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शिव महिमा और स्वास्थ्य : भगवान भोलेनाथ की आराधना से दूर होता है मानसिक तनाव

Updated at : 16 Jul 2025 5:12 PM (IST)
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shravani mela 2025 first jyotirlinga somnath ke rahasya

श्रावण मास में जानें प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ का क्या है रहस्य. फोटो : प्रभात खबर

Shravani Mela 2025: श्रावणी मेले में भगवान शिव की पूजा का महत्व काफी बढ़ जाता है. बिहार-झारखंड के लोगों के लिए बाबा बैद्यनाथ की महिमा अपरंपार है. 12 ज्योतिर्लिंगों में एक बैद्यनाथ को मनोकामना लिंग भी कहा जाता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि 12 ज्योतिर्लिंग कौन-कौन से हैं. आईए, आपको बताते हैं प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ की महिमा के बारे में. शिव महिमा और स्वास्थ्य का क्या है रहस्य.

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Shravani Mela 2025| Shiva Mahima|ये पूरा जगत शिवमय है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्यों होती है शिवलिंग की पूजा? क्या आप सही मायने में शिवलिंग का रहस्य जानते हैं? शिव का असली स्वरूप क्या है? क्या शिव ही इस जगत के आधार हैं? क्या हुआ था, जब पहली बार विधाता ने इस सृष्टि की रचना शुरू की थी?

ज्योतिर्लिंगों से जुड़ा है सृष्टि का सारा रहस्य

दरअसल, सृष्टि का सारा रहस्य शिव के ज्योतिर्लिंगों से जुड़ा है. हर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी है मनोरथ और सिद्धि की तमाम सीढ़ियां, लेकिन पहले जानते हैं कि शिव कौन हैं? कैसे धारण करते हैं, वो इस जगत को? कैसे देवी भगवती शक्ति बनकर हमेशा उनके साथ रहती हैं?

सुबह एक बार 12 ज्योतिर्लिंगों का नाम लेने से सारे काम बन जायेंगे

कहते हैं कि एक राजा थे. उनकी 27 कन्याएं थीं. उनकी शादी होती है. एक कन्या की वजह से सारी कहानी बदल जाती है. उस कन्या का प्यार चंद्रमा के लिए शाप का विषय बनता है. फिर उत्पन्न होता है, शिव का पहला ज्योतिर्लिंग. देश में शिव के जो 12 ज्योतिर्लिंग हैं, उनके बारे में मान्यता है कि अगर सुबह उठकर सिर्फ एक बार भी बारहों ज्योतिर्लिंगों का नाम ले लिया जाये, तो सारा काम हो जाता है.

Shravani Mela 2025: सोमनाथ धरती का पहला ज्योतिर्लिंग

सोमनाथ का ज्योतिर्लिंग इस धरती का पहला ज्योतिर्लिंग है. इस ज्योतिर्लिंग की महिमा बड़ी विचित्र है. शिव पुराण की कथा के हिसाब से प्राचीन काल में राजा दक्ष ने अश्विनी समेत अपनी सत्ताईस कन्याओं की शादी चंद्रमा से की थी. 27 कन्याओं का पति बनके चंद्रमा बेहद खुश हुए. कन्याएं भी चंद्रमा को वर के रूप में पाकर अति प्रसन्न थीं. ये प्रसन्नता ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सकी.

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राजा दक्ष ने चंद्रमा को दिया क्षय रोग का शाप

कुछ दिनों के बाद चंद्रमा उनमें से एक रोहिणी पर ज्यादा मोहित हो गये. ये बात जब राजा दक्ष को पता चली, तो वो चंद्रमा को समझाने गये. चंद्रमा ने उनकी बातें सुनीं, लेकिन कुछ दिनों के बाद फिर रोहिणी पर उनकी आसक्ति और प्रबल हो गयी. जब राजा दक्ष को ये बात फिर पता चली, तो वो गुस्से में चंद्रमा के पास गये. उनसे कहा, ‘मैं तुमको पहले भी समझा चुका हूं. लगता है कि तुम पर मेरी बातों का असर नहीं होने वाला. इसलिए मैं तुम्हें शाप देता हूं कि तुम क्षय रोग के मरीज हो जाओ.’

