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मां की चिता ठंडी भी नहीं हुई थी कि बेटे की अर्थी श्मशान घाट आ पहुंची

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
घर के बाहर बैठे परिजन.
घर के बाहर बैठे परिजन.
फोटो : प्रभात खबर

सरैयाहाट (दुमका) : जवान बेटे के गुमशुदगी के गम को मां बर्दाश्त नहीं कर सकी और इस दुनिया से चल बसी. तीन दिनों से लापता बेटे के इंतजार में उसकी आंखें पथरा सी गयी थी और दिल बैठता जा रहा था. अंतत: 65 वर्षीय पैंतरी देवी ने सोमवार को दम तोड़ दिया. दरअसल शनिवार को जवान बेटा सुबोध यादव कोठिया से कहीं भटक गया था. उसकी मानसिक स्थिति कुछ दिनों से सही नहीं चल रही थी. भागलपुर से इलाज चल रहा था.

बेटा का कोई सुराग नहीं मिलने से उसकी मां काफी परेशान हो रही थी. वह अपने पोते-पतोहु के विलाप को भी सहन नहीं कर पा रही थी और किसी अनहोनी घटना को लेकर वह आशंकित थी. बेटे के नहीं मिलने के गम में सोमवार सुबह अचानक उसकी मृत्यु हो गयी. सोमवार को इस परिवार पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा था.

मां का शाम में अंतिम संस्कार हुआ. चिता ठंडी भी नहीं हुई थी कि सुबोध यादव का भी शव मिलने की जानकारी परिजनों को हुई. एक तरफ दादी की मौत दूसरी ओर पिता की मृत्यु ने सुबोध के 17 साल के बेटे पिंटू यादव को बेसहारा कर दिया. सबसे दुःखद मंजर यह था कि एक ही दिन आगे पीछे घर से शव यात्रा निकली. श्मशान घाट में घर के लकड़ी भी कम पड़ रहे थे.

कब्रिस्तान में पड़ा मिला था सुबोध का शव

सुबोध यादव का शव कब्रिस्तान में पड़ा हुआ मिला था. देर शाम किसी ने सरैयाहाट थाना पुलिस को सूचना दी कि बिजली ऑफिस के पास कब्रिस्तान में एक व्यक्ति मृत पड़ा है. थाना प्रभारी पिंकू कुमार यादव पुलिस बल के साथ कब्रिस्तान पहुंचे और शव की जांच पड़ताल की तथा इसकी सूचना कुरमा गांव में दी गयी. जहां उसके परिजनों ने आकर शव की शिनाख्त की.

पुलिस के अनुसार सुबोध के शव को देखने से लगता था कि उसकी मृत्यु शनिवार को ही हो गयी थी. शव काफी खराब हो गया था, जिसके कारण परिजन शव का पोस्टमार्टम नहीं करना चाहते थे. लेकिन पुलिस ने कुछ तकनीकी पहलू के कारण मंगलवार को शव का पोस्टमार्टम कराया. शव गांव आते ही पिंटू व उसकी मां चीत्कार उठे. परिजनों के आवेदन पर पुलिस के द्वारा यूडी केस दर्ज किया गया है.

मानसिक तौर पर बीमार था सुबोध

सुबोध की कुछ महीने से मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी. वह खामोश रहने लगा था. उसका ईलाज भागलपुर में चल रहा था और लॉकडाउन में उसकी दवाइयां नियमित नहीं चल पा रही थी. यही वजह थी कि दिनोंदिन लॉकडाउन में उसकी स्थिति खराब हो रही थी. घरवालों की निगरानी में ही सुबोध रहता था और सभी उसकी देखभाल करते थे.

शनिवार को घर के लोग अपने-अपने काम में व्यस्त थे तो वह कपड़ा बदलकर अचानक घर से निकल गया. आसपास खोजबीन करने के बाद भी उसका पता नहीं चल पाया. एक तो सुबोध के मानसिक स्थिति खराब रहने से मां पैंतरी देवी को चिंता सता रही थी, दूसरा उसे डर था कि कहीं कुछ अप्रिय न हो जाय. उसका डर सही साबित हुआ. पुत्र दुनिया छोड़ चुका था.

Posted By: Amlesh Nandan Sinha.

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