रहे हादसे को न्यौता. शाम होते होते ही असामाजिक तत्वों की जमघट. झारखंड बनने के बाद स्टेडियम को विकसित किया गया था.

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दुमका. उपराजधानी दुमका का बिरसा मुंडा आउटडोर स्टेडियम पूरी तरह बदहाल है. इसके मुख्य गेट जहां टूटे हुए हैं, वहीं पैवेलियन व ग्रीन रूम के लिए बनाया गया भवन खंडहर में तब्दील हो चुका है. मैदान में कंकड़-पत्थर गिरे रहने से एथलीटों को दौड़ लगाने में परेशानी आ रही है तो फिजिकल फिटनेस के लिए भी अन्य गतिविधियां वे बेहतर ढंग से नहीं कर पाते. मैदान के चारों तरफ बनी गैलेरी भी ध्वस्त होती जा रही है. चहारदिवारी टूटने से आउटडोर स्टेडियम का इस्तेमाल आम रास्ते के रूप में पुलिस लाइन से लोग राजभवन की ओर जाने के लिए करने लगे हैं. खंडहर में तब्दील भवन दे रहे हादसे को न्यौता : बिरसा मुंडा आउटडोर स्टेडियम के भवन में लगभग डेढ़ दशक तक हॉस्टल के छात्रों का कब्जा रहा. एसपी कॉलेज के छात्रों को एक बार यहां तत्कालिक व्यवस्था के तहत रखा गया, उसके बाद यहां से हटवाने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी. भवन आज खंडहर में तब्दील हो चुका है. पिलर से छड़ साथ छोड़ रहे हैं. चौखट-दरवाजे व खिड़कियां असामाजिक तत्व ले जा रहे हैं. ग्रिल तो पहले ही उखाड़ लिया गया है. किसी आंधी-बारिश में भवन भरभरा कर ढह न जाए, यह डर लोगों को सताता रहता है. शाम होते होते ही असामाजिक तत्वों की जमघट : जैसे ही शाम ढलने लगती है, आउटडोर स्टेडियम में असामाजिक तत्वों की जमघट लगने लगती है. कुछ लोग नशा आदि करने के बाद बोतल आदि यहीं फेंक देते हैं, जिससे खिलाड़ियों की परेशानी बढ़ जाती है. फिलवक्त बिरसा मुंडा आउटडोर स्टेडियम की देखरेख करने वाला कोई नहीं है. न ही इस स्टेडियम से ऐसी चीजों को हटाने या साफ-सफाई करनेवाला ही कोई है. झारखंड बनने के बाद स्टेडियम को किया गया था विकसित : झारखंड अलग राज्य बनने के बाद दुमका में बिरसा मुंडा आउटडोर स्टेडियम को विकसित किया गया था. तब इसमें चारों ओर चाहरदिवारी बनायी गयी थी और दर्शकों के बैठने के लिए गैलेरी बनाये गये थे. खिलाड़ियों के विश्राम, आवासन व ग्रीन रूम व अन्य कार्यों के लिए भवन भी बनाया गया था. लगभग ढाई दशक में इस स्टेडियम में सामान्य मरम्मत भी नहीं करायी गयी. यही वजह रही है कि जब कोई टू्र्नामेंट कराने की योजना बनती है तो पहले ग्राउंड को दुरुस्त करना पड़ता है. मैदान में घास नहीं है. केवल कठोर मिट्टी वाली समतल जगह है. कई बार स्टोन डस्ट गिरा दिये जाने से इस मैदान में कंकड़ीले पत्थर खिलाड़ियों को जख्म पहुंचाते रहते हैं. लगभग 8 करोड़ रुपये से नया स्टेडियम बनना है प्रस्तावित : बिरसा मुंडा आउटडोर स्टेडियम की बदहाली दूर करने और यहां नया स्टेडियम बनाने के लिए आठ करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना का प्रस्ताव बनाकर विभाग को भेजा गया है. इस वित्तीय वर्ष में इसकी प्रशासनिक स्वीकृति मिल जाने की उम्मीद जतायी जा रही है. परियोजना में सभी पुराने ढांचे को तोड़कर नयी चाहरदिवारी, गैलेरी, ग्राउंड डेवलपमेंट, डोरमेट्री, जिम्नेजियम, स्टेज व पार्किंग आदि की व्यवस्था विकसित की जाएगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAKESH KUMAR

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