दिन में कैंडल मार्च, क्योंकि रात में लड़कियां सुरक्षित नहीं

Updated at : 22 Apr 2018 6:00 AM (IST)
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दिन में कैंडल मार्च, क्योंकि रात में लड़कियां सुरक्षित नहीं

धनबाद : ‘बेटा पढ़ाओ, उसे राक्षस बनने से बचाओ.’ ‘दुष्कर्मियों को सजा दो, चुप रहना ही हमेशा सहीं नहीं होता.’ ऐसे ही नारे लिखीं तख्तियां हाथों में लेकर शहर के विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने शनिवार को दिन में कैंडल मार्च निकाल कर देश में हो रहे दुष्कर्म का विरोध किया. सभी काले कपड़े में […]

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धनबाद : ‘बेटा पढ़ाओ, उसे राक्षस बनने से बचाओ.’ ‘दुष्कर्मियों को सजा दो, चुप रहना ही हमेशा सहीं नहीं होता.’ ऐसे ही नारे लिखीं तख्तियां हाथों में लेकर शहर के विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने शनिवार को दिन में कैंडल मार्च निकाल कर देश में हो रहे दुष्कर्म का विरोध किया. सभी काले कपड़े में थे.
कैंडल मार्च सुबह आठ बजे बेकारबांध से निकल कर लुबी सर्कुलर रोड होते हुए रणधीर वर्मा चौक पहुंचा. दिन में कैंडल मार्च के पीछे वे तर्क दे रहे थे कि अगर रात में निकालते तो छात्राओं के साथ कुछ भी हो सकता है. रणधीर वर्मा चौक पर सभा की अध्यक्षता कर रही स्कूली छात्रा आकांक्षा सिंह ने कहा कि जिस तरह सेे रोज अखबारों में दुष्कर्म की खबरें रहती हैं, उससे साफ पता चलता है कि देश में बेटियां सुरक्षित नहीं है.
सरकार को दुष्कर्म करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कानून बनाना चाहिए. छात्र देवाशीष ने कहा कि देश में जब ब्लात्कार हो रहे हैं तो लोग इसमें धर्म निकालने में लगे हैं. कोई सरकार पर तो कोई विपक्ष पर आरोप लगा रहा है. लोगों को अपनी सोच बदलनी चाहिए. दुष्कर्म किसी के साथ हो मगर वह देश की बेटी है. कैंडल मार्च में शिजा खान, आनंद, करण अग्रवाल के अलावा उड़ान के अध्यक्ष दीपक साह, अर्पिता अग्रवाल, पिंकी गुप्ता, रीता बंसल, विवेक अग्रवाल, विनोद बंसल, सौरभ अग्रवाल, नेहा साहू भी मौजूद थीं.
भागाबांध में नाबालिग से दुष्कर्म, पड़ोसी पर केस
पुटकी. भागाबांध ओपी क्षेत्र में शुक्रवार की देर रात एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म किया गया. पीड़िता के पिता की शिकायत पर भागाबांध पुलिस ने कांड अंकित कर लिया है. छानबीन की जा रही है. शिकायत में पीड़िता के पिता ने कहा है कि 20 अप्रैल की रात खाना खाने के बाद वह अपने कमरे में सोने चले गये. उनकी बहू दूसरे कमरे में सो रही थी. बगल के कमरे में मेरी पुत्री सोने चले गयी.
रात्रि करीब एक बजे बहू के चिल्लाने की आवाज सुन अपने कमरे से बाहर निकला तो देखा कि पड़ोसी शैलेश कुमार यादव (19) घर से दौड़ते हुए भाग रहा है. जब अपनी पुत्री से पूछा तो उसने बताया कि शैलेश कुमार यादव ने उसके साथ दुष्कर्म किया. शनिवार की सुबह सपरिवार जब शैलेश के घर जाकर शिकायत की तो शैलेश, उसके पिता दशरथ यादव, भाई शंभु यादव, शैलेंद्र यादव एवं उसकी मां ने लाठी-डंडा से मारपीट कर उन्हें एवं उनके पुत्र को घायल कर दिया.
इस संबंध में ओपी प्रभारी एसएन बादरा ने बताया कि कांड अंकित कर पीड़िता को मेडिकल एवं 164 के तहत बयान के लिए धनबाद भेजा गया है. भागाबांध पुलिस ने कांड संख्या 38/2018 भादवि की धारा 341/323/324/376 तथा 3/4 पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है. हालांकि अभी तक किसी भी नामजद अभियुक्त की गिरफ्तारी नहीं हो पायी है.
झारखंड में हर दिन तीन से ज्यादा दुष्कर्म के मामले, थाने में हर माह 109 से ज्यादा मामले आते हैं सामने
धनबाद. झारखंड में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां पर हर दिन तीन से ज्यादा रेप की घटनाएं सामने आती है. यानी हर माह 109 से ज्यादा दुष्कर्म के मामले दर्ज किये जाते हैं. मार्च 2017 से फरवरी 2018 तक के आंकड़ों पर गौर करें, तो कुल 1317 घटनाएं सामने आयी हैं. जबकि जानकार बताते हैं कि 40-45 फीसदी मामले लोक-लाज और थाने से बाहर सुलझा लेने के कारण आंकड़ों में दर्ज नहीं हो पाते हैं.
रेप के मामले में भारतीय दंड विधान की धारा 376(2) के तहत उम्रकैद और पोक्सो एक्ट-2012 के तहत आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है. दुष्कर्म के बाद हत्या करने पर 302 के तहत फांसी की सजा हो सकती है. हालांकि उक्त सजा के प्रावधानों के बाद जो खाैफ होना चाहिए, वह नहीं दिखता. इसकी मुख्य वजह है समय पर अनुसंधान का पूरा नहीं होना.
यही वजह है कि आरोपियों को इसका लाभ मिलता है. दूसरी वजह है सामाजिक तौर पर अनर्गल तरीके से मामलों को सलटाने की प्रवृत्ति. तीसरी वजह यहां के ग्रामीण और सूदरवर्ती इलाकों में कानून को लेकर जागरूकता का अभाव. हालांकि कुछेक मामलों में प्रदेश के विभिन्न न्यायालयों द्वारा दोषियों को सात से 10 साल तक की सजा और कुछ मामले में उम्रकैद से लेकर फांसी तक की सजा भी सुनायी गयी है. लेकिन इस बात को जिस ढंग से प्रचारित और प्रसारित किया जाना चाहिए था, वह नहीं हो सका.
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