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मशीन रिजेक्ट करने वाले जीएम भी जांच के दायरे में

धनबाद: मशीन खरीदारी के मामले में मशीन को रिजेक्ट करने वाले महाप्रबंधक भी जांच के घेरे में आ गये हैं. रोड हेडर मशीन की हाइट निविदा में उल्लेखित मशीनों से ज्यादा बड़ा होने के कारण जब यह मुनीडीह पहुंची तो तत्कालीन जीएम (मुनीडीह) एके दत्ता ने उसे रिजेक्ट कर दिया. बावजूद जीएम श्री दत्ता जांच […]

धनबाद: मशीन खरीदारी के मामले में मशीन को रिजेक्ट करने वाले महाप्रबंधक भी जांच के घेरे में आ गये हैं. रोड हेडर मशीन की हाइट निविदा में उल्लेखित मशीनों से ज्यादा बड़ा होने के कारण जब यह मुनीडीह पहुंची तो तत्कालीन जीएम (मुनीडीह) एके दत्ता ने उसे रिजेक्ट कर दिया. बावजूद जीएम श्री दत्ता जांच के दायरे में हैं. चूंकि चीनी कंपनी मेसर्स जियामुसी को मशीन डिस्पैच होने से पूर्व 11 करोड़ की राशि का भुगतान हो चुका था, ऐसे में बीसीसीएल के पास मशीन इस्तेमाल करने के बजाय और कोई रास्ता नहीं बचा था.
डीटी ने दिये थे लिखित निर्देश: बताते हैं कि तत्कालीन निदेशक तकनीकी (परिचालन) डीसी झा ने मशीन के इस्तेमाल को लेकर लिखित निर्देश दिया. इसके बाद दोनों रोड हेडर मशीनों का बेहतर इस्तेमाल कैसे संभव हो सके, इसके लिए कमेटी का गठन किया गया.
चाइना के जवाब में डीटी ने बनायी थी कमेटी : चाइनीज कंपनी के जवाब के बाद बीसीसीएल के डीटी श्री झा ने छह सदस्यीय एक कमेटी का गठन किया. इसमें सीएमपीडीआइएल के आरडी वीके सिन्हा, सीजीएम केके सिन्हा, जीएम (मुनीडीह) एके दत्ता, जीएम (वित्त) अालोक मंडल, एरिया मैनेजर इएंडएम (मुनीडीह) एसके सिंह व जीएम (परचेज) जी उप्रीति को शामिल किया गया. छह सदस्यीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि मशीन को रिजेक्ट कर दिया जाये या चाइना से मानक के मुताबिक मशीन मंगवा और इसे वापस कर दिया जाये या फिर सप्लायर कंपनी अगर यह स्योर करे कि हम निविदा की शर्त के मुताबिक 85 फीसदी की एबिलिटी के साथ मशीन चला सकते हैं, तो बिना बकाया पैसे का भुगतान किये कंपनी बोर्ड से मंजूरी से मशीन का इस्तेमाल किया जा सकता है.
कमेटी में रहने से जीएम ने किया था इनकार
बताते हैं कि जीएम एके दत्ता ने डीटी को पत्र लिख मशीन इस्तेमाल के लिए बनायी जाने वाली कमेटी में रहने से साफ इनकार कर दिया था, बावजूद डीटी श्री झा ने कमेटी में सीएमपीडीआइएल के तत्कालीन आरडी बीके सिन्हा, जीएम (मुनीडीह) एके दत्ता, सीजीएम केके सिन्हा, जीएम (इएंडएम) आरके मुंशी को शामिल किया. चार सदस्यीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि खान डीजीएमएस की मंजूरी लेने व दोनों रोड हेडर मशीन को कम से कम पांच सौ मीटर 85 फीसदी एबिलिटी पर चला कर तथा उसके सफल परीक्षण के बाद ही इस्तेमाल किया जा सकता है.
मशीन को चलाना ही विकल्प : बोर्ड
बीसीसीएल के 285वें बोर्ड ने कहा कि चूंकि मशीन के एवज में भुगतान हो चुका है और पैसे का दुरुपयोग न हो, अगर चीनी कंपनी मशीन चलाने को तैयार हो जाती है तो बिना भुगतान किये 600-600 मीटर चला कर देखा जा सकता है. बोर्ड ने आदेश पारित किया कि भविष्य में विदेशों से किसी प्रकार की मशीन मंगवाने से पूर्व कंपनी बिना 100 फीसदी बैंक गारंटी (बीजी) के भुगतान न करें.
यह था चीनी कंपनी का जवाब
बीसीसीएल के निदेशक तकनीकी (परिचालन) डीसी झा ने जीएम (परचेज) जी उप्रीति के माध्यम से चीनी कंपनी मेसर्स जियामुसी को पत्र लिख बताया था कि कंपनी ने बीसीसीएल को जो मशीनें आपूर्ति की हैं, वे सही नहीं हैं और इसका इस्तेमाल यहां नहीं हो सकता है. मेसर्स जियामुसी ने जवाब में कहा कि ऑर्डर और ड्राइंग के मुताबिक मशीन डिस्पैच की गयी. निरीक्षण रिपोर्ट में भी मशीन देने का जिक्र किया गया था. इस आलोक में ही जियामुसी को 11 करोड़ का भुगतान किया गया. चीनी कंपनी ने किसी प्रकार की अनियमितता से अपना पल्ला झाड़ लिया. जियामुसी ने अपने जवाब में कहा कि अगर बीसीसीएल मशीन बदलना चाहती है तो बदलाव, ट्रांसपोर्टिंग व टैक्स का खर्च बीसीसीएल को ही वहन करना होगा. इतना ही नहीं, मशीन चलाने के लिए डीजीएमएस की मंजूरी भी बीसीसीएल को ही लेनी होगी.
Prabhat Khabar Digital Desk
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