धनबाद: चार सरकारें बदली, लेकिन जिला स्तर पर बीस सूत्री समिति का गठन पिछले लगभग आठ वर्षो से नहीं हुआ. जिस दल की सरकार रही, उसके नेता-कार्यकर्ता लगातार लॉबिंग करते रहे. लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. इस बार राज्य में पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनने के बाद जिला बीस सूत्री, 15 सूत्री अल्पसंख्यक कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के लिए भाजपा एवं आजसू पार्टी के नेता-कार्यकर्ता नये सिरे से लॉबिंग में लग गये हैं.
इंदिरा सरकार ने बनायी थी समिति : देश में बीस सूत्री कार्यक्रम की शुरुआत अस्सी के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने की थी. उद्देश्य था-लोगों खास कर गरीबों का विकास हो सके एवं कल्याण योजनाओं का लाभ मिल सके. राज्य, जिला एवं प्रखंड स्तर पर बीस सूत्री निगरानी समिति बनी थी. जिला स्तरीय बीस सूत्री समिति के प्रभारी राज्य के कोई मंत्री होते हैं, जबकि सदस्य सचिव उपायुक्त होते हैं. सत्तारूढ़ दल के जिला स्तर के नेता इसके उपाध्यक्ष एवं सदस्य होते हैं. अलग झारखंड राज्य बनने के बाद धनबाद जिले में दो बार ही बीस सूत्री समिति का गठन हो पाया. अजरुन मुंडा सरकार ने भाजपा नेता अशोक मंडल को जिला बीस सूत्री समिति का उपाध्यक्ष बनाया था. बाद में मधु कोड़ा सरकार में कांग्रेस नेता नवल किशोर प्रसाद सिंह जिला बीस सूत्री समिति के उपाध्यक्ष बने. इसके बाद दो बार शिबू सोरेन, एक बार अर्जुन मुंडा तथा एक बार हेमंत सोरेन की सरकार बनी. लेकिन, किसी भी सरकार ने जिला स्तर पर बीस सूत्री समिति का गठन नहीं किया. कमेटी गठन नहीं होने के कारण वर्षो से बीस सूत्री समिति की समीक्षा बैठक भी नहीं हुई है.
‘‘जिला स्तर पर बीस सूत्री समिति का गठन होना चाहिए. इससे विकास योजनाओं में तेजी आती है. लोगों तक कल्याणकारी योजनाएं समय पर पहुंचाने में सहूलियत होती है. सुंदर प्रसाद यादव, पूर्व जिला बीस सूत्री उपाध्यक्ष एवं भाजपा नेता.
‘‘जिला स्तर पर बीस सूत्री समिति रहने से विकास योजनाओं में घपले-घोटाले पर त्वरित कार्रवाई हो पाती है. आम लोगों की सहभागिता बढ़ती है.
अशोक मंडल, पूर्व जिला बीस सूत्री उपाध्यक्ष सह झामुमो नेता
