दुमका के पांच प्रवासी मजदूरों को गुजरात में मुक्त कराया गया

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दुमका के पांच प्रवासी मजदूरों को गुजरात में मुक्त कराया गया

सभी मजदूर पिछले नौ महीने से गुजरात के गोगिश प्लांट में काम कर रहे थे. सभी प्रवासी मजदूर आदिम जनजाति समुदाय के हैं.

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दुमका. दुमका जिले के पांच प्रवासी मजदूरों को कंट्रोल रूम और प्रवासी सहायता एवं सूचना नेटवर्क टीम की पहल से गुजरात से मुक्त कराकर घर वापस पहुंचाया गया. जानकारी के अनुसार दुमका जिले के मसलिया प्रखंड के दरबारपुर पंचायत अंतर्गत भुलपहाड़ गांव के पांच प्रवासी मजदूर बुधन पुजहर, उमेश पुजहर, सुशील पुजहर, सामा पुजहर और रासमुनी पुजहरिन पिछले नौ महीने से गुजरात के गोगिश प्लांट में काम कर रहे थे. सभी प्रवासी मजदूर आदिम जनजाति समुदाय के हैं. इन्हें अक्टूबर 2024 को जिले के रामगढ़ के अमडापहाड़ी गांव के निवासी जगदीश मंडल और धीरेन उर्फ राहुल मंडल बेहतर काम दिलाने की बात कहकर गुजरात के गोगिश प्लांट ले गया, जहां आठ घंटे काम करने के मौखिक समझौते के विपरीत जबरन 12 घंटे काम कराया जाता था. यहां तक कि सही समय पर मानदेय का भुगतान भी नहीं किया जाता था और प्रवासी मजदूरों को बंधक बनाकर उनका शारीरिक, मानसिक और आर्थिक शोषण हो रहा था. परिवार के आश्रित शंभू पुजहर ने कई बार एजेंट से संपर्क कर उन्हें सुरक्षित घर वापस भेजने के लिए अनुरोध किया. लेकिन एजेंट द्वारा अनुरोध को कई बार अनसुना कर दिया. इसके बाद उन्होंने श्रम विभाग दुमका में लिखित शिकायत की, लेकिन विभाग की ओर से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. 12 जुलाई 2025 को शंभू पुजहर ने दुमका जिला श्रम विभाग से संबंधित मामले के बारे में जानकारी लेनी चाही, तब विभाग ने उन्हें एजेंट के खिलाफ रामगढ़ थाना में लिखित शिकायत पत्र देने के लिए सलाह दी. शंभू पुजहर ने 30 जुलाई 2025 को एजेंट के खिलाफ रामगढ़ थाना में लिखित शिकायत पत्र निबंधित कर प्रेषित कर दिया. लेकिन प्रशासन की ओर से भी संतोषजनक पहल नहीं हुई. अंतत: शंभू पुजहर ने झारखंड राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष को मामले के संबंध में लिखित जानकारी देकर गुजरात से प्रवासी मजदूरों को सुरक्षित घर वापस लाने के लिए गुहार लगायी. झारखंड राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष, रांची ने मामले को त्वरित संज्ञान में लेते हुए प्रवासी मजदूरों को लाने के लिए उचित पहल की. एजेंट के वर्चस्व के कारण कंपनी से प्रवासी मजदूरों को वापस आने नहीं दिया जा रहा था, लेकिन कंट्रोल रूम का दबाव होने से कंपनी को वापस भेजने के लिए मजबूर किया गया. कंपनी ने प्रवासी मजदूरों को मानदेय देकर 12 अगस्त 2025 को भेज दिया. 14 अगस्त को सुरक्षित दुमका पहुंच कर प्रवासी सहायता एवं सूचना नेटवर्क के हब सेंटर जोहार मानव संसाधन विकास केंद्र, दुमका के डायरेक्टर जॉन फेलिक्स से संपर्क कर आपबीती घटना बतायी. उन्होंने प्रवासी मजदूरों को प्रवासन पूर्व बुनियादी तैयारी करने की सलाह दी.

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