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कुंती देवी ने सुनायी सूर्यदेव सिंह के शुरुआती दिनों की कहानी, कहा -विधायक जी भौंरा पहली बार मामा के घर आये थे

Updated at : 15 Apr 2017 8:53 AM (IST)
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कुंती देवी ने सुनायी सूर्यदेव सिंह के शुरुआती दिनों की कहानी, कहा -विधायक जी भौंरा पहली बार मामा के घर आये थे

धनबाद : विधायकजी ने मजदूरी कर परिवार को एकजुट रखा और बढ़ाया. भाइयों का पालन-पोषण किया. विधायकजी गांव से पहली बार 15 साल की उम्र में भौंरा अपने चचेरे मामा के यहां आये थे. वहां वह पानी काछने का काम करने लगे और मामा का खाना बनाते थे. एक बार दाल जल गयी तो मामा […]

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धनबाद : विधायकजी ने मजदूरी कर परिवार को एकजुट रखा और बढ़ाया. भाइयों का पालन-पोषण किया. विधायकजी गांव से पहली बार 15 साल की उम्र में भौंरा अपने चचेरे मामा के यहां आये थे. वहां वह पानी काछने का काम करने लगे और मामा का खाना बनाते थे. एक बार दाल जल गयी तो मामा ने उन्हें चांटा मार दिया. विधायकजी बोरा लेकर बोर्रागढ़ में एक बंगाली अफसर के बंगले के बाहर रात को सो गये. सुबह पूछताछ करने पर काम मांगा तो काम पर लगा दिया गया. विधायकजी को चार रुपये हफ्ता मिलता था. चना-गुड़ खाकर रहते थे. भाई व परिवार को समेट कर रखा. फिर बाद में उन्हें बोरार्गढ़ में ही चानक पर काम मिला.

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इस दौरान रात को चोरों ने विधायकजी पर हमला कर दिया था. हमले में उनका हाथ कट गया. गांव में खबर गयी तो लोग बुलाकर ले गये. गांव से विधायकजी फिर धनबाद आ गये. बोर्रागढ़ में रहने लगे. बच्चा सिंह भी साथ रहते थे. विधायकजी की मां छह माह बाद राजन सिंह को पढ़ाने के लिए धनबाद ले आयी. कुछ दिन बाद रामधीर भी आ गये. वह सभी को एक साथ रखकर खाना बनाकर खिलाती व बरतन धोती. कभी भेदभाव नहीं किया. एक साड़ी पहनती. साफ कर सुखाकर फिर पहनती. इस तरह उन्होंने जीवन बिताया और आज विधायकजी के परिवार व बच्चों के साथ लोग क्या कर रहे हैं?

बच्चा व विक्रमा के बाद विधायकजी ने की थी शादी

कुंती देवी ने कहा : माता-पिता ने कुंती नाम क्या रखा वह तो कुंती की तरह दुख भरी जिंदगी जीती रही. विधायकजी के त्याग का ही फल है कि उनकी शादी के पांच साल पहले उनके छोटे भाई बच्चा बाबू की शादी करायी गयी. बच्चा सिंह की पत्नी घर की पहली बहू बनी. इसके बाद विक्रमा बाबू की शादी हुई. तब विधायकजी ने शादी की. क्या विधायकजी व उनके परिवार को यही दिन देखना था. आज विधायकजी जीवित रहते तो उनलोगों पर परिवार का कोई सदस्य आंख उठाकर नहीं देखता. विधायकजी की मौत के बाद अभिभावक बनने के बजाय बच्चा सिंह उनके बच्चों को प्रताड़ित करते थे. विधायक जी की मौत के समय किरण 18 साल, राजीव 15, गुड्डी-12, संजीव 9 व मनीष सात साल के थे. संजय सिंह की हत्या के बाद घर का राशन बच्चा बाबू ने बंद करवा दिया. घर के नौकर, गेटमैन आदि का वेतन हमसे दिलवाया जाता रहा. प्रमोद हत्याकांड में राजीव का नाम आया तो बच्चा बाबू कहते थे तुमने की है, तुमको सजा मिलेगी.
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