PHOTOS: आईआईटी आईएसएम में गौतम अदाणी- 3एस माइनिंग एक्सलेंस सेंटर और 50 छात्रों को पेड इंटर्नशिप की घोषणा

आईआईटी आईएसएम धनबाद के शताब्दी समारोह में गौतम अदाणी का गुलदस्ता देकर किया गया स्वागत. फोटो : प्रभात खबर
IIT ISM Centenary Celebration: आईआईटी-आईएसएम धनबाद के शताब्दी वर्ष समारोह में देश के जाने-माने उद्योगपति और अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी शामिल हुए. यहां उन्होंने आईआईटी-आईएसएम धनबाद के छात्रों के लिए पेड इंटर्नशिप और 3एस माइनिंग एक्सलेंस सेंटर की स्थापना की घोषणा की. उन्होंने देश की चुनौतियों और उसके समाधान पर भी चर्चा की. अदाणी ने क्या-क्या कहा, यहां पढ़ें.
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IIT ISM Centenary Celebration: आईआईटी आईएसएम धनबाद के शताब्दी दिवस समारोह में अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने बड़ी घोषणा की. सोमवार को शताब्दी समारोह कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत को अपनी विकास यात्रा स्वयं तय करनी होगी. अपनी तकदीर संवारने के लिए उसे अपनी धरती की ताकत को पहचानना होगा. उन्होंने कहा कि आज जब अंतरराष्ट्रीय गठबंधन टूट रहे हैं और देश अपने स्वार्थ के आधार पर निर्णय ले रहे हैं, तब भारत की संप्रभुता दो स्तंभों पर निर्भर करेगी- भूमि के नीचे मौजूद संसाधनों को निकालने में महारत और विकास को ऊर्जा प्रदान करने वाली प्रणालियों पर नियंत्रण.

भारत पर थोपे जा रहे विचार ‘नैरेटिव कॉलोनाइजेशन’
गौतम अदाणी ने वैश्विक स्तर पर भारत पर थोपे जा रहे विचारों को ‘नैरेटिव कॉलोनाइजेशन’ करार देते हुए कहा कि जिन देशों ने ऐतिहासिक रूप से सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन किया, वही आज विकासशील देशों को विकास का पाठ पढ़ा रहे हैं. भारत दुनिया के सबसे कम प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वाले देशों में है, फिर भी उसके सतत विकास के प्रदर्शन को वैश्विक मंचों पर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है. अदाणी समूह के चेयरमैन ने चेताया कि यदि भारत ने अपना नैरेटिव स्वयं नियंत्रित नहीं किया, तो उसकी आकांक्षाओं को कमजोर किया जाएगा और विकास के अधिकार को अपराध की तरह दर्शाया जाएगा.
- पुरानी अर्थव्यवस्था कही जाने वाली माइनिंग के बिना नयी अर्थव्यवस्था का निर्माण और उसकी मजबूती असंभव
- अपनी तकदीर संवारने के लिए भारत को अपनी धरती की ताकत को समझना होगा : गौतम अदाणी
- अदाणी ने वैश्विक दबावों को बताया ‘नैरेटिव कॉलोनाइजेशन’, कहा- संसाधन और ऊर्जा स्वाधीनता पर टिकेगी भारत की संप्रभुता
- आईआईटी आईएसएम के छात्रों के लिए 50 पेड इंटर्नशिप और 3एस माइनिंग एक्सीलेंस सेंटर की स्थापना की घोषणा की

IIT ISM Centenary Celebration: आईआईटी आईएसएम की स्थापना दूरदर्शिता का परिणाम
अदाणी ग्रुप के चेयरमैन ने कहा कि आईआईटी आईएसएम की स्थापना भी भारत की दूरदर्शिता का परिणाम थी. 100 साल पहले ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने देश की खनन एवं भूविज्ञान क्षमताओं को विकसित करने के लिए इस संस्थान की सिफारिश की थी. यह इस समझ को दर्शाता है कि कोई भी राष्ट्र अपनी मिट्टी की शक्ति के बारे में ज्ञान अर्जित करके उस मामले में महारत हासिल किये बिना आगे नहीं बढ़ सकता.

गुजरात में बन रहा 30 गीगावाट का अक्षय ऊर्जा पार्क भारत की हरित ऊर्जा प्रतिबद्धता का प्रमुख उदाहरण
ऊर्जा सुरक्षा की बात करते हुए उन्होंने समूह के ऑस्ट्रेलिया स्थित कार्माइकल प्रोजेक्ट का उल्लेख किया, जिसे भारी राजनीतिक और पर्यावरण विवादों के बावजूद संचालित किया गया. उन्होंने गुजरात के खवड़ा में विकसित हो रहे 30 गीगावाट के अक्षय ऊर्जा पार्क को भारत की हरित ऊर्जा प्रतिबद्धता का प्रमुख उदाहरण बताया.
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आईआईटी आईएसएम के छात्रों के लिए उपहार की घोषणा
कार्यक्रम में गौतम अदाणी ने आईआईटी आईएसएम धनबाद के छात्रों के लिए 2 बड़े उपहार की घोषणा की. पहला, थर्ड ईयर के छात्रों के लिए हर साल 50 पेड इंटर्नशिप की योजना, जिसमें बेहतर प्रदर्शन करने वाले 25 प्रतिशत छात्रों को प्री-प्लेसमेंट का अवसर मिलेगा. दूसरा, टेक्समिन के सहयोग से अत्याधुनिक मेटावर्स लैब, ड्रोन फ्लीट और प्रिसिजन माइनिंग टेक्नोलॉजी से लैस अदाणी 3एस माइनिंग एक्सलेंस सेंटर की स्थापना. यह सेंटर संस्थान के आईटूएच (I2H) बिल्डिंग में स्थापित किया गया है, जिसका उद्घाटन गौतम अदाणी ने किया.

वर्तमान समय भारत का द्वितीय स्वतंत्रता संग्राम – अदाणी
गौतम अदाणी ने वर्तमान समय को भारत का ‘द्वितीय स्वतंत्रता संग्राम’ बताया, जो आर्थिक और संसाधन स्वायत्तता के लिए लड़ा जा रहा है. उन्होंने छात्रों का आह्वान किया कि वे ‘निडर होकर सपने देखें, निरंतर प्रयास करें’ और भारत को आत्मनिर्भर बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएं, क्योंकि ‘पुरानी अर्थव्यवस्था कही जाने वाली माइनिंग के बिना नयी अर्थव्यवस्था का निर्माण और उसकी मजबूती असंभव है.’

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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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