सात साल से नहीं हुई झारखंड श्राइन बोर्ड की बैठक, सांसद निशिकांत दुबे ने उठाए सवाल

Updated:
विज्ञापन
देवघर के बाबा मंदिर में पूजा करके बाहर निकलते गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे. फोटो: प्रभात खबर

देवघर के बाबा मंदिर में पूजा करके बाहर निकलते गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे. फोटो: प्रभात खबर

देवघर सांसद निशिकांत दुबे ने झारखंड श्राइन बोर्ड की सात वर्षों से बैठक न होने पर राज्य सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण मंदिर विकास से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लंबित हैं.

विज्ञापन


देवघर से संजीत मंडल की रिपोर्ट

Deoghar News: गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे शनिवार को दिल्ली से देवघर पहुंचे और बाबा बैद्यनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की. इसके बाद उन्होंने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिछले सात वर्षों में झारखंड श्राइन बोर्ड की एक भी बैठक नहीं हुई. उन्होंने इसे गंभीर संवैधानिक और प्रशासनिक विषय बताते हुए कहा कि श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया.

'बैठक में शामिल होने आया था, लेकिन फिर नहीं हुई'

सांसद ने कहा कि वह विशेष रूप से श्राइन बोर्ड की बैठक में शामिल होने की उम्मीद लेकर देवघर आए थे. उन्होंने कहा कि सात वर्षों में मुख्यमंत्री का आमने-सामने चेहरा भी नहीं देखा, लेकिन बाबा बैद्यनाथ के नाम पर राजनीति नहीं करना चाहते. इसी सोच के साथ अपना अहंकार छोड़कर बैठक में शामिल होने की इच्छा से आए थे, ताकि बाबा मंदिर, देवघर के विकास, पंडा समाज, स्थानीय दुकानदारों और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सके। लेकिन इस बार भी बैठक नहीं हुई.

'विधानसभा से बना बोर्ड, फिर भी बैठक नहीं'

निशिकांत दुबे ने कहा कि श्राइन बोर्ड विधानसभा से पारित कानून के तहत गठित संस्था है. ऐसे में इसकी नियमित बैठक होना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि सात वर्षों तक बैठक नहीं होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है और इससे मंदिर एवं तीर्थ क्षेत्र के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लंबित हैं.

हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप

सांसद ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत देवघर का क्यू कॉम्प्लेक्स आज भी अधूरा पड़ा है. उन्होंने कहा कि इस मामले में हाईकोर्ट का आदेश भी है, लेकिन राज्य सरकार ने उस पर भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं की. इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने का उद्देश्य अधूरा रह गया है.

'बैठक होगी तो अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी'

निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को यह आशंका है कि यदि श्राइन बोर्ड की बैठक होगी तो मंदिर प्रबंधन और अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी. उन्होंने कहा कि बाबा बैद्यनाथ मंदिर में हुई चोरी समेत कई मामलों पर सवाल उठेंगे, इसलिए बैठक नहीं करायी जा रही है. उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार को पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए.

'बाबा की कृपा से ही सफल होगा श्रावणी मेला'

श्रावणी मेले की तैयारियों पर सांसद ने कहा कि यह मेला बाबा बैद्यनाथ की कृपा से ही सफलतापूर्वक संपन्न होगा. उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार भी बाबा स्वयं अपने भक्तों की रक्षा करेंगे और मेला सकुशल संपन्न होगा.

इसे भी पढ़ें: श्रावणी मेला 2026: बासुकीनाथ और जसीडीह पहुंचे रेल IG, स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था और सुविधाओं का लिया जायजा

प्रमुख बातें

  • सात वर्षों में श्राइन बोर्ड की एक भी बैठक नहीं हुई, यह गंभीर प्रशासनिक विफलता है.
  • श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मुख्यमंत्री हैं, फिर भी बाबा धाम के मुद्दों पर चर्चा तक नहीं हो रही.
  • केंद्र सरकार से स्वीकृत क्यू कॉम्प्लेक्स आज भी अधूरा, हाईकोर्ट के आदेश का भी पालन नहीं हुआ.
  • श्राइन बोर्ड की बैठक होगी तो मंदिर में हुई चोरी सहित कई मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी.
  • श्रावणी मेला सरकार नहीं, बाबा बैद्यनाथ की कृपा से सफलतापूर्वक संपन्न होगा.

इसे भी पढ़ें: श्रावणी मेले में स्टेशनों पर AI का पहरा, संदिग्धों के घुसते ही बजते ही बजेगा अलार्म, स्पेशल ट्रेनों में तैनात होंगे जवान


विज्ञापन
कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola