केवल पंडाल-सजावट में खर्च होंगे 20 करोड़
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Sep 2018 3:55 AM
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बंगाल के कारीगरों का आज भी है बोलबाला धनबाद : कोयलांचल में दुर्गोत्सव के दौरान भव्य पंडाल बनाने का प्रचलन दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है. यहां इस वर्ष 20 करोड़ रुपये से अधिक रुपये पंडालों के निर्माण व सजावट में खर्च होने का अनुमान है. क्या है पंडाल का गणित : धनबाद जिला में चार […]
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बंगाल के कारीगरों का आज भी है बोलबाला
धनबाद : कोयलांचल में दुर्गोत्सव के दौरान भव्य पंडाल बनाने का प्रचलन दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है. यहां इस वर्ष 20 करोड़ रुपये से अधिक रुपये पंडालों के निर्माण व सजावट में खर्च होने का अनुमान है.
क्या है पंडाल का गणित : धनबाद जिला में चार सौ से अधिक पूजा समितियों द्वारा दुर्गोत्सव का आयोजन किया जाता है. एक पंडाल में कम से कम दो लाख रुपये खर्च आते हैं. बहुत सारे बड़े पंडालों पर 10 लाख रुपये से ज्यादा खर्च आता है. डेकोरेटर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप सिंह की मानें तो यहां पंडाल व डेकोरेशन पर पूजा समितियों द्वारा 20 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किये जाते हैं. इस बार भी यह कारोबार 20 करोड़ से अधिक ही रहने की संभावना है. बड़ी पूजा समितियां पंडालों के डिजाइनिंग में भी खासा खर्च करती हैं. एक माह पहले ही पंडालों का निर्माण शुरू हो जाता है. पंडालों के निर्माण का कार्य भले ही स्थानीय डेकोरेटर्स लेते हैं. लेकिन, पूजा पंडालों के निर्माण में अब भी पश्चिम बंगाल के कारीगरों का ही वर्चस्व है.
नादिया, चंदन नगर के मजदूर धनबाद में डालते हैं डेरा
दुर्गा पूजा से लगभग एक माह पहले ही पश्चिम बंगाल के नादिया एवं चंदन नगर के कारीगर, मजदूर धनबाद पहुंच जाते हैं. यहां पूजा तक रह कर पंडालों को सजाते हैं. साथ ही लाइटिंग भी इन्हीं लोगों के जिम्मे होती है. हालांकि अब यहां के मजदूर, कारीगर भी निपुण होने लगे हैं. पूजा आयोजन समिति के सदस्य उन्हें पंडाल की डिजाइन मुहैया करते हैं. उस हिसाब से फिर पंडाल बनाया जाता है.
इनके पंडालों पर रहतीं निगाहें
धनबाद शहर में सरायढेला दुर्गा पूजा समिति, मनईटांड़, कला संगम, तेतुलतल्ला मैदान, डीएवी दरी मुहल्ला के पूजा पंडालों पर यहां के लोगों की नजर रहती है. भूली के पूजा पंडाल भी चर्चित होते हैं. इन पूजा समितियों द्वारा पंडालों की डिजाइन का खुलासा जल्द नहीं किया जाता है.
अभी हवा में नशा का घुलना बाकी
हवा में अभी नशा का घुलना बाकी है. मौसम का कुछ शोख होना बाकी है. तीज-जिउतिया, विश्वकर्मा पूजा बाकी है. इस तरह शारदीय नवरात्र के शुरू होने में अभी 28 दिन बाकी हैं. लेकिन दिन कैस बीत जाते हैं, इसका पता चलता है भला. तो तैयारियां चल रही है शहर में पूजा की. मूर्तिकार प्रतिमा गढ़ने में जुट गये हैं. पूजा समितियों के पास हजार काम हैं. योजनाएं बन गयीं हैं. काम चल रहा है. प्रशासन को भी कुछ काम करने होते हैं. नगर निगम और बिजली विभाग को भी. इसमे कोई भी देर करेगा तो भक्तों को परेशानी हो सकती है.
गुलाबी ठंड आ जायेगी तब तक : आम तौर पर अक्तूबर के पहले हफ्ते के बाद यहां बारिश नहीं होती. हां तूफान-उफान आ जाये तो बात दीगर. लेकिन अभी महीने में कभी भी तेज या मामूली बारिश हो सकती है. धीरे-धीरे हवा में सिहरन बढ़ने लगेगी. दुर्गा पूजा में गुलाबी ठंड आ जाने की उम्मीद है. हवा में नशा कलश स्थापन से ही छाने लगता है. मचलते बच्चे, सपनों की दुनिया में जीते तरुण-तरुणियां और अतीत को याद करते बुजुर्ग.
प्रशासन की तरफ से होती है देरी : आम तौर पर होता यह है कि पूजा समितियां भी तैयार और श्रद्धालु भी तैयार, लेकिन प्रशासन देर से तैयारी करता है. यह देरी परेशानी का सबब बनती है. मिसाल के तौर पर बारिश में जगह-जगह गड्ढे बन गये हैं. प्रशासन को उसे भरना होगा. यह काम अगर पहले हो जाये तो सबको राहत हो. फिर सफाई का मसला भी है. गली-मुहल्लों के आस-पास और पूजा पंडाल के पास सफाई पहले से होनी चाहिए. बिजली विभाग को भी जर्जर तार बदल देने चाहिए ताकि कोई हादसा न हो. और भी कई-कई छोटे-छोटे काम हो सकते हैं.
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