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SNMMCH में कभी भी ठप हो सकती है पाइपलाइन से ऑक्सीजन सप्लाई व्यवस्था

Updated at : 10 Mar 2025 6:30 AM (IST)
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snmmch oxygen supply news

SNMMCH के 2 ऑक्सीजन प्लांट पहले से हैं ठप. फोटो : प्रभात खबर

SNMMCH Oxygen Supply System: धनबाद के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में पाइपलाइन से ऑक्सीजन की सप्लाई कभी भी ठप हो सकती है. 2 ऑक्सीजन प्लांट पहले से ठप हैं. तीसरे का प्रेशर कम हो गया है.

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SNMMCH News|धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) के कई विभागों के वार्डों में ऑक्सीजन सप्लाई व्यवस्था फिर से सिलेंडर पर आ गयी है. खासकर मेडिसिन, सर्जरी, पीडियाट्रिक, गायनी समेत अन्य विभागों के वार्डों में पाइपलाइन से ऑक्सीजन नहीं पहुंच पा रही है. जिन विभागों में पाइपलाइन के जरिये ऑक्सीजन पहुंच रही है, उसका प्रेशर भी काफी कम है. ऐसे में अस्पताल के विभिन्न विभागों में भर्ती गंभीर मरीजों को जरूरत के अनुसार ऑक्सीजन की सप्लाई पूरी करने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने सिलेंडर की व्यवस्था की है. एसएनएमएणसीएच अस्पताल परिसर में 3 ऑक्सीजन प्लांट लगे हैं. डेढ़ साल पहले 1,000 एलपीएम क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट में खराबी आने पर इससे उत्पादन ठप हो गया था. 6 माह पहले एसएनएमएमसीएच परिसर में लगे दूसरे 600 एलपीएम क्षमता का प्लांट भी खराब हो गया.

वार्डों और ओटी में प्लांट से होती है ऑक्सीजन की सप्लाई

560 बेड की क्षमता वाले एसएनएमएमसीएच के आइसीयू, एचडीयू, इमरजेंसी, विभिन्न वार्ड समेत अलग-अलग विभागों के ऑपरेशन थियेटर में 3 प्लांट से ऑक्सीजन की सप्लाई की व्यवस्था है. 2 प्लांट से उत्पादन ठप होने के कारण ऑक्सीजन की आपूर्ति में समस्या आने लगी है.

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पीएम केयर फंड से लगाये गये हैं 3 ऑक्सीजन प्लांट

कोरोना काल में ऑक्सीजन की मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में ऑक्सीजन उत्पादन के लिए प्लांट बनाने का निर्णय लिया था. इसके लिए पीएम केयर फंड से पैसे दिये गये. एसएनएमएमसीएच में लगभग 5 करोड़ रुपए की लागत से 3 पीएसए ऑक्सीजन प्लांट बनाये गये. इनमें 1000 एलपीएम क्षमता का एक और 600-600 एलपीएम क्षमता के 2 ऑक्सीजन प्लांट शामिल हैं.

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400 से 420 एलपीएम ऑक्सीजन का हो रहा उत्पादन

एसएनएमएमसीएच परिसर में लगे 3 में से 2 ऑक्सीजन प्लांट पहले से ही खराब हैं. 600 एलपीएम क्षमता के प्लांट से अभी उत्पादन हो रहा है, उसके प्रेशर में समस्या है. अस्पताल कर्मियों ने बताया है कि इस प्लांट से अभी 400 से 420 एलपीएम ही ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है. प्रेशर में समस्या है. समय पर समस्या को दुरुस्त नहीं किया गया, तो कभी भी प्लांट से ऑक्सीजन की सप्लाई ठप हो सकती है.

वर्तमान में अस्पताल में ऑक्सीजन को लेकर उत्पन्न स्थिति की जानकारी है. वरीय अधिकारियों को इसकी सूचना दी गयी है. एक ऑक्सीजन प्लांट की देखरेख की जिम्मेवारी जिला स्वास्थ्य विभाग की है. उनको इस संबंध में जानकारी उपलब्ध करा दी गयी है. प्लांट को जल्द दुरुस्त करने का आग्रह किया गया है. दूसरे खराब पड़े ऑक्सीजन प्लांट की मरम्मती के लिए एजेंसी को लिखा गया है. जल्द प्लांट को दुरुस्त करके ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू कर दी जायेगी.

डॉ चंद्रशेखर सुमन, वरीय अस्पताल प्रबंधक, एसएनएमएमसीएच

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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