कोविड के कारण दूसरी बार देवघर के रिखियापीठ में बाहरी श्रद्धालुओं की नो एंट्री, शतचंडी महायज्ञ की हुई शुरुआत

Updated at : 05 Dec 2021 8:56 PM (IST)
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कोविड के कारण दूसरी बार देवघर के रिखियापीठ में बाहरी श्रद्धालुओं की नो एंट्री, शतचंडी महायज्ञ की हुई शुरुआत

jharkhand news: देवघर के रिखियापीठ में पांच दिवसीय शतचंडी महायज्ञ सह सीता कल्याणम् की शुरुआत हुई. कोरोना संक्रमण के कारण दूसरी बार बाहरी श्रद्धालुओं के यहां आने पर पाबंदी लगायी गयी. सिर्फ आश्रम के सन्यासी और श्रद्धालु ही इस महायज्ञ में शामिल हुए.

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Jharkhand news: देवघर के रिखियापीठ में पांच दिवसीय शतचंडी महायज्ञ सह सीता कल्याणम् की शुरुआत रविवार से हुई. इस दौरान काेरोना वायरस संक्रमण के कारण बाहरी श्रद्धालुओं के आने पर पाबंदी लगा दी गयी है. आश्रम के अंदर के ही संन्यासी व श्रद्धालु शतचंडी महायज्ञ में शामिल हुए. वहीं, ग्रामीणों के बीच देवी मां के प्रसाद का वितरण यज्ञ स्थल के दरवाजे के बाहर से ही किया गया.

स्वामी सत्संगीजी के मार्गदर्शन में रविवार को पंडितों ने अर्णी से अग्नि प्रज्वलित कर शतचंडी महायज्ञ में हवन की शुरुआत की. संन्यासियों ने यज्ञ का ध्वजारोहण किया गया. साथ ही पंडितों ने मंत्रोच्चारण के साथ गुरु पूजा की. संन्यासियों ने देवी मां व गुरु को समर्पित भजन-कीर्तन कर यज्ञ परिसर को भक्तिमय कर दिया.

इधर, कोविड को ध्यान में रखते हुए शतचंडी महायज्ञ में बाहर से आने वाले सभी श्रद्धालुओं के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गयी है. इस महायज्ञ में आश्रम के अंदर के ही संन्यासी और श्रद्धालु ही शतचंडी महायज्ञ में शामिल हुए. ग्रामीणों ने दूर से ही देवी मां व गुरु काे प्रणाम किया.

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शाम में संन्यासी ने देवी मां को समर्पित दुर्गती नाशिनी दुर्गा जाय-जय… समेत गुरु को समर्पित गुरुर ब्रह्मा गुरु विष्णु….आदि कीर्तन में झूमे. पूरे अनुष्ठान के दौरान भक्तों के बैठने की दीर्घा खाली रही. यज्ञ परिसर में केवल पंडित व संन्यासी ही शामिल हुए. आगामी 8 दिसंबर को सीता कल्याणम् व यज्ञ की पूर्णाहुति होगी.

इस महायज्ञ का आयोजन रिखियापीठ की पीठाधीश्वरी स्वामी सत्संगीजी के मार्गदर्शन में हो रहा है. आश्रम में महायज्ञ के लिए यज्ञ मंडप तैयार हुआ है. पंडित मंत्रोच्चारण व पूरी परम्परा के साथ महायज्ञ में शामिल हो रहे हैं. बता दें कि पिछले साल भी कोविड को ध्यान में रखते हुए रिखियापीठ में शतचंडी महायज्ञ आयोजित हुआ था, जिसमें केवल आश्रम के श्रद्धालु ही शामिल हुए थे.

Posted By: Samir Ranjan.

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