भूली क्षेत्रीय अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित करने की कवायद शुरू

Updated at : 14 Apr 2019 2:25 AM (IST)
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भूली क्षेत्रीय अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित करने की कवायद शुरू

धनबाद : भूली क्षेत्रीय अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित करने को लेकर बीसीसीएल प्रबंधन की ओर से एक बार फिर से पहल शुरू की गयी है. इस सिलसिले में कंपनी के डीपी आरएस महापात्र ने शनिवार को अस्पताल का निरीक्षण कर मेडिकल कॉलेज खोलने की संभावनाओं को तलाशा. डीपी के साथ सेंट्रल […]

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धनबाद : भूली क्षेत्रीय अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित करने को लेकर बीसीसीएल प्रबंधन की ओर से एक बार फिर से पहल शुरू की गयी है. इस सिलसिले में कंपनी के डीपी आरएस महापात्र ने शनिवार को अस्पताल का निरीक्षण कर मेडिकल कॉलेज खोलने की संभावनाओं को तलाशा. डीपी के साथ सेंट्रल अस्पताल के सीएमएस डॉ संजीव गोलास और जीएम सिविल आरएम प्रसाद भी थे. डीपी ने अस्पताल कैंपस और आसपास खाली पड़ी जमीनों का मुआयना किया.

डीपी ने सिविल इंजीनियरिंग विभाग को इस्टीमेट तैयार करने का निर्देश दिया. इंजीनियरिंग विभाग की टीम सोमवार को भूली अस्पताल का दौरा कर इस्टीमेंट बनाने का काम करेगी. कोयला मंत्रालय की ओर से भूली में मेडिकल कॉलेज खोलने को लेकर पूर्व में निर्णय लिया गया है. इससे संबंधित प्रस्ताव कोल इंडिया के पास है. एक साल पहले भी बीसीसीएल की ओर से कॉलेज खोलने की दिशा में प्रयास किया गया था. लेकिन तब कंपनी के घाटा में होने के कारण प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था. इस बार कंपनी के लाभ में होने पर मेडिकल कॉलेज खोलने की दिशा में पहल शुरू की गयी है.

बीसीसीएल प्रबंधन भूली क्षेत्रीय अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित करने को लेकर इच्छुक है. मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए कोल इंडिया राशि देगी. बीसीसीएल की ओर से इस्टीमेट तैयार कर सीआइएल के पास भेजा जायेगा. सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो जल्द ही कॉलेज निर्माण की दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी जायेगी. अधिकारियों ने अस्पताल के पुराने एवं नये भवनों का जायजा लिया एवं कर्मियों से अस्पताल से संबंधित हर छोटी से छोटी जानकारी ली. उन्होंने अस्पताल के कैंपस एवं खाली जगहों को भी देखा.

जगजीवन राम ने कराया था निर्माण : अस्पताल का निर्माण भारत सरकार के तत्कालीन श्रम मंत्री जगजीवन राम ने साल 1950 में कराया था. बीसीसीएल द्वारा अधिग्रहण से पूर्व तक इस अस्पताल में सभी प्रकार के श्रमिकों सहित आसपास के ग्रामीणों का नि:शुल्क इलाज किया जाता था व दवा दी जाती थी. वर्ष 1986 में कोयला खान श्रमिक कल्याण संस्था (सीएमएलडब्ल्यूओ) का बीसीसीएल में विलय के बाद भूली अस्पताल की दुर्दशा शुरू हुई.
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