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गोभी की खेती ने बदल दी खसिया के किसानों की तकदीर

Updated at : 22 Oct 2025 11:04 PM (IST)
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गोभी की खेती ने बदल दी खसिया के किसानों की तकदीर

कोयरी समाज के 200 परिवार कर रहे खेती, डीप बोरिंग से कर रहे खेतों की संचाई

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रामगढ़. दुमका-भागलपुर स्टेट हाईवे के किनारे बसे रामगढ़ प्रखंड के लतबेरवा पंचायत का खसिया गांव जिले में सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में मिसाल बन चुका है. कभी केवल धान और मक्का की मानसूनी खेती पर निर्भर रहने वाला यह गांव अब फूलगोभी, बंधा गोभी और करेले की खेती के लिए प्रसिद्ध है. यहां के मेहनती किसानों ने परिश्रम के बल पर अपनी आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी सुधार किया है. गांव में लगभग 200 कोइरी परिवार रहते हैं, जिनमें लगभग हर किसान गोभी की खेती करता हैं. औसतन हर किसान सालाना एक लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रहा है. अब खसिया में एक भी कच्चा घर नहीं है. यहां के पक्के मकान इस बात के गवाह हैं कि गोभी की खेती ने गांव की तस्वीर बदल दी है. जुलाई से गोभी की बुआई शुरू होकर मार्च तक बाजारों में इसकी आपूर्ति बनी रहती है. दुमका, हंसडीहा, गोपीकांदर, सरैयाहाट, बासुकिनाथ सहित कई मंडियों में खसिया की गोभी की जबरदस्त मांग है. कभी दुमका में बाहर से गोभी मंगानी पड़ती थी, लेकिन अब यहां की गोभी भागलपुर, बांका, गोड्डा भेजी जाती है. किसानों ने सीमित जमीन पर सामूहिक रूप से खेती कर यह साबित किया है कि एकजुटता से सफलता पाई जा सकती है. बढ़ती मांग को देखते हुए अब बीज कंपनियां खुद खसिया गांव पहुंचकर उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराती हैं. यह बदलाव अचानक नहीं आया. 1989-90 में “जल है जहान है ” योजना के तहत बने सिंचाई कूपों ने खेती की तस्वीर बदल दी. बाद में मनरेगा के तहत सिंचाई साधन बढ़े, जिससे किसानों को स्थायी जलस्रोत मिले. अब गांव में डीप बोरिंग और बिजली से चलने वाले पंप भी हैं. आज हर घर में मोटरसाइकिल, कई घरों में चारपहिया वाहन हैं. बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. हरे चारे की उपलब्धता बढ़ने से दूध उत्पादन भी बढ़ा है. खसिया का यह परिवर्तन वहां के किसानों की मेहनत और लगन का परिणाम है. यदि सरकार तकनीकी सहायता, सस्ता कर्ज और जैविक खेती का प्रशिक्षण दे, तो यह गांव राज्य ही नहीं, देशभर में “गोभी गांव” के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सकता है. क्या कहते हैं किसान 1989-90 में उपायुक्त सुधीर कुमार के कार्यकाल में ‘जल है जहान है’ योजना से बने सिंचाई कूपों ने गांव की खेती बदल दी. मनरेगा व डीप बोरिंग से सिंचाई बढ़ी, बिजली मोटर से खर्च घटा. अब किसान साल में दो-तीन बार गोभी उगाकर आर्थिक रूप से सशक्त हो गए हैं. अक्षय कुमार महतो पहले दुमका में गोभी रांची से आती थी, पर अब खसिया गांव के किसान रोज हंसडीहा मंडी में गोभी बेचते हैं. यहां से गोभी कई जिलों में भेजी जाती है. आज दुमका ताजी सब्जियों के लिए प्रसिद्ध है, जो किसानों की मेहनत और बदलते हालात का प्रतीक है. रामानंद महतो लगातार बढ़ती आय से गांव में सामाजिक और आर्थिक बदलाव स्पष्ट है. सभी घर पक्के हैं, हर घर में दो-तीन बाइक हैं. बच्चों में शिक्षा का रुचि बढ़ा है, लड़कियां उच्च शिक्षा ले रही हैं, बाल विवाह घटा है. मवेशियों के लिए चारा उपलब्ध है, दूध उत्पादन बढ़ा और पोषण स्तर सुधरा है. सदानंद महतो

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAKESH KUMAR

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