Deoghar News : एफसीआइ में ठेका प्रथा समाप्त करने की उठी जोरदार मांग, हक के लिए संघर्ष का आह्वान

एफसीआइ श्रमिक यूनियन तथा ऑल फूड एंड अलाइड श्रमिक यूनियन का वार्षिक सम्मेलन शनिवार को शुरू हुआ.
प्रतिनिधि, जसीडीह : एफसीआइ श्रमिक यूनियन का 12वां तथा ऑल फूड एंड अलाइड श्रमिक यूनियन का 11वां वार्षिक सम्मेलन शनिवार को जसीडीह के एक्सक्लूसिव गार्डन में शुरू हुआ. इसमें देश भर से भारतीय खाद्य निगम व विभिन्न फूड एजेंसियों में कार्यरत श्रमिकों के डेलीगेट्स, यूनियन के पदाधिकारी व सदस्य शामिल हुए हैं. इस दौरान खाद्य निगम में कार्यरत श्रमिकों की विभिन्न मांगों पर चर्चा की गयी. साथ ही विभिन्न फूड एजेंसियों में काम कर रहे श्रमिकों ने भी अपनी मांगों पर चर्चा की. सम्मेलन का उद्घाटन पूर्व सांसद अरुण कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया. उन्होंने कहा कि वर्तमान में पूरी दुनिया में श्रम का महत्व कम हुआ है, जबकि पूंजी मजबूत हो गया है, जो एक खतरनाक संकेत है. पूरी दुनिया में मानव जब एक संवेदनशील समाज की रचना करता है, तो उसी समय पूंजी और श्रम में संघर्ष की शुरुआत हो जाती है. पूंजी की आवश्यकता है, लेकिन श्रम नहीं होने से पूंजी बेकार है. श्रम शक्तियों का सम्मान पूंजीपतियों को करना चाहिए, लेकिन ऐसा होता नहीं है. जब-जब श्रम शक्ति मजबूत होती हैं, तो समझौता कर लिया जाता है. एफसीआइ श्रमिक यूनियन के अध्यक्ष हरिकांत शर्मा ने कहा कि हमें एकजुट व ऊर्जावान होकर तथा संघर्ष कर अपनी मांगों को पूरा करना होगा. महासचिव उमेश कुमार गुप्ता ने यूनियन द्वारा एफसीआइ में डीपीएस व नो वर्क नो पे के श्रमिकों के लिए सिंगल लेबर सिस्टम, समान काम समान वेतन लागू करने और एफसीआइ में ठेका प्रथा को समाप्त करने पर जोर दिया. वहीं उपाध्यक्ष मो शाहबाज आलम ने कहा कि विभाग श्रमिकों के वेज रिवीजन को एक जनवरी 2022 से लागू करें और श्रमिकों को एक जनवरी 2017 से नये वेतनमान का इंसेंटिव व एक जनवरी 2017 से 31 मई 2019 तक का ओटीए का एरियर उपलब्ध कराये. इसके साथ ही 35000 श्रमिकों के खाली पदों को जल्द से जल्द भरा जाये. इस मौके पर उपाध्यक्ष मुर्शीद आलम, सचिव महेश्वर यादव, उपाध्यक्ष एसवी शिवकुमार, कलीम अहमद, पुरुषोत्तम महतो, संजय यादव, मकसूद आलम, अरविंद कुमार, सुबोध सिंह आदि मौजूद थे. हाइलाइट्स एफसीआइ श्रमिक यूनियन व ऑल फूड एंड अलाइड श्रमिक यूनियन का संयुक्त वार्षिक सम्मेलन का आयोजन सम्मेलन में गूंजा अधिकारों का मुद्दा, ठेका प्रथा खत्म करने की मांग श्रम का महत्व कम होना व पूंजी का मजबूत होना खतरनाक संकेत : पूर्व सांसद
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