47 मामलों में से 11 निष्पादित 10 डीसी-एसपी के पास गया

Updated at : 24 May 2018 5:37 AM (IST)
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47 मामलों में से 11 निष्पादित 10 डीसी-एसपी के पास गया

तीन मामलों को उच्चस्तरीय सुनवाई के लिए रखा गया दुमका : राज्य महिला आयोग द्वारा दुमका परिसदन में बुधवार को ओपेन कोर्ट का आयोजन किया गया, जिसमें 2015 से अब तक के 47 मामले रखे गये. 13 नये मामले भी इस खुली अदालत में लाये गये. हालांकि कई मामलों में उभय पक्षों के नहीं पहुंच […]

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तीन मामलों को उच्चस्तरीय सुनवाई के लिए रखा गया

दुमका : राज्य महिला आयोग द्वारा दुमका परिसदन में बुधवार को ओपेन कोर्ट का आयोजन किया गया, जिसमें 2015 से अब तक के 47 मामले रखे गये. 13 नये मामले भी इस खुली अदालत में लाये गये. हालांकि कई मामलों में उभय पक्षों के नहीं पहुंच पाने की वजह से सुनवाई नहीं हो सकी. जिन मामलों की सुनवाई हुई, उसमें कार्यस्थल पर महिला कर्मी संग प्रताड़ना व कार्य से बिना किसी सूचना के निकाल दिये जाने, पति व ससुरालवालों द्वारा प्रताड़ित करने, भरण-पोषण का खर्च नहीं देने जैसे मामले सामने आये. कार्यस्थल पर प्रताड़ना व बिना सूचना के जिला उद्योग महाप्रबंधक द्वारा कार्य से निकाल दिये जाने के मामले में द्वितीय पक्ष से महाप्रबंधक के मौजूद न रहने पर आयोग ने अगली तिथि पर सुनवाई का निर्देश जारी किया.
वहीं जामा चिकनियां के प्रीति देवी व सुरेश प्रसाद साह के मामले में दोनों पक्ष साथ रहने को राजी होकर गये. पौड़ेयाहाट की वाणी देवी द्वारा पड़ोसी गौरांग मंडल पर जमीन विवाद में मारपीट किये जाने की शिकायत की गयी थी, इसमें गौरांग ने मारपीट न करने वचन लिखित रूप से दिया. आयोग ने जमीन संबंधित जांच डीसी से कराने की बात कही. सात साल पहले विवाह बंधन में बंधे प्रियंका व नितेश के मामले में भी दोनों ने साथ रहने का वचन दिया.
दुमका की एक महिला को मिला उचित भरण-पोषण का लिखित वचन
वहीं दुमका के ममता देवी के पति राकेश साह ने पत्नी व चार बच्चों का उचित भरण पोषण करने लिखित वचन दिया. नगर उंटारी से पहुंचे एक चिकित्सक के मामले में उनकी पत्नी के आयोग के समक्ष उपस्थित न होने की वजह से मामला सुलह नहीं हो सका और आयोग ने अगली तिथि में दोनों पक्षों को उपस्थित होने को कहा. आयोग तक आज 1999 से एक युवती के गायब कर दिये जाने के मामले में भी आवेदन दिया गया. राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कल्याणी शरण ने बताया कि दुमका जिले में दहेज हत्या, दहेज प्रताड़ना, डायन विसाही जैसी घटनाओं में कमी हुई है लेकिन अभी पूर्णतः रुकी नहीं है. इस विषय पर और कार्य करने की जरूरत है. महिलाओं को जागरूक करना होगा. साथ ही लोगों को भी जागरूक होना होगा. उन्होंने कहा कि बलात्कार की घटनाएं, महिला प्रताड़ना पर विशेष रूप से कार्य करने की जरूरत है. दोषियों को सजा मिले लेकिन निर्दोष को सजा ना हो इस पर ध्यान देने की जरूरत है. ओपेन कोर्ट में दुमका जिले से कुल 39, जामताड़ा से 1 तथा गोड्डा से 7 मामले आये. जिसमें 11 मामलों का निष्पादन किया गया. 10 मामलों को उपायुक्त तथा पुलिस अधीक्षक के पास भेजा गया तथा तीन मामलों को उच्च स्तरीय सुनवाई हेतु रखा गया. ओपेन कोर्ट में मुख्यतः यौन शोषण, घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, मारपीट तथा जमीन से जुड़े मुद्दे शामिल थे. इस अवसर पर आयोग की सदस्य आरती राणा, पूनम प्रकाश, शर्मिला सोरेन, अवर सचिव चंद्रशेखर झा, आप्त सचिव रानी कस्तूरी, सोनी प्रिया व रिंकी कुमारी आदि उपस्थित थीं.
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