Deoghar news : शिबूू सोरेन मेला स्थल पर आदिवासी समुदाय के लोगों ने गुरुजी को दी श्रद्धांजलि

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Deoghar news : शिबूू सोरेन मेला स्थल पर आदिवासी समुदाय के लोगों ने गुरुजी को दी श्रद्धांजलि

प्रखंड के रामपुर अम्बाटांड़ के पास स्थित ढिपी पहाड़ी से शिबू सोरेन ने महाजनी प्रथा के खिलाफ शुरू किया था आंदोलन. उसी जगह लगता है हर साल शिबू सोरेन मेला.

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प्रतिनिधि, पालोजोरी. प्रखंड के रामपुर अम्बाटांड़ गांव के पास स्थित ढिपी पहाड़ी के उपर गुरुवार को स्थानीय आदिवासी समुदाय के लोगों ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि दी. इस अवसर पर रामपुर, चंद्रायडीह, अंबाटांड़ सहित आसपास के सैकड़ों लोगों ने गुरुजी की तस्वीर पर पुष्प चढ़ाकर उन्हें नमन किया. ग्रामीण बलराम मंडल व दिलीप टुडू, चोपला हांसदा ने बताया कि दिशोम गुरु पहली बार उनके गांव एक बाइक से आये थे. इसके बाद वह जीप से यहां पहुंचे और महाजनी प्रथा के खिलाफ लोगों को एकजुट किया. यहां के लोग उस समय महाजनों के चंगुल में बुरी तरह जकड़े हुए थे. महाजन यहां के आदिवासियों का जमीन, पेड़, दुधारू पशु, मवेशी आदि औने पौने दाम व ब्याज में ले लेते थे, जिससे यहां के आदिवासी समुदाय के लोगों की स्थिति काफी दयनीय हो गयी थी. शिबू सोरेन ने यहां के आदिवासियों के महाजनी प्रथा व महाजनों जुल्म के खिलाफ एकजुट कर उन्हें आंदोलन करने को प्रेरित किया. इस क्रम में दिशोम गुरु ने रामपुर अम्बाटांड़ के इसी ढिपी पहाड़ी के चट्टान में बैठकर एक बड़ी मीटिंग की थी. इस दौरान यहां पर लगभग 10 हजार की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग तीर-धनुष नगाड़ा लेकर जुटे थे. तीन दिनों तक दिशोम गुरु शिबू सोरेन दिन में इसी चट्टान पर बैठ कर धान काटो अभियान की गतिविधि पर नजर रखते थे, और रात को वे अपने सहयोगियों के साथ रामपुर के खम्हार खलिहान में ढाको में सोते थे. तीन दिनों बाद वे यहां से जामताड़ा के लिए प्रस्थान कर गये. गुरुजी को यहां के लोग भगवान की तरह पूजते हैं. उनके सम्मान में प्रत्येक वर्ष इस पहाड़ी में शिबू सोरेन मेलए का आयोजन होता है. यह मेला आदिवासी के बंधना पर्व के आठ दिन बाद आयोजित होता है. गुरुजी के निधन पर यहां के ग्रामीण शोक में हैं. गुरुवार को ग्रामीणों ने उसी पहाड़ी के उस स्थान पर उन्हें श्रद्धांजलि दी, जहां बैठकर कभी गुरुजी ने लोगों को एकजुट किया था. मौके पर ग्राम प्रधान रूबी हांसदा, 20 सूत्री प्रखंड अध्यक्ष बलराम मंडल, सचिव सोनालाल मुर्मू, उपाध्यक्ष शंकर टुडू, सक्रिय कार्यकर्ता दिलीप टुडू, रवींद्र हांसदा, शिवाधन हांसदा, मनोज सोरेन, अनिल मुर्मू, रूबीलाल टुडू, रोमल हांसदा, चोपला हांसदा, लुवींद्र हेम्ब्रम, विनय मुर्मू, बहादी मरांडी, ललिता सोरेन, धनमुनी हांसदा, तुलसी हांसदा, सुबोधन मुर्मू, झिलमुनी टुडू, सोनामुनी टुडू, बहामती किस्कू, अमिय मंडल, सोनातन मुर्मू सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे. ॰ढिपी पहाड़ी पर लगभग 10 हजार की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोगों को साथ लेकर तीन दिनों तक धान काटो आंदोलन का किया था नेतृत्व ॰बंधना पर्व के आठ दिन बाद यहां लगता है शिबू सोरेन मेला

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Uday Kant Singh

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