Dhanbad News: डिजिटल तकनीक व्यापारिक उत्कृष्टता और सतत विकास का प्रमुख जरिया

Published by : ASHOK KUMAR Updated At : 07 Jul 2025 2:05 AM

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आइआइटी आइएसएम : अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन ''विकसित भारत @2047'' में डिजिटल तकनीकों की भूमिका पर हुआ मंथन.

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धनबाद.

आइआइटी आइएसएम में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ””डिजिटल टेक्नोलॉजी फॉर बिजनेस एक्सीलेंस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट व निर्माण : विकसित भारत @2047”” रविवार को संपन्न हो गया. सम्मेलन के दूसरे दिन भी तकनीकी सत्रों, विशेषज्ञों की चर्चाओं और समापन समारोह ने प्रतिभागियों को प्रेरित किया. दिन की शुरुआत प्लेनरी सत्र-2 से हुई. इसमें एक्सएलआरआइ जमशेदपुर के पूर्व प्रोफेसर प्रो. प्रबल के सेन ने उद्यमिता और डिजिटल तकनीकों को व्यापारिक उत्कृष्टता और सतत विकास के लिए जरिया बताया. इसके बाद आइआइटी मद्रास की प्रो. लता दयारम ने मानव संसाधन प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर विचार रखे.

फजी लॉजिक की उपयोगिता बतायी

तीसरे सत्र में आइआइएम लखनऊ के पूर्व प्रोफेसर प्रो. भाबा कृष्ण मोहंती ने निर्णय प्रक्रिया में फजी लॉजिक की उपयोगिता बतायी. आइआइएम कोलकाता की प्रो. मेघा शर्मा ने सतत विकास लक्ष्यों के लिए जोखिम प्रबंधन की रणनीतियों पर व्याख्यान दिया. चौथे सत्र के दौरान आइआइएम लखनऊ के प्रो. सब्यसाची सिन्हा ने कॉरपोरेट और स्टार्टअप सहयोग की भूमिका पर बात की. मारेस्क ग्लोबल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सिद्धार्थ पॉल ने मशीन लर्निंग के व्यावहारिक प्रयोग बताये.

डिजिटलीकरण के साथ सामाजिक चेतना भी जरूरी

पांचवे सत्र में प्रो. कंपन मुखर्जी (आइआइएम काशीपुर) ने डिजिटल युग में सतत विकास की चुनौतियां बतायीं. डॉ प्रमोद पाठक (पूर्व प्रोफेसर, आइआइटी आइएसएम) ने कहा कि सिर्फ डिजिटलीकरण से विकसित भारत संभव नहीं, इसके साथ सामाजिक चेतना भी जरूरी है. एक विशेष सत्र में नबेंदु रॉय (इबीएससीओ) ने डिजिटल सूचना उपकरणों पर प्रस्तुति दी.

समापन समारोह जीजेएलटी ऑडिटोरियम में हुआ. इसकी शुरुआत विभागाध्यक्ष प्रो. संदीप मंडल ने की. संस्थान के कार्यकारी निदेशक प्रो. धीरज कुमार ने नवाचार आधारित विकास में संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई. मुख्य अतिथि बीसीसीएल धनबाद के चेयरमैन समीरन दत्ता ने कोयला उद्योग में डिजिटल बदलाव की भूमिका पर विचार व्यक्त किये. विशिष्ट अतिथि सीएसआइआर-सीआइएमएफआर के निदेशक प्रो. एके मिश्रा ने साझा शोध की महत्ता पर बल दिया. अंत में प्रो. नीलाद्रि दास ने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया. संयोजिका डॉ. रश्मि सिंह हैं.

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