विभाग नहीं, एजेंसियां वसूल रही लोगों से 2000 फाइन
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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देवघर: झारखंड में होल्डिंग टैक्स वसूली में सरकार द्वारा नियुक्त एजेंसियों के क्रियाकलाप में पारदर्शिता नहीं है. यही कारण है कि उनके कार्यालय में होल्डिंग टैक्स भुगतान करने वालों को होल्डिंग टैक्स के अलावा दो हजार फाइन लिया जा रहा है. जबकि सरकार की ही वेबसाइट से अॉनलाइन भुगतान करने पर फाइन नहीं लिया जा […]
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देवघर: झारखंड में होल्डिंग टैक्स वसूली में सरकार द्वारा नियुक्त एजेंसियों के क्रियाकलाप में पारदर्शिता नहीं है. यही कारण है कि उनके कार्यालय में होल्डिंग टैक्स भुगतान करने वालों को होल्डिंग टैक्स के अलावा दो हजार फाइन लिया जा रहा है. जबकि सरकार की ही वेबसाइट से अॉनलाइन भुगतान करने पर फाइन नहीं लिया जा रहा है. एक ही होल्डिंग टैक्स के भुगतान का दो अलग-अलग तरीका लोगों की समझ से परे है. एजेंसियों की कार्यशैली ने सरकार की पारदर्शिता पर ही सवाल खड़ा कर दिया है.
वेबसाइट पर अॉनलाइन में नहीं है फाइन का जिक्र : संताल परगना हो या राज्य के अन्य जिले ये फाइन सरकार या उनके मातहत विभाग नहीं वसूल रहे. फाइन की वसूली सरकार द्वारा नियुक्त प्राइवेट एजेंसियां (एनजीओ) वसूल रहे हैं. इस एवज में सरकार एजेंसी को 16 फीसदी तक कमिशन देती है. जबकि झारखंड शहरी विकास अभिकरण की वेबसाइट पर जब आप अपना होल्डिंग डिटेल्स देखेंगे तो उसमें कहीं भी दो हजार फाइन का जिक्र नहीं है.
उदाहरण के लिए यदि आपका बढ़ा हुआ होल्डिंग टैक्स 2880 रुपये है तो अॉनलाइन भुगतान भी इतनी ही राशि का करने का अॉप्शन है. लेकिन यही जब निगम/नगर परिषद या नगर पंचायतों में नियुक्त एजेंसियों के पास होल्डिंग टैक्स जमा करेंगे तो वहां 2880 के अलावा दो हजार फाइन भी जोड़कर भुगतान करना होगा. इस तरह सरकार और उनके द्वारा नियुक्त वसूली एजेंसी की पेच में शहरवासी पिस रहे हैं.
सैफ नंबर नहीं दिया जाता है लोगों को : जिन लोगों ने सैफ फार्म 31 मार्च से पहले भर दिया है. उन लोगों को जो रिसिविंग दी गयी है उसमें 18 अंकों का सैफ नंबर नहीं दिया गया है. वसूली एजेंसी का फंडा यही है कि सैफ नंबर यदि पूरा अापके पास रहेगा तो ही आप अॉनलाइन भुगतान के अॉप्शन में जा सकते हैं. इस कारण अधिकांश लोग बिना सैफ नंबर के कार्यालय में ही जाकर भुगतान करने को विवश हो रहे हैं और एजेंसी दो हजार अतिरिक्त जोड़कर उनसे भुगतान प्राप्त कर रही है.
संताल में हैं एक नगर निगम, पांच नगर परिषद व चार नगर पंचायत
संताल परगना में एक ही देवघर नगर निगम है, जबकि पांच नगर परिषद व चार नगर पंचायत हैं. इसमें देवघर नगर निगम, मधुपुर नगर परिषद, दुमका नगर परिषद, बासुकिनाथ नगर पंचायत, साहेबगंज नगर परिषद, राजमहल नगर पंचायत, जामताड़ा नगर पंचायत, मिहिजाम नगर परिषद, पाकुड़ नगर परिषद व गोड्डा नगर पंचायत.
कहते हैं नियुक्त एजेंसी के प्रतिनिधि
-देवघर नगर निगम में नियुक्त एजेंसी एसपीएस प्राइवेट लिमिटेड के एरिया मैनेजर सदानंद शर्मा ने कहा कि सरकार के निर्देशानुसार ही वे काम कर रहे हैं. इस मामले में वे कुछ भी कहने के लिए अधिकृत नहीं हैं. जो भी जानकारी चाहिए निगम के अधिकारियों से लीजिये.
कहते हैं सीइओ
-देवघर नगर निगम के सीइओ संजय कुमार सिंह ने कहा कि जनता को हो रही परेशानी से वे सरकार को अवगत करा चुके हैं. निर्णय सरकार के स्तर से होना है. इसमें यहां से कुछ नहीं हो सकता है. सरकार यदि इसमें संशोधन करती है तो उसी अनुरूप आदेश का पालन होगा. अॉनलाइन में दो हजार का फाइन का जिक्र नहीं होने के सवाल को वे टाल गये.
नगर विकास मंत्री का है कहना
-होल्डिंग टैक्स में दो हजार रुपये के फाइन के सवाल पर नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने पिछले दिनों देवघर में कहा था कि अनावश्यक रूप से दो हजार का फाइन नहीं लिया जायेगा. जो डिफाल्टर होंगे उन्हीं से फाइन वसूल किया जायेगा. जहां तक फाइन पर रोक लगाने की बात है तो सरकार का निर्णय है. केबिनेट का फैसला है, वे सरकार के समक्ष समस्या रखेंगे. जनता को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी. सरकार इस पर पुनर्विचार करेगी.
एजेंसी का क्या है औचित्य?
होल्डिंग टैक्स वसूली में एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं. एजेंसी की नियुक्ति लोगों को सुविधा पहुंचाने के लिए की गयी थी, न कि अतिरिक्त बोझ डालने के लिए. सरकार ने (jharkhandsuda.net) अॉनलाइन व्यवस्था की है तो वसूली का ठेका एनजीओ को क्यों दे दिया. ये एजेंसियां सरकार के वेबसाइट से इतर सभी से 2000 का अतिरिक्त फाइन वसूल रही है.
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