केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि देश के विकास के लिए सिर्फ माइनिंग करना लक्ष्य नहीं है, बल्कि खनिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. केंद्रीय मंत्री बुधवार को खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) के 125वें स्थापना दिवस समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं. उन्होंने कहा कि डीजीएमएस ने बीते 125 वर्षों में खनन क्षेत्र को सुरक्षित बनाने में जो भूमिका निभायी है, वह सराहनीय है. यह यात्रा अधिकारियों व खदान श्रमिकों के समर्पण, साहस और बलिदान को दर्शाती है. कहा कि खनन गतिविधियां आज भारत की विकास गाथा का अभिन्न हिस्सा हैं. खदान श्रमिकों का योगदान राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है. खनन क्षेत्र में एकसमान और प्रभावी सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने में डीजीएमएस की भूमिका अहम है. शोभा करंदलाजे ने कहा कि तकनीक, डिजिटल निगरानी और नवाचार के माध्यम से खनन दुर्घटनाओं को न्यूनतम करने की दिशा में डीजीएमएस का योगदान आने वाले वर्षों में और भी महत्वपूर्ण होगा. इस दौरान उन्होंने केंद्र व राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों, डीजीएमएस के क्षेत्रीय कार्यालयों की सक्रिय भागीदारी व सख्त अनुपालन पर जोर दिया.
श्रम संहिता व प्रौद्योगिकी से सुदृढ़ होगी खान सुरक्षा
श्रम सुधारों की चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि चार श्रम संहिताओं के माध्यम से 29 कानूनों को समेकित किया गया है. इसका उद्देश्य विकसित भारत का निर्माण और संविदा श्रमिकों सहित सभी श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है. उन्होंने डीजीएमएस से इन संहिताओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने, आधुनिक प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर खान सुरक्षा को और मजबूत करने का आह्वान किया. वहीं शून्य दुर्घटना लक्ष्य प्राप्ति के लिए खनन क्षेत्र में सुधार, नयी तकनीक अपनाने, सुरक्षा बढ़ाने आदि पर जोर दिया.
न्यूनतम पेंशन पर चल रही बातचीत
समारोह के बाद मीडिया से बातचीत में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि न्यूनतम पेंशन मामले में बातचीत चल रही है. वहीं गोल्ड माइनिंग के सवाल पर मंत्री ने कहा कि इसके लिए खोज शुरू है.
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