ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर हाजिरी नहीं लगाना पड़ा भारी, 256 स्कूलों के शिक्षकों का वेतन बंद

Updated at : 13 Feb 2026 8:12 AM (IST)
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Deoghar School News

ई विद्यावाहिनी पोर्टल पर हाजिरी नहीं लगाने वाले शिक्षकों का वेतन बंद किया गया.

Deoghar School News: झारखंड के देवघर जिले में ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करने पर 256 स्कूलों के शिक्षकों का वेतन बंद कर दिया गया है. 1 से 10 फरवरी तक शून्य उपस्थिति वाले विद्यालयों पर कार्रवाई हुई. शिक्षक संगठनों ने तकनीकी खामियों का हवाला देते हुए फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की है. नीचे पूरी खबर पढ़ें.

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देवघर से संजीत मंडल की रिपोर्ट

ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर शिक्षकों और विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करना देवघर जिले के सैकड़ों शिक्षकों पर भारी पड़ गया है. जिले के 256 विद्यालयों के शिक्षक और कर्मचारियों के वेतन और मानदेय पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गयी है. इस कार्रवाई से शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है.

ऑनलाइन समीक्षा में निचले पायदान पर जिला

देवघर जिले में यह कार्रवाई स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ऑनलाइन समीक्षा बैठक के बाद की गयी. बैठक में ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज करने के मामले में जिले की रैंकिंग निचले स्तर पर पायी गई. डीईओ सह डीपीओ देवघर की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि शिक्षकों और बच्चों की ऑनलाइन उपस्थिति बेहद असंतोषजनक पाई गई. इसके बाद विभागीय निर्देश पर सख्त कदम उठाया गया.

1 से 10 फरवरी तक शून्य उपस्थिति वाले स्कूलों पर कार्रवाई

डीईओ की ओर से जारी आदेश के अनुसार 1 फरवरी से 10 फरवरी के बीच जिन विद्यालयों में ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति शून्य दर्ज पाई गई है, वहां कार्यरत प्रभारी प्रधानाध्यापक, सहायक आचार्य, सहायक अध्यापक समेत सभी कर्मचारियों के वेतन पर रोक लगा दी गई है. आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिस तिथि को पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज नहीं होगी, उस दिन विद्यालय बंद माना जाएगा और सभी शिक्षक अनुपस्थित माने जायेंगे. ऐसे में संबंधित तिथि का वेतन या मानदेय देय नहीं होगा.

सारठ प्रखंड के 69 विद्यालय भी शामिल

कार्रवाई की जद में सारठ प्रखंड के 69 विद्यालय भी आए हैं. अचानक वेतन रोक दिए जाने के फैसले से शिक्षकों में नाराजगी है. कई शिक्षकों का कहना है कि तकनीकी कारणों या नेटवर्क समस्या की वजह से उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाई. हालांकि, विभाग का कहना है कि डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था को गंभीरता से लागू करने के लिए यह कदम जरूरी था.

शिक्षक संगठनों ने फैसले पर उठाये सवाल

झारखंड ऑफिसर्स टीचर्स एंड एम्पलाइज फेडरेशन के प्रांतीय मीडिया प्रभारी दिलीप कुमार राय ने विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि इस अवधि में मैट्रिक परीक्षा, नगर निकाय चुनाव और शिक्षकों की विभिन्न जगहों पर प्रतिनियुक्ति जैसी परिस्थितियां थीं. उनका कहना है कि तकनीकी खामियां, संसाधनों की कमी और नेटवर्क समस्याएं भी बड़ी वजह हैं. सिर्फ शिक्षकों पर कार्रवाई करना समाधान नहीं है. विभाग को इस निर्णय पर दोबारा विचार करना चाहिए.

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शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ा दबाव

इस आदेश के बाद जिले के शिक्षकों में चिंता और असमंजस की स्थिति है. कई विद्यालयों में अब पोर्टल पर नियमित उपस्थिति दर्ज कराने को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है. विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ई-विद्यावाहिनी के माध्यम से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना लक्ष्य है. वहीं, शिक्षक संगठनों की मांग है कि तकनीकी समस्याओं का समाधान कर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया जाए. फिलहाल, इस फैसले ने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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