कारखाना प्रबंधन व मजदूर यूनियनों के बीच वार्ता में नहीं बनी सहमति

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वार्ता विफल. ला ओपाला में 30 अप्रैल से बंद है उत्पादन, बुधवार को सुलह का प्रयास ला ओपाला में मजदूर यूनियन की मांगों को लेकर कारखाना प्रबंधन के साथ बुधवार को हुई वार्ता विफल रही. 30 अप्रैल से ही उत्पादन बंद है. अब आठ मई को दुमका में श्रम आयुक्त के समक्ष अंतिम दौर की […]

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वार्ता विफल. ला ओपाला में 30 अप्रैल से बंद है उत्पादन, बुधवार को सुलह का प्रयास

ला ओपाला में मजदूर यूनियन की मांगों को लेकर कारखाना प्रबंधन के साथ बुधवार को हुई वार्ता विफल रही. 30 अप्रैल से ही उत्पादन बंद है. अब आठ मई को दुमका में श्रम आयुक्त के समक्ष अंतिम दौर की बातचीत होगी.
मधुपुर : ला ओपाला आरजी लिमिटेड कारखाना प्रबंधन व मजदूर यूनियन के बीच बुधवार की शाम को कारखाना परिसर में हुए वार्ता पर पूर्ण रूप से सहमति नहीं बन पायी है. अब 8 मई को दुमका में श्रम आयुक्त की उपस्थिति में दोनों पक्षों के बीच वार्ता के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जायेगा. फिलहाल कारखाना में उत्पादन का काम बंद ही रहेगा.
इस बीच कारखाना में उत्पादन बंद होने व मजदूरों की मांगों को लेकर उपायुक्त के निर्देश पर देवघर के श्रमाधीक्षक राजेश कुमार व श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी किशोर कुमार सिंह भी कारखाना पहुंचे और प्रबंधन एवं मजदूरों से पूरे मामले की जानकारी ली. बताते चलें कि ग्लास कारखाना में पिछले दो माह से फर्निश बदलने का काम हो रहा था. इस बीच कारखाना के अन्य भट्टियों से काम चल रहा था. लेकिन उत्पादन काफी गिर गया था. मरम्मत के बाद राधा ग्लास मजदूर यूनियन ने प्रबंधन के समक्ष 22 सूत्री मांग पत्र सौंप दिया.
इनमें मजदूरों को 27 प्रतिशत बोनस देने, प्रत्येक साल यूनियन से अलग-अलग समझौता करने, अस्थायी मजदूरों को छह माह के अंदर स्थायी करने, सीआईएल को सात से बढ़ा कर पंद्रह दिन करने, किसी मजदूर की मृत्यु होने पर 3 लाख मुआवजा देने, मजदूर के घर शादी पर 30 हजार अग्रिम देने, ठेके के मजदूरों को 8.33 प्रतिशत बोनस देने, 24 घंटा कारखाना में एंबुलेंस सेवा देने, सभी मजदूरों को जीवन बीमा कराने, यूनियन का चंदा दोबारा चालू कराने, प्रत्येक माह 30 दिन कार्य के बदले 34 का भुगतान कराना, मजदूरों के बच्चों को शिक्षा के लिए स्कूल की व्यवस्था करना, रात को काम करने वाले मजदूरों को नाइट अलाउंस दिये जाने आदि मांग प्रमुख है.
आठ मई को दुमका में श्रम आयुक्त की मौजूदगी में फिर होगी बातचीत
चार मांगों पर सहमति नहीं
कारखाना प्रबंधन ने 30 अप्रैल की शाम से सभी भट्टियों को बंद कर उत्पादन ठप कर दिया. प्रबंधन द्वारा अचानक उत्पादन बंद करने से मजदूरों में भी बैचेनी बढ़ गयी और मामले की जानकारी श्रम मंत्री समेत अन्य अधिकारियों के समक्ष रखी. जिसके बाद कारखाना प्रबंधन व मजदूरों के बीच बैठक रखा गया था.
हालांकि बुधवार की बैठक में अधिकतर मांगों पर सहमति बन गयी. लेकिन मुख्य चार मांगों पर सहमति नहीं बनने के कारण प्रबंधन ने उत्पादन फिलहाल बंद रखने का निर्णय लिया है. ला ओपाला के अलावे क्रिस्टल डिवीजन का उत्पादन भी बंद है. दोनों ही कारखाना में स्थायी व दैनिक को मिला कर तकरीबन 800 मजदूर कार्यरत हैं. वार्ता में कारखाना के वरिष्ठ महाप्रबंधक राहत अली, पीआरओ हेमंत सिंह, कार्मिक प्रबंधक पंकज कुमार सिंह, लेबर ऑफिसर प्रदीप कुमार उपाध्याय व यूनियन की तरफ से अध्यक्ष शिवा दास, सचिव मो शमीम, जियाउल हक, प्रमोद राय आदि दर्जनों मजदूर शामिल थे.
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