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गांव भीतर में चार दिवसीय हरिनाम संकीर्तन शुरू

Updated at : 29 Apr 2024 7:54 PM (IST)
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गांव भीतर में चार दिवसीय हरिनाम संकीर्तन शुरू

रामनाथ कीर्तन संप्रदाय की दोमहानी, वर्धमान से आईं रिंकू दास उर्फ चुमकी ने पाला कीर्तन गाकर समां बांध दिया

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गोविंदपुर.

गोविंदपुर गांव भीतर सोलह आना दिगर के सौजन्य से गांव भीतर दुर्गा मंदिर प्रांगण में चार दिवसीय हरिनाम संकीर्तन सोमवार से शुरू हुआ. शाम सात बजे से रात 10 बजे तक श्रीपुर, वर्धमान से आये रंगदल अपनी कला से श्रोताओं का मन जीत लिया. रामनाथ कीर्तन संप्रदाय की दोमहानी, वर्धमान से आईं रिंकू दास उर्फ चुमकी ने पाला कीर्तन गाकर समां बांध दिया. इसके पूर्व रविवार की रात शुभ गंधाधिवास अनुष्ठान किया गया था. संकीर्तन का समापन गुरुवार को होगा. मौके पर सोलह आना दिगर के अध्यक्ष किरीटी भूषण रूज, सचिव सुभाष घाटी उर्फ कालो, कोषाध्यक्ष माणिक रतन दत्ता, नंदलाल अग्रवाल, दयामय दत्ता, गौतम बिष्टु, दुलाल दत्ता, मिलन दत्ता, मोहन कुंभकार, कृष्ण कुमार अग्रवाल, रूपेश बंसल, मंसाराम, विजय कुमार, सनत लायक, पवन लोधा, बबलू दुदानी, डॉ अनिल कुमार, एसके पाठक, सुमिता दास, अशोक बर्मन, डॉ एसके दे, दीपक भगत, मृदुल बिष्टु, सोमनाथ गुप्ता, अनूप सरिया, शत्रुघ्न साव, संतोष सोनी, श्याम किशोर अग्रहरी, विमल यादव, रमेश बाउरी, भोला गुप्ता, राजकुमार तायल, बजरंग अग्रवाल, बाबूलाल यादव, जितेन पाल, नवीन भगत, लक्ष्मण सिंह, राधेश्याम बंसल, मन्नू सोनार, सुभाष चंद्र, सपन दां आदि मौजूद थे.

13 को संजोत के साथ शुरू होगा भोक्तिया पर्व

धनबाद.

श्रीश्री चरक पूजा समिति ग्राम पंचायत सरायढेला की ओर से चार दिवसीय भोक्तिया पर्व 13 मई को संजोत के साथ शुरू होगा. समिति के संरक्षक शिव प्रसाद महतो ने बताया : चार दिवसीय भोक्तिया पर्व 13 से 16 मई तक चलेगा. 13 मई को संजोत के साथ भोक्तिया पर्व को निर्विघ्न पार करने के लिए बूढ़ा बाबा (शिव बाबा) से प्रार्थना कर संकल्प लेंगे. संजोत के दिन तालाब में स्नान कर पैता धारण करेंगे. इस दिन से भोक्तिया नंगे पांव घूमेंगे, नमक नहीं खायेंगे. निरामिष भोजन ग्रहण करेंगे. 14 मई को निर्जल उपवास रखकर संध्या में तालाब में स्नान कर शिव मंदिर में बूढ़ा बाबा की आराधना के साथ ढाक सिद्धा पूजा करेंगे. गाजन होगा. इसमें भोक्तिया भजन कीर्तन करेंगे. रात्रि में छऊ नृत्य का कार्यक्रम होगा. पुरुलिया से छऊ नर्तकों को बुलाया गया है. 15 मई को भोक्तिया 35 फीट ऊंचे चरखी पर घूमेंगे. जिनकी मन्नत होगी, वो शरीर में कील चुभो कर घूमेंगे. चरखी पर घूमने से पहले महिलाओं द्वारा उनपर शांति जल डाला जायेगा. चरखी से भोक्तिया बताशा, पेड़ा प्रसाद के रूप में लुटायेंगे. इसे नीचे खड़े भक्त प्रसाद के रूप में ग्रहण करेंगे. इस दिन से भोक्तिया नमक ग्रहण करेंगे. 16 मई का नार्ता पर्व होगा. इसमें मन्नत के अनुसार पाठा की बलि दी जायेगी. उसका प्रसाद सामूहिक रूप से ग्रहण किया जायेगा. कार्यक्रम को लेकर समिति के संतोष महतो, तारा रजवार, अमर रजवार, अमित महतो, अजय रविदास एवं अन्य सदस्य सक्रिय हैं.

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