तमिलनाडु गैस रिसाव हादसे के बाद धनबाद के 12 मजदूर लौटेंगे घर, मृतक का शव हवाई मार्ग से आएगा

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बस में सवार झारखंड के प्रवासी मजदूर. फोटो: प्रभात खबर

Dhanbad News: तमिलनाडु के तिरुवल्लूर अमोनिया गैस रिसाव हादसे के बाद धनबाद के 12 प्रवासी मजदूर सुरक्षित घर लौटेंगे. मृतक मजदूर का शव हवाई मार्ग से लाया जाएगा. तमिलनाडु और झारखंड सरकार ने परिजनों को आर्थिक सहायता देने तथा मजदूरों की सुरक्षित वापसी की व्यवस्था की है.

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धनबाद से शोभित रंजन की रिपोर्ट

Dhanbad News: तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में अमोनिया गैस रिसाव की घटना के बाद वहां फंसे धनबाद के 12 प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी की तैयारी पूरी कर ली गई है. जिला प्रशासन और श्रम विभाग की पहल पर सभी मजदूर मंगलवार को अपने घर लौटने के लिए रवाना होंगे. वहीं, इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले धनबाद के एक मजदूर का शव भी हवाई मार्ग से झारखंड लाया जाएगा. प्रशासन ने मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की भी घोषणा की है.

प्रशासन ने संभाली मजदूरों की सुरक्षित वापसी की जिम्मेदारी

अमोनिया गैस रिसाव के बाद तमिलनाडु में फंसे मजदूरों की सुरक्षा और वापसी को लेकर धनबाद जिला प्रशासन लगातार सक्रिय रहा. सहायक श्रम आयुक्त प्रवीण कुमार ने बताया कि प्रशासन ने तमिलनाडु सरकार और स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर सभी मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की है. उन्होंने कहा कि मजदूरों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पूरी प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जा रही है.

धनबाद-एलेप्पी एक्सप्रेस से लौटेंगे 12 मजदूर

सहायक श्रम आयुक्त ने बताया कि धनबाद के 12 प्रवासी मजदूर धनबाद-एलेप्पी एक्सप्रेस के माध्यम से अपने घर लौटेंगे. सभी मजदूर मंगलवार को रवाना होंगे और प्रशासन उनके सुरक्षित पहुंचने तक लगातार संपर्क बनाए रखेगा. प्रशासन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर आगे भी मजदूरों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.

मृतक के परिजनों को मिलेगी आर्थिक सहायता

हादसे में जान गंवाने वाले धनबाद निवासी मजदूर के परिजनों को तमिलनाडु सरकार की ओर से दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी. यह राशि उपायुक्त के माध्यम से मृतक के परिवार तक पहुंचाई जाएगी. इसके अतिरिक्त धनबाद जिला प्रशासन ने शव को झारखंड लाने के लिए तत्काल 50 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराई है. वहीं, शव के धनबाद पहुंचने के बाद परिजनों को एक लाख रुपये की अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी दी जाएगी. प्रशासन का कहना है कि पीड़ित परिवार को हर संभव सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.

21 जून को हुआ था अमोनिया गैस रिसाव

तिरुवल्लूर जिले स्थित एक सी-फूड प्रोसेसिंग इकाई में 21 जून को अमोनिया गैस रिसाव की गंभीर घटना हुई थी. गैस फैलने से वहां काम कर रहे बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर इसकी चपेट में आ गए थे. इस हादसे के बाद फैक्ट्री परिसर और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी. प्रभावित श्रमिकों को तत्काल अस्पतालों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया था.

कई राज्यों के मजदूर हुए प्रभावित

विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, इस गैस रिसाव हादसे में कुल 83 श्रमिक प्रभावित हुए थे, जबकि मृतकों की संख्या बढ़कर 16 तक पहुंच गई. प्रभावित मजदूरों में झारखंड, ओडिशा, असम समेत कई राज्यों के श्रमिक शामिल थे. हादसे के बाद झारखंड के 42 मजदूर राहत शिविरों में ठहराए गए थे. इनमें से अधिकांश की स्थिति सामान्य होने के बाद उन्हें घर भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई.

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मजदूरों की सुरक्षा पर प्रशासन की नजर

धनबाद जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वह तमिलनाडु सरकार के साथ लगातार संपर्क में है और झारखंड के सभी प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. प्रशासन का कहना है कि मजदूरों की सुरक्षित वापसी के साथ-साथ मृतक के परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराना प्राथमिकता है. इस हादसे ने एक बार फिर दूसरे राज्यों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रभावित मजदूर सुरक्षित अपने घर पहुंचें और पीड़ित परिवारों को समय पर राहत मिल सके.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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