ऑनलाइन दवा मंगाना पड़ा महंगा, साइबर ठगों ने खाते से उड़ाये 40,600 रुपये

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ऑनलाइन दवा मंगाने के चक्कर में साइबर ठगी का मामला सामने आया है. ठगों ने पीडित के खाते से 40,600 रुपये निकाल लिये, जानें कैसे बचें.

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देवघर. पालोजोरी थाना क्षेत्र के चौधरी नवाडीह गांव निवासी जायद शेख ऑनलाइन दवा मंगाने के चक्कर में साइबर ठगी के शिकार हो गये. साइबर ठगों ने उन्हें झांसे में लेकर 40,600 रुपये की ठगी कर ली. घटना 12 अगस्त की बतायी जा रही है.

दवा के ऑर्डर के बाद साइबर ठगों ने बनाया निशाना जानकारी के अनुसार, जायद शेख ने ऑनलाइन दवा मंगाने के लिए ऑर्डर किया था. इसके बाद साइबर ठगों ने उनसे संपर्क कर उन्हें अपने झांसे में लिया और कथित रूप से अलग-अलग प्रक्रिया के माध्यम से उनके खाते से 40,600 रुपये की अवैध निकासी कर ली.

घटना की जानकारी होने के बाद पीड़ित ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज करायी. उन्होंने पुलिस से मामले की जांच कर साइबर ठगों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा ठगी गयी राशि वापस कराने की मांग की है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

ऑनलाइन दवा की जरूरत बनी साइबर ठगी का रास्ता

ऑनलाइन दवा मंगाना आज बेहद आसान हो गया है, लेकिन यही सुविधा कभी-कभी साइबर ठगों के लिए ठगी का रास्ता भी बन जाती है. दवा खरीदने की जरूरत के बीच अगर कोई अनजान लिंक, फोन कॉल या भुगतान के नाम पर मांगी गई जानकारी साझा कर दी जाए, तो कुछ ही मिनट में बैंक खाते से बड़ी रकम निकल सकती है. ऐसे ही इस मामले में ऑनलाइन दवा मंगाना पीडित को 40,600 रुपये का नुकसान करा गया.

यह मामला एक बार फिर बताता है कि इंटरनेट पर दवा खरीदते समय केवल दवा की कीमत और डिलीवरी पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है. पेमेंट के दौरान सामने आने वाले हर लिंक, कॉल और निर्देश की जांच करना भी जरूरी है.

कैसे साइबर ठग बना सकते हैं ऑनलाइन दवा को हथियार

साइबर ठग ऑनलाइन खरीदारी करने वाले लोगों को अलग-अलग तरीकों से निशाना बनाते हैं. दवा के नाम पर फर्जी वेबसाइट, नकली कस्टमर केयर नंबर, फर्जी डिस्काउंट ऑफर या भुगतान संबंधी संदेश भेजे जा सकते हैं.

कई बार ठग खुद को किसी ऑनलाइन दवा प्लेटफॉर्म का कर्मचारी बताकर फोन कर सकते हैं. इसके बाद वे ऑर्डर की पुष्टि, भुगतान वापस करने या डिलीवरी पूरी कराने के नाम पर पीडित को किसी लिंक पर जाने के लिए कहते हैं.

यही वह समय होता है जब ग्राहक को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है. किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंकिंग जानकारी देना या मोबाइल पर आए निर्देशों का पालन करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है.

ऑनलाइन दवा खरीदते समय इन गलतियों से बचें

ऑनलाइन दवा खरीदते समय सबसे पहले वेबसाइट या ऐप की विश्वसनीयता जांचें. इंटरनेट पर मिले किसी भी विज्ञापन या अनजान लिंक को तुरंत खोलकर भुगतान न करें.

अगर कोई व्यक्ति फोन करके ऑर्डर कैंसल होने, पेमेंट फेल होने या रिफंड के नाम पर बैंक खाते से जुड़ी जानकारी मांगता है, तो बातचीत रोक दें. बैंकिंग जानकारी केवल इसलिए साझा नहीं करनी चाहिए क्योंकि सामने वाला खुद को कस्टमर केयर कर्मचारी बता रहा है.

OTP, PIN और UPI जानकारी कभी साझा न करें

बैंक खाते से जुड़ा OTP, ATM PIN, UPI PIN और अन्य संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए. अगर कोई व्यक्ति फोन पर इन जानकारियों की मांग करता है, तो यह बड़ा खतरे का संकेत हो सकता है.

यह भी समझना जरूरी है कि पैसे प्राप्त करने के नाम पर UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती. किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर QR कोड स्कैन करने या भुगतान अनुरोध स्वीकार करने से पहले पूरी जानकारी जांचें.

फर्जी कस्टमर केयर से रहें सावधान

ऑनलाइन दवा से जुड़ी समस्या आने पर इंटरनेट पर मिले किसी भी कस्टमर केयर नंबर पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है. ठग ऐसे नंबरों को वेबसाइट, सोशल मीडिया पोस्ट या दूसरे ऑनलाइन माध्यमों के जरिए लोगों तक पहुंचा सकते हैं.

किसी सेवा से जुड़ी शिकायत या ऑर्डर की समस्या होने पर संबंधित प्लेटफॉर्म के आधिकारिक ऐप या वेबसाइट में उपलब्ध सहायता विकल्प का ही इस्तेमाल करना बेहतर है.

अगर खाते से अनधिकृत रकम निकल जाए, तो सबसे पहले बैंक को इसकी सूचना दें और संबंधित खाते या कार्ड को सुरक्षित कराने के लिए जरूरी कदम उठाएं. देरी होने पर ठगी की रकम वापस पाने की संभावना कम हो सकती है.

इसके बाद साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करें. शिकायत के दौरान ट्रांजेक्शन की तारीख, रकम, बैंक संदेश, संदिग्ध फोन नंबर, लिंक और उपलब्ध स्क्रीनशॉट जैसी जानकारी सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है.

पीडित को ठगी के बाद शर्मिंदा होने के बजाय तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए. साइबर अपराध में शुरुआती समय काफी महत्वपूर्ण हो सकता है.

सुविधा के साथ सावधानी भी जरूरी

ऑनलाइन दवा खरीदना समय बचाने वाला विकल्प है, लेकिन डिजिटल सुविधा के साथ साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी भी जुड़ी है. 40,600 रुपये की यह ठगी बताती है कि एक छोटी सी लापरवाही बैंक खाते पर भारी पड़ सकती है.

इसलिए दवा खरीदते समय केवल कीमत और डिलीवरी की जल्दी न करें. वेबसाइट की विश्वसनीयता जांचें, अनजान लिंक से बचें और OTP या UPI PIN जैसी जानकारी किसी के साथ साझा न करें. डिजिटल दुनिया में सतर्कता ही सबसे मजबूत सुरक्षा है.


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