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राजा दक्ष के शाप से तुरंत धूमिल हो गये चंद्रमा

राजा दक्ष के इस श्राप के तुरंत बाद चंद्रमा क्षय रोग से ग्रस्त होकर धूमिल हो गये. उनकी रौशनी जाती रही. ये देखकर ऋषि-मुनि बहुत परेशान हुए. इसके बाद सारे ऋषि-मुनि और देवता इंद्र के साथ भगवान ब्रह्मा की शरण में गये. फिर ब्रह्मा जी ने उन्हें एक उपाय बताया. उपाय के हिसाब से चंद्रमा को सोमनाथ के इसी जगह पर आना था. भगवान शिव का तप करना था और उसके बाद ब्रह्मा जी के हिसाब से भगवान शिव के प्रकट होने के बाद वो दक्ष के शाप से मुक्त हो सकते थे.

चंद्रमा ने सोमनाथ में महामृत्युंजय से किया पूजन

चंद्रमा सोमनाथ के पास पहुंचे. भगवान वृषभध्वज का महामृत्युंजय मंत्र से पूजन किया. फिर 6 महीने तक शिव की कठोर तपस्या करते रहे. चंद्रमा की कठोर तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न हुए. उनके सामने प्रकट हुए और वर मांगने को कहा. चंद्रमा ने वर मांगा कि हे भगवन, अगर आप खुश हैं, तो मुझे इस क्षय रोग से मुक्ति दीजिए और मेरे सारे अपराधों को क्षमा कर दीजिए.

भगवान भोलेनाथ ने चंद्रमा को खुश कर दिया

भगवान शिव ने कहा कि तुम्हें जिसने शाप दिया है, वो भी कोई साधारण व्यक्ति नहीं है, लेकिन मैं तुम्हारे लिए कुछ करूंगा जरूर. इसके बाद भगवान शिव ने चंद्रमा के साथ जो किया, उसे देखकर चंद्रमा न ज्यादा खुश हो सके और न ही उदास रह सके. चंद्रमा की तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न थे.

शिव के उपाय से प्रसन्न हुए चंद्रमा, करने लगे स्तुति

इसलिए चंद्रमा के लिए शिव एक रास्ता निकालते हैं. चंद्रमा से कहते हैं कि मैं तुम्हारे लिए ये कर सकता हूं कि एक माह में जो 2 पक्ष होते हैं, उसमें से एक पक्ष में तुम निखरते जाओगे, लेकिन दूसरे पक्ष में तुम क्षीण भी होओगे. ये पौराणिक राज है चंद्रमा के शुक्ल और कृष्ण पक्ष का, जिसमें एक पक्ष में वो बढ़ते हैं और दूसरे में घटते जाते हैं. भगवान शिव के इस वर से भी चंद्रमा काफी प्रसन्न हुए. उन्होंने भगवान शिव का आभार प्रकट किया. उनकी स्तुति की.

चंद्रमा की स्तुति से सोमनाथ में शिव निराकार से साकार हुए

यहां पर एक बड़ा अच्छा रहस्य है. अगर आप साकार और निराकार शिव का रहस्य जानते हैं, तो आप इसे समझ जायेंगे, क्योंकि चंद्रमा की स्तुति के बाद इसी जगह पर भगवान शिव निराकार से साकार हो गये थे. साकार होते ही देवताओं ने उन्हें यहां सोमेश्वर भगवान के रूप में मान लिया. यहां से भगवान शिव तीनों लोकों में सोमनाथ के नाम से विख्यात हुए.

