पेयजल संकट : इस ‘New Delhi’ में पिट वाटर भी मयस्सर नहीं

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 May 2019 1:26 PM

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धनबाद : शुद्ध पानी तो दूर, पिट वाटर (खदानों का पानी) के लिए रोजाना झगड़ा होता है. लोग लाइन में खड़े होकर अपनी पारी का इंतजार करते हैं. प्रति व्यक्ति चार गैलन पानी मिलता है. इससे एक बाल्टी भी अधिक पानी लेने पर मुहल्ले के लोग आपस में उलझ जाते हैं. यह हाल नगर निगम […]

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धनबाद : शुद्ध पानी तो दूर, पिट वाटर (खदानों का पानी) के लिए रोजाना झगड़ा होता है. लोग लाइन में खड़े होकर अपनी पारी का इंतजार करते हैं. प्रति व्यक्ति चार गैलन पानी मिलता है. इससे एक बाल्टी भी अधिक पानी लेने पर मुहल्ले के लोग आपस में उलझ जाते हैं. यह हाल नगर निगम क्षेत्र में आने वाली नयी दिल्ली कॉलोनी का है.

नयी दिल्ली कॉलोनी (धनसार) के लोगों ने बताया कि सड़क चौड़ीकरण कार्य के दौरान पांच माह पहले राइजिंग पाइप से कनेक्शन काट दिया गया. कोलियरी से निकलने वाला पिट वाटर ही एकमात्र सहारा है. यह पानी भी कपड़ा-बरतन-घर धोने आदि के काम में ही उपयोग हो पाता है. पेयजल खरीदते हैं.

100 रुपये में खरीदते हैं एक ड्रम पानी

पीने के लिए ड्राम से पानी खरीदना पड़ रहा है. प्रति घर लोग 100 रुपये देकर एक ड्राम पानी लेते हैं. इस पानी को बड़ी हिफाजत से रखते हैं. पीने के लिए इस पानी का उपयोग किया जाता है. लोग बताते हैं कि प्रति घर में चार से पांच हजार रुपये का पानी खरीदा जाता है.

नाले से भरते हैं पानी

पिट वाटर भी लोगों को बमुश्किल ही मिलता है. नयी दिल्ली कॉलोनी में ‘प्रभात खबर’ की टीम ने देखा कि दो बच्चियां चुल्लू से पानी भर रही थीं. थोड़ा और आगे बढ़ने पर एक महिला व पांच साल की बच्ची नाली में पाइप लगाकर पानी भर रही थीं. महिला ने बताया कि कोलियरी से निकलने वाले पिट वाटर के लिए पाइप बिछायी गयी है. इसी के लीकेज में पाइप जोड़कर पानी भरते हैं.

नहीं है वैकल्पिक व्यवस्था

पानी के लिए नयी दिल्ली में वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है. मजबूरन लोगों को पानी खरीदना पड़ रहा है. दूर-दराज के लोग साइकिल से पानी भरने के लिए यहां आते हैं.

लोगों की पीड़ा

मुन्नू देवी : बूंद-बूंद पानी को पूरा मुहल्ला तरस रहा है. पानी देने के लिए कोई पहल नहीं हो रही है.

उर्मिला देवी : पीने के लिए पानी खरीदना पड़ रहा है. एक ड्राम पानी की कीमत 100 रुपये है. कहां से आयेगा पैसा.

अनिता देवी : जनवरी से पानी नहीं आ रहा था. कुछ दिनों में पाइप जोड़ने की बात थी. नहीं जोड़ा गया.

तारा देवी : एक ड्राम पानी खरीदते हैं. उसे चार से पांच दिन चलाते हैं. इतनी बुरी स्थिति कभी नहीं हुई.

श्यामुनी देवी : सुबह होने के साथ ही पानी की किल्लत दूर करने में जुट जाते हैं. इससे काफी परेशानी है.

रोशनी कुमारी : पानी के कारण पढ़ाई बाधित हो रही है. दिन पानी भरने में ही बीत जाता है.

जया देवी : जन प्रतिनिधियों को मुहल्ले के लोगों की समस्या से कोई मतलब नहीं है.

झुमरी देवी : पिट वाटर भी दिन में एक बार आता है. लेकिन, पीने के लिए पानी कहां से लायें.

अटल बिहारी : पानी आना बंद है. विभाग की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गयी है. चापाकल भी खराब पड़ा है.

दीपक विश्वकर्मा : पिट वाटर के खारा पानी से घरेलू कार्य किया जा रहा है. पीने के लिए पानी खरीदना पड़ रहा है.

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