चिंता और विषाद लोगों की आम मानसिक समस्या : डॉ विनोद

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चिंता और विषाद लोगों की आम मानसिक समस्या : डॉ विनोद

चिंता और विषाद लोगों की आम मानसिक समस्या हो गयी है.

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एसपी कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग में मना विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस विश्व में करीब एक बिलियन लोग मानसिक रोग समस्या से ग्रसित कुल आबादी में 14.3 % भारतीय मानसिक रोग से हैं पीड़ित संवाददाता, दुमका एसपी कॉलेज दुमका के मनोविज्ञान विभाग द्वारा संचालित मेंटल हेल्थ काउंसलिंग सेंटर व मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में विभागाध्यक्ष सह निदेशक डॉ विनोद कुमार शर्मा की अध्यक्षता में ”” विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस ”” मनाया गया. डॉ शर्मा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं जहां ज्यामितीय गति से बढ़ रही है. वहीं निराकरण का प्रयास अंकगणितीय गति से चल रही है. चिंता और विषाद लोगों की आम मानसिक समस्या हो गयी है. ऐसे में तीव्र गति से बढ़ते मनोरोग के उपचार की जगह रोग के मनो-सामाजिक कारणों पर अंकुश लगाने की जरूरत है. डॉ शर्मा ने कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ और तंदुरुस्त रहने से न केवल खुद को रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रख सकते हैं. मन में सहयोग, सहानुभूति और परोपकार की भावना को जिंदा रख सकते हैं, बल्कि एक तनावमुक्त सामाजिक वातावरण का रास्ता भी सुगम कर सकते हैं. आज के दौर में जहां इंटरनेट एडिक्शन, व्यक्तित्व विकार, एंटी सोशल बिहेवियर, साइबर क्राइम्स, बुलिंग, ऑनलाइन छेड़खानी आदि मनोविकारी समस्याएं जहां फन उठाये निदान को चुनौती बनी है. वहीं चिंता, विषाद, फोबिया जैसे मानसिक विकार लोगों की आम समस्याएं बनती जा रही है, जहां विषाद युवाओं में अग्रणी मानसिक समस्या है, जहां आवेश में आकर आत्महत्या करते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व में करीब एक बिलियन लोग मानसिक रोग समस्या से ग्रसित हैं, जिसमें 53 प्रतिशत महिलाएं प्रभावित है. वहीं भारत में 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक करीब कुल जनसंख्या का 14.3 प्रतिशत लोग मानसिक रोग से पीड़ित हैं, जहां ट्रीटमेंट गैप 28 से लेकर 83 प्रतिशत तक है. फिर भी, ऐसा नहीं कहा जा सकता है मानसिक विकारों के फैलते प्रभाव को कम करने के लिए सार्थक एवं प्रभावकारी कदम नहीं उठाए जा रहे. मौके पर डॉ त्रिजा जेनिफर टोप्पो ने कहा ऐसे कार्यक्रमों से समाज को बेहतर करने का एक मौका मिलता है. ऐसे कार्यक्रम हमेशा होते रहना चाहिए. डॉ किलिश मरांडी ने भी कहा कि आज संताल परगना में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बहुत अधिक है. समाज में व्याप्त अंधविश्वास और कलंक को दूर करना भी जरूरी है. अंत में विभागाध्यक्ष ने इंटरनेट एडिक्शन से बचने एवं साइबर अपराध से दूर रहने के प्रति विद्यार्थियों को शपथ दिलवायी.

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