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गिरिडीह की राजनीति ने अचानक लिया यू-टर्न: क्या एनडीए बचा पाएगी यह सीट ?

Updated at : 10 Mar 2019 10:18 AM (IST)
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गिरिडीह की राजनीति ने अचानक लिया यू-टर्न: क्या एनडीए बचा पाएगी यह सीट ?

-गिरिडीह सीट आजसू के खाते में दिये जाने की घोषणा के बाद भाजपाइयों में उबालकतरास/बेरमो : एनडीए के एक फैसले के बाद गिरिडीह संसदीय क्षेत्र की राजनीति ने यू-टर्न ले लिया है. सभी के जेहन में एक ही सवाल है क्या यह सीट एनडीए के खाते में आ पाएगा ? ऐसा इसलिए क्योंकि इस फैसले […]

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-गिरिडीह सीट आजसू के खाते में दिये जाने की घोषणा के बाद भाजपाइयों में उबाल
कतरास/बेरमो : एनडीए के एक फैसले के बाद गिरिडीह संसदीय क्षेत्र की राजनीति ने यू-टर्न ले लिया है. सभी के जेहन में एक ही सवाल है क्या यह सीट एनडीए के खाते में आ पाएगा ? ऐसा इसलिए क्योंकि इस फैसले से भाजपा कार्यकर्ताओं में रोष है. भाजपा की सीटिंग सीट (गिरिडीह) आजसू को दिये जाने की सहमति के बाद यहां से रिकॉर्ड पांच बार जीतने वाले सांसद रवींद्र कुमार पांडेय के राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह के कयास लगाये जा रहे हैं.

बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो के साथ आरोप-प्रत्यारोप का दौर एवं अचानक इस सीट पर भाजपा के टिकट के लिए दावेदारों की बढ़ती संख्या से भी भाजपा ने अपना पिंड छुड़ाया है. बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो इस सीट से प्रबल दावेदार थे. सांसद-विधायक के बीच इस वजह से संबंध मधुर नहीं रहे. एक-दूसरे के खिलाफ टीका-टिप्पणी भी होती रही.

सूत्रों का कहना है कि भाजपा इस मुद्दे से भी अंदर ही अंदर पसोपेश में थी. यह भी बताते हैं कि करीब एक माह पहले से ही सांसद रवींद्र कुमार पांडेय को इस बात का अहसास हो गया था कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ है. इधर आजसू में फिलहाल प्रत्याशियों की एक लंबी फेहरिस्त है. उसमें खुद सुदेश महतो के अलावा उनके ससुर डॉ यूसी मेहता, टुंडी के आजसू विधायक राजकिशोर महतो, मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के अलावा आजसू के गिरिडीह लोस प्रभारी डॉ लंबोदर महतो के नाम सामने आ रहे हैं. इधर, चर्चा है कि सांसद रवींद्र पांडेय संभवत: झामुमो सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से संपर्क साध सकते हैं.

झामुमो का भी रहा है भावनात्मक संबंध : झामुमो का भी गिरिडीह सीट से भावनात्मक संबंध रहा है. पार्टी सुप्रीमो शिबू सोरेन की यह राजनीतिक जन्मभूमि है. झामुमो संस्थापक बिनोद बिहारी महतो 1991 में गिरिडीह के सांसद चुने गये थे. इनके निधन के बाद 1992 में हुए मध्यावधि चुनाव में उनके पुत्र राजकिशोर महतो बतौर झामुमो प्रत्याशी इस क्षेत्र के सांसद बने. 2004 में टेकलाल महतो सांसद बने. वर्ष 2014 के लोस चुनाव में झामुमो प्रत्याशी जगरनाथ महतो मात्र 40 हजार मतों के अंतर से भाजपा प्रत्याशी रवींद्र पांडेय से पराजित हुए थे. इस चुनाव में सिर्फ बाघमारा विस से भाजपा को 80 हजार से ज्यादा मत प्राप्त हुए थे.

आजसू की जीत का दावा
कतरास. आजसू नेता टीकू महतो ने कहा है कि भाजपा-आजसू गठबंधन में गिरिडीह से आजसू का उम्मीदवार दिये जाने पर पार्टी की जीत तय है.

तोपचांची में फूटे विरोध के स्वर
शनिवार को बीस सूत्री अध्यक्ष गिरिजा शंकर उपाध्याय की अध्यक्षता में भाजपा कार्यकर्ताओं की तोपचांची में बैठक हुई. बैठक में भाजपा समर्थित नेताओं ने विरोध गठबंधन का विरोध जताया. मौके पर सुरेश बढ़ई, कविता बर्णवाल, विकास पांडेय, विकास चौबे, निवास तिवारी, मुखिया संगीता कुमारी, सुनील मंडल, पप्पू बर्णवाल, पंसस पंकज मंडल, विवेक पासवान, संतोष सरकार आदि थे.

टुंडी के भाजपाइयों को नहीं हो रहा विश्वास
टुंडी. फैसले से टुंडी के भाजपाई हतप्रभ हैं. उन्हें विशवास नहीं हो रहा है कि पांच बार के सांसद रह चुके श्री पांडेय की सीट को आजसू को दे दिया गया है. टुंडी विधानसभा सीट पहले से आजसू के पास है और लोस सीट भी दे दिया गया, इससे कार्यकर्ताओ में भारी आक्रोश है. इस संबंध में गोपाल पांडेय, प्रखंड अध्यक्ष दिनेश सिंह, जिला मंत्री विजय मंडल, प्रखंड बीस सूत्री अध्यक्ष राजेश सिंह, दिनेश प्रसाद साव, एससी मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष परशुराम तुरी, संजीव मिश्र आदि का कहना है यदि पार्टी ने ऐसा फैसला किया है तो आत्मघाती होगा. पार्टी इस पर पुनर्विचार करे.

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