शिवरात्रि मेले में दिखेगा आस्था, कला व संस्कृति का समागम

महाशिवरात्रि. दानीनाथ मंदिर परिसर में पांच दिनों तक चलेगा मेले का आयोजन
महाशिवरात्रि. दानीनाथ मंदिर परिसर में पांच दिनों तक चलेगा मेले का आयोजन कभी दूर-दराज से बैलगाड़ियों से बंगला पंचरस देखने आते थे लोग प्रतिनिधि, काठीकुंड साहिबगंज-पाकुड़ मुख्य मार्ग पर स्थित दानीनाथ मंदिर भी महाशिवरात्रि महापर्व के लिए भव्य तैयारियों में जुटा है. यहां न केवल स्थानीय श्रद्धालु, बल्कि बिहार और बंगाल से भी लोग इस आयोजन में भाग लेने आते हैं. मंदिर परिसर की साज-सज्जा और मेले की व्यवस्था में प्रशासन और मंदिर समिति का तालमेल इस आयोजन को भव्य और सुचारू बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं. मंदिर समिति अपने वालंटियर्स के साथ भीड़ प्रबंधन में जुटी है, वहीं पुलिस प्रशासन ने भी मंदिर के मुख्य द्वार और मेला परिसर में पुलिस कैंप स्थापित किए हैं. गतिविधियों पर नजर रखने के लिए परिसर में दो दर्जन से अधिक सीसीटीवी कैमरे और तीन प्रमुख स्थानों पर पीटी जेट कैमरे लगाए गए हैं. इन कैमरों के माध्यम से कंट्रोल रूम में किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी. स्वास्थ्य सेवाओं के लिए चिकित्सा विभाग ने मेडिकल टीम को तैनात करने की तैयारी कर ली है. महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर दानीनाथ मंदिर में होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए न केवल भक्ति और आस्था का अनुभव कराएगा, बल्कि उन्हें कला, इतिहास और संस्कृति के अद्भुत संगम से भी परिचित कराएगा. दुमका सांसद करेंगे उद्घाटन इस भव्य मेले का उद्घाटन मुख्य अतिथि दुमका सांसद नलिन सोरेन द्वारा किया जाएगा. उनके साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला परिषद अध्यक्ष जॉयस बेसरा और स्थानीय विधायक आलोक कुमार सोरेन भी उपस्थित रहेंगे. यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि क्षेत्र के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में भी विशेष स्थान रखता है. काशी के पंडितों द्वारा होगी संध्या आरती, निकलेगी शिव बारात मेले के प्रथम दिन, बुधवार को संध्या सात बजे काशी विश्वनाथ मंदिर के पुरोहितों द्वारा संध्या आरती की जाएगी. इसके बाद रात आठ बजे दानीनाथ मंदिर से शिव बारात निकलेगी, जो पूरे काठीकुंड बाजार का भ्रमण करने के बाद मंदिर प्रांगण में लौटेगी. यह शोभायात्रा आकर्षक झांकियों और गाजे-बाजे के साथ श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह का संचार करेगी. 27 फरवरी और 1 मार्च को जनसंपर्क विभाग द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम और झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी. वहीं, 28 फरवरी को ऑर्केस्ट्रा और 2 मार्च को संताली ड्रामा और आतिशबाजी के साथ इस मेले का समापन होगा. दानीनाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व इस मंदिर का भौतिक स्वरूप वर्ष 1936 में अस्तित्व में आया. कहा जाता है कि उस समय के एसडीओ बसंत कुमार चटर्जी जब काठीकुंड से लौट रहे थे, तो उनकी गाड़ी उसी स्थान पर खराब हो गयी, जहां आज यह मंदिर स्थित है. मरम्मत में असमर्थ होने के कारण उन्होंने स्थानीय डाकबंगला में रात गुजारी. रात्रि स्वप्न में उन्हें एक वृक्ष के नीचे शिवलिंग होने का आभास हुआ. सुबह उन्होंने स्थानीय लोगों के सहयोग से उस स्थान की खुदाई करवायी, जहां से शिवलिंग प्राप्त हुआ. इसके बाद विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा कर इस मंदिर की नींव रखी गयी. मंदिर की देखभाल के लिए पैरधा जाति के पुजक समुदाय को बसाया गया और उनके जीवनयापन के लिए मंदिर के आसपास की भूमि भी प्रदान की गयी. शिलाकृतियों का संग्रहालय: कला और इतिहास का संगम दानीनाथ मंदिर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि प्राचीन शिलाकृतियों का एक खुला संग्रहालय भी है. यहां गणेश, काली और दुर्गा की मूर्तियों सहित कई प्राचीन शिलाकृतियां स्थापित हैं. कहा जाता है कि ये शिलाकृतियां काठीकुंड प्रखंड के गांधर्व, चौधार और भीतरी पहाड़ियों में स्थित तालपहाड़ी के देवधरा नाला से प्राप्त की गयी हैं. यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ ऐतिहासिक धरोहर का प्रमाण भी है. यहां बहने वाले झरने के बीच स्थापित शिलाकृतियों का कालखंड आज भी शोध का विषय है. यदि पुरातत्व विभाग इस पर ध्यान दे तो निस्संदेह यहां छुपे इतिहास के कई रहस्यों का पता लगाया जा सकता है. मंदिर का संचालन: आस्था और सहयोग का मेल मंदिर के विकास कार्य मुख्य रूप से मेले में लगने वाली दुकानों के प्लॉट सेल से प्राप्त आय पर आधारित है. इसके अलावा, भक्तजनों द्वारा मनोकामना पूर्ण होने के उपरांत चढ़ावा और दानपेटी में प्राप्त राशि से भी मंदिर के रखरखाव का कार्य किया जाता है. इस प्रकार भक्तों की आस्था और सहयोग के बल पर यह मंदिर न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी केंद्र बना हुआ है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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