सोमनाथ की स्थापना के बाद देवताओं ने उनकी पूजा की

शिव जब सोमनाथ के रूप में स्थापित हो गये, तो देवताओं ने उनकी पूजा की ही, चंद्रमा को भी नमस्कार किया. चंद्रमा की वजह से ही शिव का ये स्वरूप इस जगह पर मौजूद है. समय गुजरा. इस जगह की पवित्रता बढ़ती गयी. शिव पुराण में कथा है कि जब शिव सोमनाथ के रूप में यहां निवास करने लगे, तो देवताओं ने यहां एक कुंड की स्थापना की. उस कुंड का नाम रखा गया सोमनाथ कुंड.

सोमनाथ कुंड में है शिव और ब्रह्मा का साक्षात निवास

कहते हैं कि इस सोमनाथ कुंड में भगवान शिव और ब्रह्मा का साक्षात निवास है. इसलिए जो भी उस कुंड में स्नान करता है, उसके सारे पाप धुल जाते हैं. उसे हर तरह के रोगों से निजात मिल जाती है. शिव पुराण में लिखा है कि असाध्य से असाध्य रोग भी कुंड में स्नान करने के बाद खत्म हो जाते हैं. साथ ही एक विधि है, जिसका पालन करना पड़ता है. अगर कोई व्यक्ति क्षय रोग से ग्रसित है, तो उसे उस कुंड में लगातार 6 माह तक स्नान करना होगा. ये महिमा है सोमनाथ की.

सोमनाथ के दर्शन नहीं कर पाते, तो उनकी उत्पत्ति की कथा सुनें

शिव पुराण में ये भी लिखा है कि अगर किसी वजह से आप सोमनाथ के दर्शन नहीं कर पाते हैं, तो सोमनाथ की उत्पत्ति की कथा सुनकर भी आप वही पौराणिक लाभ उठा सकते हैं. इस तीर्थ में और भी तमाम मुरादें पूरी होतीं हैं, क्योंकि यह तीर्थ बारह ज्योतिर्लिंगों में से सबसे महत्वपूर्ण है. धरती का सबसे पहला ज्योतिर्लिंग सौराष्ट्र में काठियावाड़ नाम की जगह पर है.

सोमनाथ में पंचामृत से होती है शिव की पूजा

इस मंदिर में जो सोमनाथ देव हैं, उनकी पूजा पंचामृत से की जाती है. कहा जाता है कि जब चंद्रमा को शिव ने शापमुक्त किया, तो उन्होंने जिस विधि से साकार शिव की पूजा की थी, उसी विधि से आज भी सोमनाथ की पूजा होती है. यहां जाने वाले जातक अगर 2 सोमवार भी शिव की पूजा को देख लेते हैं, तो उनके सारे मनोरथ पूरे हो जाते हैं. अगर आप सावन की पूर्णिमा में कोई मनोरथ लेकर आते हैं, तो भरोसा रखिए, उसके पूरा होने में कोई विलंब नहीं होगा.

शिवरात्रि की रात महामृत्युंजय के जप का है विशेष महत्व

अगर आप शिवरात्रि की रात यहां महामृत्युंजय मंत्र का महज 108 बार भी जाप कर लेते हैं, तो वो सारी चीजें आपको हासिल हो सकती हैं, जिसके लिए आप परेशान हैं. ये है धरती के सबसे पहले ज्योतिर्लिंग की महिमा. शिव पुराण में ये कथा महर्षि सूरत जी ने दूसरे ऋषियों को सुनायी है.

शीतल हैं चंद्रमा, शिव जगत के सार, इसलिए खत्म होते हैं तनाव

कहा जाता है कि जो जातक इस कथा को ध्यान से सुनते हैं या फिर सुनाते हैं, उन पर चंद्रमा और शिव दोनों की कृपा होती है. चंद्रमा शीतलता के वाहक हैं. उनके खुश होने से इंसान मानसिक तनाव से दूर होता है. शिव इस जगत के सार हैं. उनके खुश होने से जीवन के सारे मकसद पूरे हो जाते हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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