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सावन पूर्णिमा को 75 हजार कांवरियों ने की स्पर्श पूजा

Updated at : 09 Aug 2025 11:31 PM (IST)
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सावन पूर्णिमा को 75 हजार कांवरियों ने की स्पर्श पूजा

श्रावणी पूर्णिमा पर बाबा फौजदारीनाथ के दरबार में आस्था और विश्वास का भीड़ उमड़ पड़ा.

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बासुकिनाथ. श्रावणी पूर्णिमा पर बाबा फौजदारीनाथ के दरबार में आस्था और विश्वास का भीड़ उमड़ पड़ा. मंदिर प्रबंधन के अनुसार 75 हजार कांवरियों ने बाबा फौजदारीनाथ का स्पर्श पूजा कर मंगलकामना की. मंदिर परिसर बाबा के जयकारे से गूंजता रहा. पावन तिथि पर श्रद्धालु फौजदारी बाबा पर जलार्पण कर पुण्य के भागी बने. भक्तों ने बाबा फौजदारीनाथ को रक्षा सूत्र बांधकर सुख-समृद्धि की कामना की. पूर्णिमा के पावन अवसर पर दिनभर मंदिर प्रांगण में शंख, ध्वनि घंटा की आवाज से मंदिर परिसर गुंजायमान रहा. वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पंडितों ने षोडशोपचार विधि से पूजा की. भक्तों ने स्पर्श पूजा कर भगवान भोलेनाथ से सुख-समृद्धि की कामना की. बासुकिनाथ धाम पूरी तरह से केसरिया रंग में सराबोर दिखा. अहले सुबह पुरोहित पूजा के बाद दो बजकर 10 मिनट पर जलार्पण जैसे ही शुरू हुआ. श्रद्धालुओं की कतार बढ़ती चली गयी. चाक-चौबंद सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था के बीच श्रद्धालु कतारबद्ध होकर लगातार जलार्पण कर रहे हैं. लाल पीले एवं केसरिया रंग के वेश में बोल बम एवं हर हर महादेव के जयघोष के साथ श्रद्धालु हाथ में गंगाजल लिए बाबा मंदिर की ओर जाते दिखे. हर-हर महादेव व बोल-बम के जयकारे से बाबा की नगरी गुंजायमान रही. सरकारी पूजा के बाद गर्भगृह में जल डालने का सिलसिला शुरू हुआ जो अब तक चल रहा है. मंदिर प्रांगण, शिवगंगा घाट वह मेला परिसर कांवरियों से पटा रहा. मंदिर प्रांगण में अधिकारियों ने कांवरियों की कतार को सुचारु रूप से गर्भगृह में प्रवेश कराया. कांवरियों की श्रद्धा भक्ति व आस्था देखते ही बन रही थी. सावन पूर्णिमा को कांवरियों की कतार दर्शनीयाटिकर, शिवगंगा कांवरिया शेड, क्यू कॉम्प्लेक्स, फलाहारी धर्मशाला, संस्कार मंडप होते हुए श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में प्रवेश किया. कांवरियों की कतार में घुसपैठ को रोकने के लिए पुलिस की व्यवस्था थी. मंदिर निकास द्वार के बगल में जलार्पण काउंटर है. इसमें 3050 महिला पुरुष कांवरियों ने जल डाला. जलार्पण काउंटर में डाले गये जल सीधे बाबा भोलेनाथ के शिवलिंग पर पाइप द्वारा गिरता है. इस व्यवस्था को श्रद्धालु इंटरनेट जलार्पण कहते हैं. काउंटर पर 10 एलइडी टीवी लगाये गये हैं. इसमें भोलेनाथ के गर्भगृह में जलार्पण का लाइव दर्शन होता है.

900 कांवरियों ने किया शीघ्रदर्शनम

शीघ्रदर्शनम व्यवस्था के तहत मेला सावन पूर्णिमा के दिन 900 टोकन बिके. श्रद्धालु मंदिर कार्यालय में 300 रुपये का रसीद लेकर शीघ्रदर्शनम गेट से मंदिर गर्भगृह में सुलभ जलार्पण किया. इस व्यवस्था से मंदिर प्रबंधन को 2 लाख 70 हजार रुपये की आमदनी प्राप्त हुई. मंदिर सिंह द्वार से श्रद्धालु को मंदिर प्रांगण में प्रवेश मिलता है. मंदिर प्रांगण स्थित विशेष द्वार से श्रद्धालु मंदिर गर्भगृह में प्रवेश कर जलार्पण करते हैं. शीघ्रदर्शनम की बेहतर व्यवस्था पर भक्तों ने प्रसन्नता व्यक्त की. वहीं मंदिर न्यास परिषद को मंदिर से 2,71,900 रुपये की आमदनी प्राप्त हुई. अन्य स्रोतों से 1900 रुपये की आमदनी प्राप्त हुई.

सावन पूर्णिमा पर दान, स्नान से मोक्ष की प्राप्ति

बासुकिनाथ. सनातन धर्म में श्रावणी पूर्णिमा का बहुत अधिक महत्व होता है. श्रावणी पूर्णिमा के पावन अवसर पर किये गये दान, नदी तथा किसी पवित्र सरोवर में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. इस मान्यता से मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं ने ब्राह्मणें को दान पुण्य किया गया. पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा- अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. शिवभक्तों ने मंदिर प्रांगण में कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान भी किये. मंदिर प्रांगण में भक्तों ने मुंडन संस्कार भी कराया. सूर्योदय से पूर्व महिला पुरुष श्रद्धालुओं ने नदी व तालाब में स्नान कर अपने अराध्य देव भगवान की स्तुति कर मोक्ष की मंगलकामना की.

शिव तांडव स्त्रोत का पाठ कर पुण्य के भागी बने

बासुकिनाथ. श्रावणी पूर्णिमा शुभ मुहूर्त में भगवान शिव की विधिवत उपासना करने से साधक को विशेष लाभ मिलता है. पंडित सुधाकर झा ने बताया कि भगवान शिव की उपासना करने से साधक को रोग, दोष और समस्याओं से मुक्ति प्राप्त हो जाती है. श्रावण माह में शिव पूजा से भक्तों की संपूर्ण मनोकामनाएं पूर्ण होती है. श्रद्धालुओं ने मंदिर प्रांगण में शिव जी एवं माता पार्वती की पूजा किया. शिवलिंग पर धतूरा, भांग, बेलपत्र, गंगाजल, अक्षत, फूल, फल, शहद, दूध, दही आदि अर्पित कर आरती किया. शिव तांडव स्त्रोत का पाठ कर कांवरिया पुण्य के भागी बने.

आखिरी दिन ड्यूटी पर डटे रहे सुरक्षा बल के जवान

सावन पूर्णिमा पर मेला क्षेत्र के अलग अलग स्थान पर तथा मंदिर प्रांगण में सुरक्षा बल के जवान की प्रतिनियुक्ति लगी हुई है. सभी सुरक्षा बल के जवान श्रद्धालुओं को सुगमतापूर्वक जलार्पण कराने हेतु मंदिर के पट खुलने के समय से ही अपने अपने कर्तव्यस्थल पर उपस्थित है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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