हरिणमारा के ग्रामीणों में आक्रोश, सड़क, नाली व शुद्ध पेयजल के लिए जताया विरोध

Updated at : 25 May 2024 8:28 PM (IST)
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हरिणमारा के ग्रामीणों में आक्रोश,  सड़क, नाली व शुद्ध पेयजल के लिए जताया विरोध

गांव तक जाने का रास्ते नहीं, पीने का पानी नहीं, चुनाव में इस गांव में अब तक कोई नेता नहीं पहुंचे

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बासुकिनाथ. जरमुंडी प्रखंड हथनामा पंचायत अन्तर्गत हरिणमारा गांव में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है. ग्रामीणों ने सुविधाओं की मांग को लेकर विरोध जताया. जनप्रतिनिधियों के विरोध में नारे भी लगाये. ग्रामीण कंचन कुमार, मुकेश राय, प्रकाश यादव आदि ने बताया कि मुख्य पथ से गांव तक जाने का रोड नहीं, लोगों ने बताया कि इस चुनाव में मतदान तो करेंगे लेकिन किसी प्रत्याशी के पक्ष में नहीं. सरकार कहती है गांवों का विकास हुआ है. लेकिन इस गांव तक रोड नहीं बना है. सबसे ज्यादा परेशानी बीमार लोग व प्रसव के लिए महिलाओं को गांव से बाहर ले जाने में होता है. गांव आने जाने के लिए रास्ते नहीं है, इस वजह से कंधों पर उठाकर बीमार व प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिलाओं को मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है. ऐसे में हमेशा अनहोनी घटना का खतरा बना रहता है. कई बार उच्च अधिकारियों से इसकी शिकायत की. पर इसका सुधि लेने वाला अबतक कोई नहीं है. गांववालों ने समस्या को नियति मान लिया है. जनप्रतिनिधियों से मिलकर कई बार गांव की समस्याओं से अवगत कराये, लेकिन किसी ने गांव के विकास पर ध्यान नहीं दिया. ग्रामीणों ने बताया कि यदि गांव में कोई बीमार पड़ जाये तो मरीज की स्थिति खराब हो जाती है. चार पहिया वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाती है. ग्रामीणों ने बताया कि पिछले दिनों एंबुलेंस नहीं पहुंचने के कारण बीमार बच्चे को अस्पताल ले जाने में देर हो गयी, जिससे उसकी जान चली गयी. अबतक तीन मरीजों की जान जा चुकी है. बरसात के दिनों में स्थिति नारकीय हो जाती है, बारिश के दिनों में गांव तक मोटरसाइकिल भी बड़ी मुश्किल से पहुंच पाती है.

हरिणमारा की 600 की आबादी महज एक चापानल पर निर्भर

इस गांव में सड़क, नाली, नलकूप सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है. पेयजल की भी घोर कमी है. गांव में तीन चापानल में दो चापानल खराब पड़ा हुआ है. जिसके भरोसे गांव के लोगों की प्यास बुझती है. ग्रामीण अपने स्तर से चंदा उठाकर कच्ची सड़क पर मिट्टी मोरम डलवा रहे हैं ताकि लोगों को आवागमन में सुविधा मिले. गांव के बीचोंबीच कच्ची सड़क पर बड़ा गड्ढा बन गया है. कच्ची सड़क तालाब बना हुआ है. गड्ढे के पानी में शैवाल जो हरा हो गया है. ग्रामीण बताते हैं कि लोकसभा चुनाव के इस मौसम में अबतक किसी भी पार्टी के नेता वोट मांगने भी नहीं आये हैं. करीब 600 की आबादी वाले इस गांव में सुविधाओं का घोर अभाव है. लोगों ने बताया कि गांव में 15 वीं वित्त आयोग से एक पुलिया बनी है. पर वह भी बिचौलिया के भेंट चढ़ गया है. दो महीना बाद एक ट्रैक्टर के चढ़ने से पुलिया का पहुंच पथ पीसीसी टूट गया है. मौके पर ग्रामीण कंचन कुमार यादव, मुकेश कुमार राय, महेंद्र राय, लालचंद्र राय, मनीष दास, हुरो महतो, उर्मिला कुमारी, जीतू महतो, श्यामसुंदर राय, सुजीत कुमार यादव, प्रकाश कुमार यादव, लक्ष्मण यादव आदि मौजूद थे.

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