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अब तक कालाजारमुक्त नहीं हो सका है दुमका जिला

Updated at : 28 Nov 2024 11:13 PM (IST)
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अब तक कालाजारमुक्त नहीं हो सका है दुमका जिला

पीजेएमसीएच मेडिसिन वार्ड में 32 मरीजों का इलाज इलाज हो पाया है. इस वर्ष जिले में 32 कालाजार के मरीज पाये गये.

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दुमका नगर. फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कालाजार मरीजों के उपचार के लिए संसाधनों की कमी नहीं है. जनवरी से अबतक पीजेएमसीएच मेडिसिन वार्ड में 32 मरीजों का इलाज इलाज हो पाया है. इस वर्ष जिले में 32 कालाजार के मरीज पाये गये. इसमें 28 वीएल और पीकेडीएल के मरीज शामिल हैं. जामा प्रखंड के 12, सदर प्रखंड के तीन, शिकारीपाड़ा के पांच और काठीकुंड, रामगढ़ और जरमुंडी के 4-4 मरीज शामिल हैं. इस वर्ष मार्च में पांच, अप्रैल में छह, मई में चार, जून में पांच, जुलाई में छह और नवंबर में छह मरीजों का इलाज हुआ. पीजेएमसीएच में चिकित्सारत कालाजार के मरीजों के पर्याप्त संख्या में इंजेक्शन उपलब्ध है. संदिग्ध मरीजों की पहचान के लिए बोन मेरो जांच की भी सुविधा उपलब्ध है. कालाजार उन्मूलन के लिए जिला के सभी प्रखंडों में स्पेशल एक्टिव केस सर्च अभियान चलाया जा रहा है. 10 प्रखंड के 58 गांवों में अभियान चलाया जा रहा है. सर्च अभियान के दौरान कालाजार संदिग्ध मरीजों को चिह्नित कर सीएचसी भेजा जाता है, जहां संदिग्ध मरीजों की जांच के बाद संक्रमित पाये जाने पर उनका इलाज किया जाता है. मरीज की हालत गंभीर पाये जाने पर पीजेएमसीएच में भर्ती कराया जाता है.

सीएचसी में आरके 39 जांच की सुविधा उपलब्ध

कालाजार की रोकथाम और पहचान के लिए जिला के सभी सीएचसी में आरके 39 जांच की सुविधा उपलब्ध है. आरके 39 जांच के बाद अगर लक्षण दिखे तो इसे कंफर्म करने के लिए पीजेएमसीएच में बोनमेरो जांच की सुविधा है. सभी सीएचसी और पीजेएमसीएच में जांच और दवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. कालाजार संक्रमित मरीज के इलाज के लिए सिंगल डोज दिया जाता है. मरीज के वजन के अनुसार चिकित्सक डोज निर्धारित करते हैं. मरीज को एक दिन भर्ती रखा जाता है. सिंगल डोज दवा देकर दूसरे दिन छुट्टी दे दी जाती है.

क्या कहते हैं पदाधिकारी

किसी को भी 15 दिनों से अधिक का बुखार हो तो वह अपना ब्लड जांच जरूर करा लें. ताकि समय पर इसकी पहचान कर समय पर इसका इलाज किया सके. इसे फैलने से रोका जा सके. ग्रामीण क्षेत्र के लोगों से अनुरोध है कि मच्छरदानी का उपयोग करें. घर में साफ-सफाई रखें. ताकि बालूमक्खी न पनपें. साल में दो बार कीटनाशी छिड़काव किया जाता है. छिड़काव दल को पूर्ण रूप से सहयोग करें. ताकि कालाजार से मुक्ति मिल सके.

डॉ मो जावेद, जिला मलेरिया पदाधिकारी

प्रखंडवार चिह्नित मरीज

जामा – 12

सदर -3

शिकारीपाड़ा -5

काठीकुंड – 4

रामगढ़ – 4

जरमुंडी – 4

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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