आइआइटी आइएसएम में एआइ एंड डाटा साइंस पर एमटेक अगले सत्र से
Updated at : 07 Jun 2024 1:07 AM (IST)
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सीनेट में प्रस्ताव को दी गयी मंजूरी, दो वर्षीय एमटेक प्रोग्राम शुरू करने का निर्णय लिया गया
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वरीय संवाददाता, धनबाद,
आइआइटी आइएसएम धनबाद में गुरुवार को सीनेट की बैठक हुई. अध्यक्षता निदेशक प्रोफेसर सुकुमार मिश्रा ने की. इसमें 2025 से शुरू होने वाले अकादमिक सत्र से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड डाटा साइंस विषय पर दो वर्षीय एमटेक प्रोग्राम शुरू करने का निर्णय लिया गया. अभी संस्थान में कंप्यूटर साइंस विषय पर एमटेक कोर्स चलाया जा रहा है. इस कोर्स को अगले सत्र से दो भागों में बांट दिया जायेगा. एक भाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड डाटा साइंस विषय पर आधारित होगा. इस विषय के लिए 30 सीट रखी गयी है. कोर्स को शुरू करने से पहले इस पर बोर्ड आफ गवर्नेंस और फाइनेंस कमेटी से मंजूरी ली जायेगी.इस वर्ष 1500 छात्रों को दी जाएगी डिग्री :
विभिन्न कोर्स की पढ़ाई पूर्ण करने वाले छात्रों को डिग्री प्रदान करने का निर्णय लिया गया. इस वर्ष 2024 में बीटेक, एमटेक, एमएससी टेक, इंटीग्रेटेड एमएससी, एमबीए और पीएचडी के करीब 1500 छात्रों को डिग्री प्रदान करने का निर्णय लिया गया. इन छात्रों को दिसंबर महीने में दीक्षांत समारोह के दौरान डिग्री प्रदान की जायेगी.यह भी पढ़ें
भाषा सर्वेक्षण में गड़बड़ी को ले डीएसइ से मिली समिति
धनबाद.
झारखंड बांग्ला भाषी उन्नयन समिति की प्रदेश कार्यकारी सभापति रीना मंडल गुरुवार को जिला शिक्षा अधीक्षक भूतनाथ रजवार से मिलीं. धनबाद जिला के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा सर्वेक्षण में गलत जानकारी देने की जानकारी दी. कहा : क्षेत्रीय व जनजातीय भाषा का सर्वेक्षण के लिए राज्य के सभी 24 जिले के प्राथमिक कक्षा वाले विद्यालयों से क्षेत्रीय व जनजातीय भाषा का प्रयोग करने वाले विद्यालयों की संख्या उपलब्ध करने के लिए निर्देश प्राप्त है. धनबाद जिला के 26 जातियों (सुंडी, बावरी, कायस्थ, ब्राह्मण ,गंधवनिक, तेली, मायरा, मालाकार, स्वर्णकार, कर्मकार, कुंभकार, नापित, सूत्रधार, बैरागी, घटवाल) आदि की मातृभाषा बांग्ला है. धनबाद पहले मानभूम जिला के अंतर्गत था. गांव में रहने वाले एक बहुत बड़ी आबादी बंगला भाषियों की है. अगर बांग्ला भाषा का पठन-पाठन स्कूलों में नहीं होगा, तो यहां के संस्कृति भी विलुप्त हो जाएगी. जिले के सभी प्रखंडों से सूचना आ रही है कि 26 जातियों की मातृभाषा बंगला के स्थान पर कुरमाली, खोरठा आदि की जानकारी दी गयी है. मौके पर आशीष मंडल, अभिषेक मंडल, आशीष कुमार मंडल, रघुनाथ राय, शिबू चक्रवर्ती आदि मौजूद थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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