दुष्कर्म से बरी, धोखा देने के आरोप में एक साल की सजा
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया विधवा के साथ निकाह करने का किया था वादा सेशन जज दो कृष्ण कुमार की अदालत का फैसला नौ साल तक न्यायिक प्रक्रिया में चला मामला देवघर : विधवा के साथ दुष्कर्म करने व निकाह का वादा कर मुकर जाने के मामले में सेशन जज दो कृष्ण कुमार […]
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50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया
विधवा के साथ निकाह करने का किया था वादा
सेशन जज दो कृष्ण कुमार की अदालत का फैसला
नौ साल तक न्यायिक प्रक्रिया में चला मामला
देवघर : विधवा के साथ दुष्कर्म करने व निकाह का वादा कर मुकर जाने के मामले में सेशन जज दो कृष्ण कुमार की अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाया. इस मामले के आरोपित फारूक अंसारी को दुष्कर्म के आरोप में राहत तो मिल गयी, लेकिन वादाखिलाफी के आरोप में दोषी पाकर एक साल की सश्रम सजा सुनायी गयी. साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. कोर्ट ने फैसले में कहा है कि जुर्माना की राशि पीड़िता को दी जायेगी. जुर्माना की राशि नहीं देने पर आरोपित को अतिरिक्त छह माह की सामान्य कैद काटनी होगी. आरोपित सारठ थाना के केरबांक गांव का रहने वाला है
जबकि पीड़िता मधुपुर थाना के महुबआडाबर गांव की रहने वाली है. इस मामले में अभियोजन पक्ष से अपर लोक अभियोजक ब्रह्मदेव पांडेय व बचाव पक्ष से एडवोकेट रंजीत सिन्हा व दिनेश्वर पंडित ने पक्ष रखे. ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष से सात लोगों ने गवाही दी. न्यायालय ने भादवि की धारा 317 में दोषी करार दिया व एक साल की सश्रम सजा दी गयी.
क्या था मामला
मधुपुर थाना के महुआडाबर गांव की रहने वाली एक महिला ने घटना के संबंध में मधुपुर थाना कांड संख्या 155/2007 दर्ज कराया. इसमें सारठ थाना के केरबांक गांव निवासी फारूक अंसारी को आरोपित किया है. दर्ज प्राथमिकी के अनुसार पीड़िता विधवा है. आरोपित की बहन महुआटांड़ में रहती है जहां पर आने-जाने के क्रम में विधवा से संपर्क हुआ व निकाह का झांसा देकर हवश का शिकार बनाया. पहली घटना 10 मार्च 2007 को घटी थी, पश्चात क्रम जारी रहा.
विधवा जब गर्भवती हो गयी तो आरोपित ने निकाह से इनकार दिया. बाद में विधवा ने एक बच्ची को जन्म दी जो कुछ दिनों के बाद मर गयी. पीड़िता ने इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराया जिसमें भादवि की धारा 376 लगायी गयी. पुलिस ने अनुसंधान कर आरोप पत्र दाखिल किया. पश्चात केस का सेशन ट्रायल के लिए भेजा गया जहां पर दोनाें पक्षों की बहस सुनने के बाद फैसला सुनाया गया.
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