पांच माह में कैसे बनेंगे सात हजार पीएम आवास !

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देवघर: जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पांच माह में सात हजार प्रधानमंत्री आवास बनाने का लक्ष्य रखा गया है. इस लक्ष्य पर अभी से ही सवाल उठने लगे हैं. क्योंकि यह आवास कोई एजेंसी नहीं बना रही, इसे लाभुकों को ही बनाना है. लाभुक इस तरह से योजनाओं को हलके में लेते हैं इसका जीता […]

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देवघर: जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पांच माह में सात हजार प्रधानमंत्री आवास बनाने का लक्ष्य रखा गया है. इस लक्ष्य पर अभी से ही सवाल उठने लगे हैं. क्योंकि यह आवास कोई एजेंसी नहीं बना रही, इसे लाभुकों को ही बनाना है. लाभुक इस तरह से योजनाओं को हलके में लेते हैं इसका जीता जागता उदाहरण है इंदिरा आवास योजना. इसमें भी लाभुक को ही आवास का निर्माण कराना होता है और पैसे सरकार देती है. प्राप्त आंकड़े के मुताबिक जिले भर में चार हजार इंदिरा आवास पांच सालों में नहीं बना पाया है. इसका मुख्य कारण जिले में योजनाओं की मॉनिटरिंग का अभाव माना जा रहा है. ऐसे में पीएम आवास योजना का क्या हश्र होगा और कैसे पांच महिने में लाभुक सात हजार इंदिरा आवास तैयार करेंगे यह देखनेवाली बात होगी.
झारखंड स्थापना दिवस पर होगा सामूहिक गृह प्रवेश : पीएम आवास योजन में लाभुकों को झारखंड स्थापना दिवस 15 नवंबर को सरकार सामुहिक गृह प्रवेश कराने का लक्ष्य रखा है. देवघर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कुल सात हजार पीएम आवास योजनाओं का लक्ष्य है, इसमें 6.5 हजार आवास की स्वीकृति दी गयी है. छह हजार लाभुकों ने पीएम आवास का कार्य शुरू तो कर दिया है, लेकिन मॉनिटरिंग का अभाव देखा जा रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में पीएम आवास में कुल 1,47,120 रुपया प्रत्येक लाभुक को दिया जाना है. इसमें 1.20 लाख मैटेरियल, छड़ व दरवाजा समेत 15,120 रुपया मजदूरी व 12 हजार रुपया शौचालय निर्माण मद में दिया जाना है. फरवरी 2017 से पीएम आवास की नींव खुदाई अभियान चलाकर योजना शुरू की गयी थी. इसमें छह हजार लाभुकों को पहली किस्त 24 हजार रुपये, 550 लाभुकों को दूसरी किस्त 20 हजार रुपये व महज तीन लाभुकों को तीसरी किस्त 15 हजार रुपये दिया गया है. एक भी लाभुकों चौथा किस्त नहीं दिया गया है. चौथा किस्त ढलाई के लिए 30 हजार रुपये दिये जाते हैं. एक भी आवास का कार्य ढलाई तक नहीं पहुंच पाया है. ऐसी परिस्थिति में 15 नवंबर में गृह प्रवेश कैसे होगा. प्रखंडों के पास सही मॉनिटरिंग नहीं है, पदाधिकारियों का अभाव है. कई पंचायतों में पंचायत सचिव दो-दो पंचायत के प्रभार में है. मॉनिटरिंग के लिए प्रखंडस्तर पर को-ऑर्डिनेटर की नियुक्ति प्रक्रिया अब तक जिले में चालू नहीं हुई है.
सारवां : चार माह में नहीं बना एक भी आवास
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीणों को प्राथमिकता के आधार पर आवास उपलब्ध कराने के लिए पूर्व में सर्वे करा कर लोगों का सेक डाटा तैयार कराया गया था. सारवां प्रखंड में 719 पीएम आवास निर्माण का लक्ष्य है. इसमें 644 पीएम आवास निर्माण की स्वीकृति मिली. प्रखंड में इन आवासों के निर्माण की मॉनिटरिंग के लिए पर्यवेक्षकों की प्रतिनियुक्ति की गई है. लेकिन चार माह बाद एक भी प्रधानमंत्री आवास की ढलाई का कार्य नहीं हो सका है. प्रखंड क्षेत्र के दोंदिया, जियाखाडा, पहारिया, लखोरिया, डकाय व सारवां पंचायतों में ही आवास निर्माण की स्वीकृति हुई है. चार माह बाद भी मात्र से नींव से तीन-चार फीट ही दीवार खड़ी हो पायी है. ऐसे में कैसे 15 नवंबर तक आवास पूर्ण होगा यह सवाल बना हुआ है. लाभुकों के अनुसार आवास निर्माण के एवज में उन्हें मात्र 24 हजार रुपये का भुगतान किया गया है, शेष राशि अब तक नहीं मिलने की वजह से कार्य को आगे नहीं बढा सके हैं.
आवास की आस में पहाड़िया का उजड़ा घर
मोहनपुर प्रखंड स्थित तुम्बावेल पंचायत के खरगडीहा गांव निवासी आदिम जनजाति पहाड़िया स्वर्गीय कैलाश पूजहर की पत्नी चूरनी देवी अपने पांच बच्चों के साथ स्कूल व पड़ोसी के घर में शरण लिये हुई है. चूरनी देवी का नाम सामाजिक व आर्थिक गणना 2011 की सूची के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभुकों में है. सूची में चूरनी का स्कोर-02 है. द्वितीय सूची में नाम रहने की वजह से चूरनी काे आवास योजना का लाभ अब तक नहीं मिला है. चूरनी की बेटी पार्वती ने बताया कि पिछले दिनों पंचायत कर्मियों द्वारा उन्हें सूचना दी गयी कि उनकी मां का नाम पीएम आवास की सूची में दर्ज है, इसलिए जल्द योजना का लाभ मिलेगा. इसलिए पुराना मिट्टी व फुस का घर तोड़ा गया. मगर दो माह बाद भी आवास का काम चालू नहीं हुआ. अब दूसरे के घरों में सबको रहना पड़ रहा है
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