धनबाद में ताइवान के पीले तरबूज की खेती बनी आकर्षण का केंद्र, प्रदीप पांडेय बने किसानों के लिए मिसाल  

Published by : Priya Gupta Updated At : 09 Jun 2026 9:30 AM

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पीले तरबूज पकड़े किसान

Dhanbad News : झगराही गांव में ताइवान प्रजाति के पीले तरबूज की ऑर्गेनिक खेती आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. कम लागत और बेहतर आमदनी के कारण यह खेती किसानों के लिए नए रास्ते खोल रही है.

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बरोरा से प्रहलाद बरनवाल की रिपोर्ट 

Dhanbad News : बाघमारा प्रखंड की दरिदा पंचायत स्थित झगराही गांव में पहली बार की जा रही ताइवान प्रजाति के पीले तारबूज की ऑर्गेनिक खेती लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. खेतों में तैयार हो रहे रसायनमुक्त पीले तरबूज का स्वाद लेने के लिए आसपास के क्षेत्रों से लोग पहुंच रहे हैं. किसानों के लिए यह खेती कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला विकल्प साबित हो रही है. 

ताइवान की प्रजाति से ऑर्गेनिक खेती कर रहे किसान 

झगराही स्थित हिरक रोड पर पीले तारबूज की बिक्री के लिए विशेष आउटलेट भी खोला गया है, जहां से लोग ताजा फल खरीद रहे हैं. किसान प्रदीप पांडेय ने बताया कि उन्होंने लगभग एक एकड़ जमीन में ताइवान की ‘नो यू सीड’ प्रजाति के पीले तारबूज की ऑर्गेनिक खेती की है. इसके अलावा, बरवाअड्डा क्षेत्र में भी दो एकड़ से अधिक जमीन पर इसकी खेती की गई है. 

ऑर्गेनिक खेती से बढ़ रही किसानों की आय 

प्रदीप पांडेय के अनुसार यह फसल करीब 60 दिनों में तैयार हो जाती है. इसकी खेती में प्रति एकड़ लगभग 30 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि अनुकूल परिस्थितियों में किसानों को एक लाख रुपये से अधिक की आमदनी हो सकती है. यही कारण है कि वे क्षेत्र के अन्य किसानों को भी आधुनिक और ऑर्गेनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि पीला तरबूज पूरी तरह रसायनमुक्त है और इसमें कई सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं. उनका मानना है कि ऑर्गेनिक खेती न केवल किसानों की आय बढ़ा सकती है, बल्कि लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ भी उपलब्ध करा सकती है. 

इंजीनियर से किसान बने प्रदीप पांडेय 

प्रदीप पांडेय पिछले 17 वर्षों से खेती-किसानी से जुड़े हुए हैं. इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने खेती को अपना पेशा बनाया और आज क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं. किसान होने के साथ-साथ प्रदीप पांडेय समाजसेवी के साथ साथ रंगमंच से जुड़े एक अच्छे कलाकार भी हैं.  उनके पिता स्वर्गीय डॉ. सी.पी. पांडेय की क्षेत्र में समाजसेवा के लिए विशेष पहचान रही है. प्रदीप उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए खेती के माध्यम से किसानों और युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश दे रहे हैं.

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लेखक के बारे में

By Priya Gupta

प्रिया गुप्ता प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह झारखंड बीट पर काम कर रही हैं, जहां वह खबरों को आसान भाषा में लिखती हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल बीट पर काम कर चुकी हैं, जहां उन्होंने हेल्थ, रेसिपी, मेहंदी डिजाइन और फैशन से जुड़ी खबरों पर काम किया. इसके अलावा, उन्होंने नेशनल प्रिंटर और लोकल चैनलों में भी काम किया है. उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से और मास्टर की पढ़ाई एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड से पूरी की है.

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